'घूमण आओ, हरियाणा देखो' के साथ हरियाणा में पर्यटन को नई पहचान देने की तैयारी, 38 फार्म टूरिज्म डेस्टिनेशन और 11 होमस्टे
Udaipur Times, Haryana News, चंडीगढ़ : हरियाणा अब केवल देश के एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक जाने का मार्ग नहीं, बल्कि अपने आप में एक आकर्षक पर्यटन गंतव्य बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। हरियाणा सरकार कुरुक्षेत्र में महाभारत और गीता की विरासत, पिंजौर के ऐतिहासिक उद्यान, सूरजकुंड की समृद्ध शिल्प परंपरा, मोरनी की पहाड़ियां, नारनौल-महेंद्रगढ़ की ऐतिहासिक धरोहर और गांवों की हरियाणवी संस्कृति को एक साथ जोड़कर प्रदेश के पर्यटन को नई पहचान देने की तैयारी कर रही है।
हरियाणा के विरासत एवं पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद कुमार शर्मा ने विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर कहा कि मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार का प्रयास है कि हरियाणा से पर्यटक केवल गुजरें नहीं, बल्कि यहां रुकें, घूमें, प्रदेश की संस्कृति और विरासत को करीब से जानें तथा ऐसे अनुभव लेकर लौटें कि वे दोबारा हरियाणा आने के लिए लालायित रहें। इसी सोच के साथ प्रदेश सरकार का नया संदेश है—‘घूमण आओ, हरियाणा देखो।’
उन्होंने कहा कि पर्यटन केवल घूमने-फिरने का माध्यम नहीं, बल्कि रोजगार, स्थानीय अर्थव्यवस्था और प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने का महत्वपूर्ण जरिया है। इसलिए सरकार पर्यटन को होटल और पर्यटन परिसरों तक सीमित रखने के बजाय स्थानीय लोगों, किसानों, शिल्पकारों, गाइड, टैक्सी संचालकों, रेस्तरां और छोटे कारोबारियों से जोड़ने पर जोर दे रही है।
पर्यटन के नए क्षेत्रों पर फोकस
हरियाणा पारंपरिक हाईवे टूरिज्म से आगे बढ़कर विरासत, आध्यात्मिक एवं तीर्थ, इको, एडवेंचर, ग्रामीण एवं फार्म टूरिज्म, होमस्टे, गोल्फ, एमआईसीई और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा दे रहा है। इसके लिए राज्य में 20 पर्यटन हब एवं गंतव्य क्षेत्रों की पहचान की गई है।
हरियाणा पर्यटन निगम के पास वर्तमान में 42 पर्यटन परिसरों का नेटवर्क है। इनमें 842 वातानुकूलित कमरे, आठ डोरमेट्री तथा 56 कॉन्फ्रेंस, मल्टीपर्पज, बैंक्वेट एवं कन्वेंशन हॉल शामिल हैं। निगम द्वारा 42 रेस्टोरेंट, पांच फास्ट फूड सेंटर और 15 पेट्रोल पंप भी संचालित किए जा रहे हैं।
एयरपोर्ट से शुरू होगी हरियाणा की पर्यटन यात्रा
कैबिनेट मंत्री डॉ. अरविंद कुमार शर्मा ने बताया कि पर्यटकों तक सीधी पहुंच बनाने के लिए 2 सितंबर 2026 को शहीद भगत सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, मोहाली के आगमन टर्मिनल पर हरियाणा सरकार द्वारा पर्यटक सूचना एवं सुविधा केंद्र शुरू किया गया है। यहां पर्यटकों को हरियाणा के पर्यटन एवं विरासत स्थलों, आध्यात्मिक केंद्रों, पर्यटन सर्किट, होटल-रिसॉर्ट, मेलों और उत्सवों तथा बुकिंग से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है।
सरकार का प्रयास है कि इस क्षेत्र में हवाई मार्ग से आने वाले पर्यटकों के यात्रा कार्यक्रम में हरियाणा को भी प्रमुख स्थान मिले।
एआई आधारित ‘सरस्वती’ डिजिटल गाइड से पर्यटन को तकनीक का साथ
पर्यटन क्षेत्र में आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए एआई आधारित ‘सरस्वती’ डिजिटल गाइड को पर्यटन से जोड़ा गया है। इसके माध्यम से पर्यटक प्रदेश के पर्यटन स्थलों, इतिहास, धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत, मेलों-उत्सवों, होटल और अन्य सुविधाओं की जानकारी संवादात्मक तरीके से प्राप्त कर सकेंगे। पर्यटकों की रुचि के अनुसार घूमने के स्थान और अनुभव चुनने में भी यह तकनीक मदद करेगी।
ज्योतिसर में 219 करोड़ रुपये से अधिक की दो प्रमुख परियोजनाएं
उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा कुरुक्षेत्र को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए ज्योतिसर में महत्वपूर्ण परियोजनाएं पूरी की गई हैं। यहां 205.58 करोड़ रुपये की लागत से महाभारत अनुभव केंद्र विकसित किया गया है। इसके साथ 13.63 करोड़ रुपये की लागत से विराट स्वरूप लाइट एंड साउंड शो तैयार किया गया है।
