शहर में सभी जगह हुआ होलिका दहन
देशभर में सभी जगह होलिका दहन कर होली मनाई गई। उदयपुर में सिटी पैलेस, जगदीश चौक, बड़ी होली, हाथीपोल, चेतक, फतेहपुरा और हिरन मगरी समेत लगभग शहर के प्रत्येक हिस्से में होलिका दहन कर रंगो के त्यौहार की शुरुआत की गई। कल शहर में धुलंडी के मौके पर रंगो से होली खेली जाएगी। होलिका दहन के अवसर पर महिलाओ ने पूजा पाठ की।
देशभर में सभी जगह होलिका दहन कर होली मनाई गई। उदयपुर में सिटी पैलेस, जगदीश चौक, बड़ी होली, हाथीपोल, चेतक, फतेहपुरा और हिरन मगरी समेत लगभग शहर के प्रत्येक हिस्से में होलिका दहन कर रंगो के त्यौहार की शुरुआत की गई। कल शहर में धुलंडी के मौके पर रंगो से होली खेली जाएगी। होलिका दहन के अवसर पर महिलाओ ने पूजा पाठ की।
होली वसंत ऋतु में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण भारतीय और नेपाली लोगों का त्यौहार है। यह पर्व हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। रंगों का त्यौहार कहा जाने वाला यह पर्व पारंपरिक रूप से दो दिन मनाया जाता है। यह प्रमुखता से भारत तथा नेपाल में मनाया जाता है। हिंदुओं के पवित्र त्योहारों में से होली एक प्रमुख त्यौहार है जिसे पुरे भारत में बड़े हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता है। इस पर्व को भी असत्य पर सत्य की विजय के रूप में मनाया जाता है। जहां एक तरफ होली वाले दिन सभी तरह तरह के रंगों में रंगे दिखाई पड़ते है तो वहीं दूसरी तरफ इससे एक दिन पहले होलिका दहन मनाई जाती है।
यह त्यौहार कई अन्य देशों जिनमें हिन्दू लोग रहते हैं वहाँ भी धूम-धाम के साथ मनाया जाता है। होली का त्योहार सभी के जीवन में खुशियां और रंग भर देता है। जीवन को रंगीन बनाने के कारण इस पर्व को रंग महोत्सव भी कहा जाता है। होली के त्योहार को एकता और प्यार का प्रतीक भी माना जाता है। यह एक पारंपरिक और सांस्कृतिक हिंदू त्योहार है। परंपरागत रुप से इसे बुराई पर अच्छाई की सफलता का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व हिंदुओं का महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है, मान्यताओं के अनुसार इस दिन होलिका जलाई जाती है और अगले दिन रंगों से होली खेली जाती है। होलिका दहन के दिन पवित्र अग्नि जलाई जाती है जो बुराई पर अच्छाई की जीत का संकेत है। होली वसंत ऋतु के आने और सर्दियों के जाने का प्रतीक है। यह शुभ दिन फाल्गुन महीने में पूर्णिमा को पड़ता है।

