हरियाणा की सतविंदर कौर ने खारे पानी में ढूंढा कमाई का जरिया ! लाखों की इनकम के साथ 18 लोगों को दिया रोजगार
Udaipur Times, Haryana News, सिरसा : आमतौर पर उच्च शिक्षा प्राप्त युवा नौकरी की तलाश में रहते हैं, लेकिन गांव रघुआना की सतविंदर कौर पत्नी गुरदीप सिंह ने पढ़ाई के बाद स्वरोजगार का रास्ता चुना। स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त सतविंदर कौर ने वर्ष 2022 में झींगा पालन का काम शुरू किया और अपनी मेहनत, वैज्ञानिक प्रशिक्षण तथा सरकारी सहायता के बल पर इस क्षेत्र में पहचान बनाई। आज वह जिले की अन्य महिलाओं और युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बनकर उभरी हैं।
वैज्ञानिक प्रशिक्षण से शुरू किया झींगा पालन
सतविंदर कौर ने झींगा पालन शुरू करने से पहले मत्स्य विभाग, सिरसा और जलीय कृषि अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान, हिसार से वैज्ञानिक प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस प्रशिक्षण के माध्यम से उन्होंने तालाब की तैयारी, झींगा बीज की देखभाल, जल गुणवत्ता प्रबंधन, वैज्ञानिक फीडिंग और बीमारी से बचाव सहित झींगा पालन से जुड़ी विभिन्न तकनीकों की जानकारी हासिल की। इसके बाद उन्होंने इस कार्य को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया।
28 लाख रुपये की यूनिट पर मिली 15.32 लाख रुपये की सब्सिडी
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत सतविंदर कौर की 28 लाख रुपये की झींगा पालन यूनिट पर सरकार की ओर से 15 लाख 32 हजार 900 रुपये की सब्सिडी प्रदान की गई। इस आर्थिक सहायता से उन्होंने आधुनिक सुविधाओं से युक्त झींगा पालन यूनिट स्थापित की। वैज्ञानिक तकनीकों और बेहतर प्रबंधन के माध्यम से उन्होंने उत्पादन बढ़ाने की दिशा में काम किया।
वर्ष 2025-26 में किया 16 टन झींगा उत्पादन
सतविंदर कौर की मेहनत का परिणाम उनके उत्पादन में भी दिखाई दिया। वित्त वर्ष 2025-26 में उनकी यूनिट में 16 टन झींगा उत्पादन हुआ। इस कार्य से गांव में रोजगार के अवसर भी सृजित हुए। उनकी यूनिट से 8 लोगों को प्रत्यक्ष तथा 10 लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला है। सतविंदर कौर के अनुसार, शुरुआत में उन्हें झींगा पालन के बारे में अधिक जानकारी नहीं थी, लेकिन मत्स्य विभाग के अधिकारियों और विशेषज्ञों के मार्गदर्शन से उन्हें इस व्यवसाय की बारीकियां सीखने का अवसर मिला।
तालाब की तैयारी से लेकर झींगा बीज, फीडिंग, पानी की गुणवत्ता और बीमारी के प्रबंधन तक वैज्ञानिक जानकारी ने उनके काम को व्यवस्थित बनाने में मदद की। सरकारी योजनाओं, तकनीकी प्रशिक्षण और मेहनत के समन्वय से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार तथा रोजगार सृजन की संभावनाएं विकसित की जा सकती हैं। झींगा पालन के क्षेत्र में उनकी उपलब्धि जिले की अन्य महिलाओं और युवाओं को भी स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित कर सकती है।