दोनों परियोजनाओं पर कुल लागत 219 करोड़ रुपये से अधिक है। इनका उद्देश्य महाभारत और भारतीय सभ्यतागत विरासत को देश-विदेश के पर्यटकों, विद्यार्थियों, युवाओं और परिवारों के लिए आधुनिक एवं आकर्षक अनुभव के रूप में प्रस्तुत करना है।
सूरजकुंड—हरियाणा का वैश्विक सांस्कृतिक मंच
डॉ. अरविंद कुमार शर्मा ने बताया कि सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला हरियाणा की कला, संस्कृति और शिल्प परंपरा को वैश्विक मंच प्रदान कर रहा है। वर्ष 2026 में आयोजित 39वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेले में 53 देशों के 700 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। मिस्र भागीदार देश तथा उत्तर प्रदेश और मेघालय थीम राज्य रहे।
अब सूरजकुंड को केवल वार्षिक मेले तक सीमित रखने के बजाय वर्षभर सक्रिय सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर भी काम किया जा रहा है। मेला परिसर में विवाह एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने तथा सितंबर से दिसंबर के बीच अतिरिक्त मेले के आयोजन का प्रस्ताव भी है।
गांव और खेत बनेंगे पर्यटन के नए केंद्र
हरियाणा में ग्रामीण और फार्म टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए 38 फार्म टूरिज्म डेस्टिनेशन और 11 होमस्टे पंजीकृत हैं। इनके माध्यम से पर्यटकों को गांव का जीवन, खेती-किसानी, स्थानीय खान-पान, लोक संस्कृति और हरियाणवी मेहमाननवाजी का अनुभव उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है।
पर्यटन मंत्री ने कहा कि पर्यटन से होने वाली आय का लाभ गांवों और स्थानीय समुदायों तक पहुंचना जरूरी है। इससे किसानों, शिल्पकारों, गाइड, परिवहन सेवाओं, रेस्तरां और छोटे कारोबारियों के लिए रोजगार एवं आय के नए अवसर पैदा होंगे।
एडवेंचर टूरिज्म को मिलेगा नया विस्तार
उन्होंने बताया कि युवाओं और एडवेंचर पसंद पर्यटकों के लिए हथिनीकुंड बैराज, टिक्कर ताल और रोहतक की तिल्यार झील को एडवेंचर स्पोर्ट्स हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां वाटर स्पोर्ट्स, बोटिंग, बनाना बोट, जेट स्कीइंग और कैंपिंग जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। वहीं, ढोसी की पहाड़ियों पर रोपवे का निर्माण भी प्रगति पर है। परियोजना के लिए 19 कनाल एक मरला भूमि अधिग्रहित की गई है तथा भूमि खरीद और यूटिलिटी शिफ्टिंग के लिए पर्यटन विभाग द्वारा 3.27 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध कराई गई है।
मेले और उत्सव बनाएंगे वर्षभर पर्यटन का माहौल
कैबिनेट मंत्री ने बताया कि हरियाणा पर्यटन को किसी एक मौसम या आयोजन तक सीमित न रखकर पूरे वर्ष सक्रिय रखने के लिए विभिन्न मेलों और उत्सवों को पर्यटन कैलेंडर से जोड़ा जा रहा है। इनमें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला, बैसाखी उत्सव, पिंजौर आम मेला, तीज उत्सव, सूरजकुंड दीपावली मेला, भक्ति-सूफी उत्सव, अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव, हरियाणवी संस्कृति उत्सव और खाद्य उत्सव शामिल हैं।
वर्ष 2026 का पिंजौर आम मेला 10 से 12 जुलाई तक आयोजित किया गया।
दुनिया को हरियाणा की विरासत और संस्कृति से जोड़ना लक्ष्य
डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि हरियाणा की पहचान केवल उसके औद्योगिक और कृषि विकास से नहीं, बल्कि उसकी समृद्ध ऐतिहासिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत से भी है। कुरुक्षेत्र महाभारत और गीता की कहानी सुनाता है, सूरजकुंड भारत की शिल्प एवं सांस्कृतिक विविधता का उत्सव मनाता है, पिंजौर इतिहास और स्थापत्य की झलक देता है, जबकि मोरनी और टिक्कर ताल प्रकृति और रोमांच का अनुभव कराते हैं। प्रदेश के गांव पर्यटकों को असली हरियाणा से जोड़ सकते हैं।
उन्होंने कहा कि हरियाणा की विरासत प्राचीन है, लेकिन पर्यटन को लेकर सोच आधुनिक है। सरकार का प्रयास है कि नई तकनीक, बेहतर सुविधाओं और स्थानीय भागीदारी के माध्यम से हरियाणा को देश-विदेश के पर्यटकों के लिए आकर्षक गंतव्य बनाया जाए। उन्होंने दुनिया के पर्यटकों का आह्वान करते हुए कहा—“घूमण आओ, हरियाणा देखो और यहां की यादें अपने साथ ले जाओ।”