हरियाणा की बेटी दिव्या ने NEET में रचा इतिहास, माता-पिता 15 वर्षों से स्कूल में बना रहे खाना
Udaipur Times, Haryana News : कहते है की मेहनत करने वालों को सफलता एक न एक दिन जरूर मिलती है। जब हौसले बुलंद हों और इरादे फौलादी, तो तंगहाली और मुश्किलें भी घुटने टेक देती हैं। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है जिला जींद के अहीरका गांव की बेटी दिव्या कारकी ने।
दिव्या ने देश की सबसे प्रतिष्ठित और चुनौतीपूर्ण चिकित्सा प्रवेश परीक्षा 'नीट' में 574 अंक हासिल कर ऑल इंडिया 20,903वीं रैंक प्राप्त की है। दिव्या की इस सफलता ने साबित कर दिया है कि कामयाबी संसाधनों की मोहताज नहीं, बल्कि कड़ी मेहनत और लगन की चेरी होती है।
दिव्या की यह सफलता इसलिए बेहद खास है क्योंकि उनके माता-पिता, दुर्गा बहादुर और जानुका, पिछले 15 वर्षों से जींद के एक निजी स्कूल में बतौर कुक (रसोइया) काम कर रहे हैं। दिन-रात तपने वाली गर्मी में दूसरों के लिए रोटियां सेकने वाले इस दंपति का सपना बस इतना था कि जो परेशानियां उन्होंने झेली हैं, वो उनकी बेटी को न देखनी पड़ें।
पिता दुर्गा बहादुर कहते हैं, "हम दिन-रात गर्मी में रोटी बनाते हैं। मैं हमेशा बेटी से कहता था कि तू बस ध्यान से पढ़ ले, ताकि तुझे कभी हमारी तरह दुखी न होना पड़े। लेकिन वो डॉक्टर बन जाएगी, यह तो हमने जिंदगी में कभी सपने में भी नहीं सोचा था।
