राजमार्ग जमीन अधिग्रहण मामले में आदेश की अवहेलना पर हाई कोर्ट सख्त, DC को होना पड़ेगा पेश
Udaipur Times, New Delhi : पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा सरकार को बार-बार अवसर दिए जाने के बावजूद 16 मार्च 2026 के आदेश का पालन नहीं करने पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि अगली सुनवाई तक आदेश का अनुपालन नहीं किया गया तो संबंधित उपायुक्त को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होकर जानकारी देनी होगी। मामला फरीदाबाद से जुड़ा है जहां पर सरकार ने 1991 में राजमार्ग के निर्माण के जमीन का अधिग्रहण किया था।
मामले की सुनवाई के दौरान प्रभावित पक्ष की तरफ से हरियाणा के पूर्व एडवोकेट जनरल और भारत सरकार के पूर्व अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल मोहन जैन ने दलील दी कि संबंधित राजमार्ग का निर्माण करीब 11 वर्ष पहले ही पूरा हो चुका है। ऐसे में अब उक्त भूमि की राजमार्ग निर्माण के लिए आवश्यकता नहीं है। Haryana News
ऐसे में यह अधिग्रहित जमीन वापस जमीन मालिकों को दी जाए। कोर्ट को बताया गया कि राज्य का पहले यह रुख था कि संबंधित भूमि को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की आवश्यकता के अनुसार राजमार्ग के निर्माण के लिए अधिग्रहित किया जाना है लेकिन हाईवे पर एक पुल बनना था जो बन चुका है और अब इस जमीन अधिग्रहण से मुक्त कर छोड़ दिया जाना चाहिए। Haryana News
जैन ने कोर्ट को बताया कि एकल बेंच ने उनके पक्ष में फैसला दिया था और सरकार ने उसके खिलाफ अपील दायर की थी। कोर्ट को बताया गया कि बाकी भूमि भूमिहीन पट्टेदारों, भूमिहीन लोगों और विस्थापित किरायेदारों को आवंटित की गई है। हाई कोर्ट ने राज्य से यह जानकारी मांगी थी कि उस आदेश के बाद क्या कार्रवाई की गई और क्या कोई वैकल्पिक स्थल तलाशने या प्रतिवादियों को समायोजित करने के संबंध में विचार किया गया। Haryana News
राजमार्ग निर्माण के बाद बची हुई जमीन पर सरकार को यथाशीघ्र निर्णय लेने का आदेश, 1991 में किया था जमीन अधिग्रहण
आदेश का अनुपालन करने के लिए दिया राज्य को अवसर
हाई कोर्ट ने सरकार से यह भी पूछा कि ऐसे में राज्य से यह स्पष्ट कराया जाना चाहिए कि क्या वह अब भी इन अपीलों में दिए गए उपचार को आगे बढ़ाने में इच्छुक है या नहीं। साथ ही अधिशेष भूमि के उपयोग से संबंधित प्रावधानों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। हाई कोर्ट ने आदेश का अनुपालन करने के लिए राज्य को अवसर दिया गया। Haryana News
अदालत ने स्पष्ट चेतावनी दी थी कि आदेश का पालन नहीं होने पर संबंधित अधिकारी को तलब कर जानकारी ली जाएगी। हाई कोर्ट ने मामले को 27 अक्टूबर 2026 के लिए सूचीबद्ध करते हुए निर्देश दिया कि यदि अगली तारीख से पहले आदेश का अनुपालन नहीं किया गया तो संबंधित उपायुक्त को अदालत में उपस्थित रहना होगा।