हरियाणा के सरसों उत्पादक किसानों के लिए HAU यूनिवर्सिटी ने जारी किए महत्वपूर्ण सुझाव, बताया उन्नत किस्में व खाद-बीज की सटीक मात्रा

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हरियाणा के सरसों उत्पादक किसानों के लिए HAU यूनिवर्सिटी ने जारी किए महत्वपूर्ण सुझाव, बताया उन्नत किस्में व खाद-बीज की सटीक मात्रा 

Udaipur Times, Haryana Farmer news : सरसों उत्पादक किसानों के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार द्वारा किसानों को आगामी रबी सीजन में सरसों की खेती के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं ताकि किसानों को अच्छी पैदावार हासिल हो सकें। 

बिजाई का उपयुक्त समय 

सरसों की बिजाई के लिए 20 अक्टूबर तक का समय उपयुक्त रहता है। लेकिन पूरे अक्टूबर माह तक भी कर सकते हैं। किसान साथी बिजाई करने से पहले मौसम का अवश्य ध्यान रखे। बिजाई के लिए दिन का तापमान 30-32 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए और यह भी सुनिश्चित करें की बिजाई के वक्त 5-6 दिन तक बारिश आने की आशंका ना हो व खेत में अधिक नमी ना रहे।

बीज उपचार व खाद की मात्रा 

बुवाई के लिए साफ़, स्वस्थ एवं रोग मुक्त प्रमाणित बीज ही उपयोग करें। 

तना गलन रोग से बचने के लिए किसान भाई, बिजाई से पहले 2 ग्राम कार्बेन्डाजिम प्रति किलोग्राम बीज के हिसाब से सूखा बीज उपचार अवश्य करें।

खाद के लिए 35 किलोग्राम यूरिया, 75 किलोग्राम सिंगल सुपर फॉस्फेट व 14 किलोग्राम म्यूरेट ऑफ़ पोटाश प्रति एकड़ की दर से बिजाई के समय डालें। या प्रति एकड़ 30 किलोग्राम यूरिया व 25 किलोग्राम DAP के रूप में बिजाई के समय डाल सकते हैं। भूमि में यदि जस्ते की कमी है तो 10 किलोग्राम जिंक सल्फेट प्रति एकड़ आखिरी जुताई से पहले खेत में बखेर कर जुताई कर दें।

उन्नत किस्में 

समय पर बिजाई व सिंचिंत अवस्था के लिए किसान भाई RH-725, RH-1706, RH-1975 व RH-30 किस्मों का चयन कर सकते हैं। समय पर बिजाई व बारानी अवस्था के लिए RH- 725, RH- 1424 व RH- 761 किस्म की बिजाई कर सकते हैं।

जो किसान भाई RH-1706 किस्म की बिजाई करना चाहते हैं वो यह ध्यान रखें कि तेल की गुणवत्ता बनाये रखने के लिए किसी भी सरसों की किस्म में कम से कम 150 मीटर की दुरी होनी चाहिए।

बीज के अच्छे अंकुरण के लिए खेत को अच्छी तरह से तैयार करना चाहिए। सिंचित क्षेत्रों में दर्मियान मिट्टी पलटने वाले हल से पहले जुताई करने के 2 से 3 बार हल, हैरो या कल्टीवेटर से जुताई करके सुहागा अवश्य लगाएं।

सरसों की अच्छी पैदावार लेने के लिए समय की बिजाई व सिंचित अवस्था में एक किलोग्राम बीज प्रति एकड़ उपयुक्त रहता है। समय की बिजाई व बारानी अवस्था के लिए 1.25 किलोग्राम बीज प्रति एकड़ डालें। कतार से कतार की दूरी 45 सेंटीमीटर तक अवश्य रखनी चाहिए।

अन्य जरूरी सुझाव 

फसल में फास्फोरस तथा गंधक की आवश्यक्ता पूरी करने के लिए सिंगल सुपर फास्फेट का प्रयोग करें क्योंकि इसमें 12% गंधक होती हैं। 
यदि फास्फोरस की पूर्ति के लिए DAP का इस्तेमाल करना हैं तो उसमें 2 कट्टे (100 किलोग्राम) जिप्सम या बेंटोनाइट सल्फर 12 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से बिजाई से पहले की जुताई के समय या बिजाई पूर्व सिंचाई के समय दें।

प्रारम्भिक अवस्था में चितकबरा क्रीट अथवा पेटेड बग से बचने के लिए फसल उगने के समय 200 मिलीलीटर मैलाथियान 50 ई.सी को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ छिड़काव करें।

विस्तृत जानकारी करें हासिल 

डॉ राम अवतार: 9467432742
डॉ राकेश पुनियाँ: 9992385833
डॉ नीरज कुमार: 8569942532
डॉ दलीप कुमार: 9068660058

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