राजकीय आदर्श आयुर्वेद औषधालय के आयुर्वेद चिकित्साधिकारी डॉ. शोभालाल औदीच्य ने बताया कि वर्तमान मे चल ही मौसमी बीमारियों के रोकथाम हेतु आयुर्वेद में बताये चिकित्सा सिद्धान्तों का पालन कर इन बीमारियों से बचाव सम्भव है। बेहतर है उपचार से बचाव • इस मौसम मे दिन में नहीं सोना चाहिये • प्रात: 3-4 कि.मी. घूमना चाहिये • ऊनीगरम वस्त्रो को एकाएक त्याग न करें • अत्यधिक ठण्डी चीजें नहीं खावे। • मधपान, धूम्रपान, गुटखा, तम्बाकू आदि से बचें। • अत्यधिक उपवास नहीं करें। • घर से खाली पेट नहीं निकले। • बफर डिनर में मिथ्या आहार विहार यानि दूध, दही, अचार, चटनी, जलेबी को साथ नहीं खावें, • आर्इस्क्रीमकोल्ड ड्रींक्स व अत्यधिक खट्टे पदार्थ प्रयोग नहीं करें। उपचार में लापरवाही न बरतें तेज बुखार, गले में तकलीफ, खांसी, सिरदर्द, बदनदर्द, नासास्राव तथा श्वास लेने में कठिनार्इ जैसे लक्षणों के उत्पन्न होते ही तुरन्त चिकित्सक से सम्पर्क करें। इसमें लापरवाही आपको, आपके परिवार को एवं आप से सम्पर्क में आने वाले व्यकितयों को संकट में डाल सकती है। बचाव के उपाय • सर्दी, जुकाम के संभावित रोगियो के सम्पर्क से बचें, रोगियों से लगभग एक मीटर की दूरी कायम रखें। • भीड़ भाड़ वाली जगह पर जाने से बचें, यदि फिर भी जाना पड़े तो मास्क पहन कर अपना बचाव करें। • सर्दी, जुकाम के संभावित रोगी खांसते व छींकते वक्त मुंह के आगे रूमाल आदि का प्रयोग करें। • नाक, मुंह व आखों को हाथ से बार बार छूने से बचें, हाथों की सफार्इ पर विशेष ध्यान देवें। • घर व बाहर सफार्इ का ध्यान रखें। फर्श तथा दीवारों पर जीवाणुरोधी द्रवों का पौंचा लगावें। • घर से बाहर के खानपान-रहनसहन को यथा संभव त्यागें। बिना कुछ खाये घर से न निकले। • जूस, सूप आदि का गर्मागर्म पर्याप्त मात्रा में सेवन करें। • पर्याप्त विश्राम एवं निद्रा शरीर को शकित प्रदान करता है। अत: आराम व गहरी नींद लेवें। • योगासन, अनुलोम-विलोम प्राणायाम, भसि्रका, सूर्य नमस्कार, खुली हवा में भ्रमण करें। • धूल, धुआँ एवं धूम्रपान से बचें। • दिन में न सोवें, शारीरिक व मानसिक तनाव, परिश्रम एवं थकान से बचें। • व्यकितगत एवं सार्वजनिक शौच (साफ-सफार्इ) का ध्यान रखें। • वर्षाऋतु के खानपान एवं रहनसहन के नियमों का पालन करें। रसायनौषधियों के घरेलु नुस्खे • तुलसी, कालीमिर्च को अदरख के रस व शहद के साथ लेने से मौसमी सर्दी, जुकाम व बुखार नहीं होते। • अडूसा के पत्तों का रस शहद के साथ सेवन करने से खांसी व गले के रोगो का भय नही रहता। • पीपल को दूध में उबाल कर लेने से बुखार, गले का कफ एवं पाचकागिन की दुर्बलता में फायदा होता है। • गिलोय, चिरायता, नीम तथा आंवले का काढ़ा मौसमी बुखार से बचाता है। • महासुदर्शन घन वटी दो दो गोली सुबह सायं गरम पानी से लेने से बुखार के प्रकोप से रक्षा होती है। • अडूसा व कण्टकारी का क्वाथ श्वसन नलिकाओं के कफ का शमन करता है। • प्रात: एवं रात्रि मे सोने से पहले गुनगुने पानी का प्रयोग करें ।
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