हरियाणा के योगेंद्र ने रचा इतिहास ! ₹1500 लगाकर शुरू किया मशरूम बिजनेस, अब करोड़ों में पहुंचा टर्नओवर
Udaipur Times, Haryana News : हरियाणा के महेंद्रगढ़ के योगेंद्र ने 2014 में सिर्फ 1500 रुपए लगाकर एक झोपड़ी से मशरूम उगाने का काम शुरू किया। इतने छोटे स्तर पर शुरू किए गए ढिंगरी मशरूम का काम इस कदर बढ़ा कि आज योगेंद्र का वार्षिक टर्नओवर करीब 3 करोड़ रुपए है। राष्ट्रीय मशरूम मेले में भाग लेने सोलन पहुंचे योगेंद्र ने कहा कि उन्होंने 2014 में मुरथल से मशरूम उत्पादन की ट्रेनिंग ली थी।
आज यह काम 50 और लोगों को भी रोजगार दे रहा है। उनके इस प्रयास को प्रेरणादायक मानते हुए हुए योगेंद्र को डायरेक्टोरेट ऑफ मशरूम रिसर्च (डीएमआर) चंबाघाट सोलन में आयोजित राष्ट्रीय मशरूम मेले में सम्मानित किया गया। मशरूम उत्पादन के क्षेत्र में उनके जैसे नवाचार अपने वाले पांच प्रगतिशील उत्पादकों को मेले में अवॉर्ड दिया गया। इनमें हरियाणा के दो अन्य किसान शामिल हैं।
असम के शुभाशीष ने शौकिया शुरू किया मशरूम उत्पादन
असम के सुभाशीष सरकार ने 2004 में शौकिया तौर पर मशरूम उगाने का काम शुरू किया। तब उन्होंने इस पर सिर्फ 1400 रुपए लगाए थे और ढिंगरी मशरूम उगाना शुरू किया। अब वे इसके अलावा मिल्की, टर्की टेल और दूसरी कई किस्मों की मशरूम भी उगा रहे हैं। अब 10 और लोग भी उनके साथ काम कर रहे हैं। मशरूम उत्पादन से वार्षिक टर्नओवर करीब 60 लाख रुपए का है। इन तीनों की तरह पंचकूला हरियाणा के वीरेंद्र सिंह और गुरुग्राम हरियाणा के जय भगवान भी मशरूम उत्पादन के क्षेत्र में अच्छा काम कर रहे हैं।
200 लोगों को रोजगार
प्रगतिशील मशरूम उत्पादक का अवॉर्ड लेने वाले ओडिशा के एपारी बुल्लू ने 2015 में डीएमआर सोलन से मशरूम उगाने की ट्रेनिंग ली। ट्रेनिंग लेने के बाद उन्होंने सात कमरे में बटन मशरूम उगाने का काम शुरू किया। रोजाना का उत्पादन करीब चार टन है। इतने बड़े काम को संभालने के लिए करीब 200 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर रोजगार मिल रहा है।