दिल्ली-हरियाणा समेत 4 राज्यों की बल्ले-बल्ले, इन 25 शहरों में दौड़ेगी अब हाई स्पीड ट्रेन

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दिल्ली-हरियाणा समेत 4 राज्यों की बल्ले-बल्ले, इन 25 शहरों में दौड़ेगी अब हाई स्पीड ट्रेन

Udaipur Times, Orbital Rail Network : राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में यात्रियों के लिए एक बड़ी राहत की योजना सामने आई है। अधिकारियों ने एक विशाल ऑर्बिटल रेल नेटवर्क (Orbital Rail Network) विकसित करने की तैयारी शुरू की है, जो दिल्ली को उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के कई हिस्सों से हाई-स्पीड रेल के जरिए जोड़ेगा।

यह परियोजना National Capital Region के मास्टर प्लान 2041 के तहत तैयार की जा रही है, जिसका मुख्य उद्देश्य दिल्ली में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करना और आसपास के शहरों से कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना है।

कितने शहर होंगे शामिल?

इस प्रस्तावित रेल नेटवर्क से करीब 25 शहरों और कस्बों को जोड़ने की योजना है, जिससे लाखों दैनिक यात्रियों को फायदा मिलेगा। इसमें दिल्ली, सोनीपत, पानीपत, करनाल, रोहतक, पलवल, गुरुग्राम, झज्जर, रेवाड़ी, मेरठ, बागपत, मुजफ्फरनगर, शामली, खुरजा, गढ़मुक्तेश्वर, हस्तिनापुर, नूंह, भिवाड़ी, अलवर, नरेना आदि शहर शामिल हैं।

परियोजना की जरूरत क्यों?

अधिकारियों का अनुमान है कि अगले 15 सालों में NCR की आबादी लगभग 7.5 करोड़ से बढ़कर 15 करोड़ तक पहुंच सकती है। ऐसे में दिल्ली, नोएडा और गुरुग्राम पर यातायात और जनसंख्या का भारी दबाव बढ़ जाएगा। इसी समस्या को देखते हुए एक रिंग रोड जैसी रेल आधारित ऑर्बिटल प्रणाली बनाई जा रही है, जिससे यात्री और माल दोनों दिल्ली शहर के केंद्र में आए बिना एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंच सकेंगे।

पहले चरण की योजना

पहले चरण में रेल कॉरिडोर को कुंडली-गाजियाबाद-पलवल (KGP) और कुंडली-मानेसर-पलवल (KMP) एक्सप्रेसवे के साथ विकसित किया जाएगा। इस चरण में विशेष रूप से सोनीपत, पलवल, मेरठ, बागपत और खुरजा को लाभ मिलेगा। हरियाणा ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर (HORC) पर काम पहले से जारी है और इसका लगभग एक-तिहाई निर्माण पूरा हो चुका है।

जेवर एयरपोर्ट से सीधी कनेक्टिविटी

इस नेटवर्क का एक महत्वपूर्ण हिस्सा जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों को जोड़ना होगा। इससे रेवाड़ी, भिवाड़ी और अन्य मैन्युफैक्चरिंग हब तक पहुंच आसान होगी।

लागत और समयसीमा

पहले चरण (हरियाणा सेक्शन) की लंबाई: लगभग 126 किमी
अनुमानित लागत: लगभग 11,500 करोड़ रुपये
संभावित पूरा होने की तारीख: 2029

फिलहाल परियोजना का Detailed Project Report (DPR) तैयार किया जा रहा है।

क्या होगा फायदा?

परियोजना शुरू होने के बाद सड़क यातायात में भारी कमी आएगी, दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे और NH-44 जैसे मार्गों पर दबाव घटेगा, मेट्रो सिस्टम पर भी भीड़ कम होगी और माल परिवहन सड़क से हटकर रेल पर शिफ्ट होगा।

यह ऑर्बिटल रेल नेटवर्क दिल्ली-NCR के भविष्य के लिए एक बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर बदलाव माना जा रहा है। अगर योजना समय पर पूरी होती है, तो यह क्षेत्र की ट्रैफिक समस्या और आर्थिक कनेक्टिविटी दोनों में बड़ा सुधार ला सकती है।

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