हरियाणा के IAS प्रदीप कुमार गिरफ्तार, 670 करोड़ के घोटाले में बड़ी गिरफ्तारी

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हरियाणा के IAS प्रदीप कुमार गिरफ्तार, 670 करोड़ के घोटाले में बड़ी गिरफ्तारी

Udaipur Times, Haryana News : हरियाणा से बड़ी खबर सामने आ रही है। हरियाणा के IAS प्रदीप कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया है, इसे 670 करोड़ के घोटाले में बड़ी गिरफ्तारी मानी जा रही है। 

हरियाणा के बहुचर्चित IDFC फर्स्ट बैंक फंड घोटाले में CBI ने बड़ी कार्रवाई करते हुए IAS अधिकारी प्रदीप कुमार को पकड़ लिया है। जानकारी के अनुसार उस समय वे हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) में सदस्य सचिव थे। 

जानकारी के अनुसार उन पर सरकारी धन के गबन में सीधे तौर पर संलिप्त होने का CBI ने आरोप लगाया है। सरकार ने उन्हें 8 अप्रैल 2026 को ही सस्पेंड कर दिया था।

CBI से मिली जानकारी के मुताबिक प्रदीप कुमार लंबे समय से जांच में सहयोग भी नहीं कर रहे थे। इसके अलावा जांच एजेंसी से बचने की कोशिश कर रहे थे। उनकी लोकेशन ट्रेस करने के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया है। खास बात ये है कि प्रदीप का आज रिटायरमेंट था। मगर, गिरफ्तारी के डर से वे अंडरग्राउंड थे। उन्होंने अग्रिम जमानत याचिका भी लगाई थी, जिस पर 2 जुलाई को सुनवाई होनी है।

इससे पहले ही CBI ने उन्हें अरेस्ट कर लिया। बता दें कि अब तक इस मामले में प्रदीप डागर को मिलाकर तीन IAS अरेस्ट हो चुके है। इससे पहले IAS आरके सिंह और पंकज अग्रवाल की गिरफ्तारी हुई थी।

कौन हैं IAS प्रदीप डागर ?

हरियाणा के वरिष्ठ IAS अधिकारी प्रदीप डागर 2011 बैच के IAS अधिकारी हैं। वे हरियाणा सिविल सेवा (HCS) से पदोन्नत होकर भारतीय प्रशासनिक सेवा में शामिल हुए। उनका जन्म 6 जून 1966 को हुआ। उन्होंने MSC और एमफिल की शिक्षा प्राप्त की है।

प्रशासनिक करियर

1999 में HCS अधिकारी के रूप में प्रशासनिक सेवा की शुरुआत।

शुरुआती नियुक्ति सिटी मजिस्ट्रेट, करनाल रही।

बाद में शिक्षा, पर्यावरण और परिवहन विभाग में कई अहम जिम्मेदारियां संभालीं।

31 अगस्त 2022 से 10 दिसंबर 2025 तक HSPCB में सदस्य सचिव रहे।

30 नवंबर 2025 को राज्य परिवहन विभाग में विशेष सचिव नियुक्त किए गए।

CBI ARRESTS PARDEEP KUMAR, IAS, THE THEN MEMBER SECRETARY OF HARYANA STATE POLLUTION CONTROL BOARD IN FUND MISAPPROPRIATION CASE

आज मंगलवार को हरियाणा के बहुचर्चित IDFC फर्स्ट बैंक–AU स्मॉल फाइनेंस बैंक सरकारी खातों के घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए IDFC बैंक के एरिया हेड और AU बैंक के एक ब्रांच मैनेजर को गिरफ्तार कर लिया है...

दोनों आरोपियों को आज पंचकूला स्थित विशेष सीबीआई कोर्ट में पेश किया गया...

CBI की विशेष कोर्ट ने दोनों आरोपियों को 3 दिन की सीबीआई रिमांड पर भेज दिया है।

बचाव पक्ष के वकील अभिषेक राणा ने जानकारी देते हुए बताया कि दोनों आरोपियों को तीन दिन की सीबीआई डिमांड पर भेजा गया है।

दोनों आरोपियों की पहचान आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में कैशियर चरणजीत सिंह रंधावा और एयू स्मॉल बैंक में डाटा एंट्री क्लर्क मोहम्मद शमीमदार के रूप में हुई है।

CBI की जांच के अनुसार दोनों बैंक अधिकारियों की भूमिका सरकारी विभागों के खातों के संचालन और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन में अहम मानी जा रही है। 

एजेंसी का कहना है कि इन अधिकारियों से पूछताछ के दौरान फर्जी दस्तावेजों, अवैध ट्रांजैक्शन और अन्य आरोपियों के साथ कथित मिलीभगत से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिलने की उम्मीद है। 

जांच एजेंसी पहले ही इस मामले में कई बैंक अधिकारियों, सरकारी कर्मचारियों और वरिष्ठ IAS अधिकारियों को गिरफ्तार कर चुकी है। 

CBI का दावा है कि हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों के खातों से करोड़ों रुपये की अनियमित निकासी और ट्रांसफर सुनियोजित तरीके से किए गए थे। 

बताया जा रहा है कि गिरफ्तार किए गए दोनों बैंक अधिकारियों की भूमिका सरकारी खातों के संचालन, फर्जी बैंकिंग दस्तावेजों के इस्तेमाल और संदिग्ध फंड ट्रांसफर की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण रही है। 

CBI अब रिमांड के दौरान दोनों से आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करेगी, ताकि पूरे नेटवर्क और घोटाले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका का पता लगाया जा सके।

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