अब सड़क पर चलते-चलते रास्ते पर चार्ज होगी इलेक्ट्रिक कार, होंडा ने पेश की नई वायरलेस चार्ज टेक्नोलॉजी

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अब सड़क पर चलते-चलते रास्ते पर चार्ज होगी इलेक्ट्रिक कार, होंडा ने पेश की नई वायरलेस चार्ज टेक्नोलॉजी

Udaipur Times, Honda Wireless EV Charging : इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) के साथ सबसे बड़ी चुनौती चार्जिंग की है। एक EV को चार्ज करने में कई घंटे लग सकते हैं, जिसके दौरान वाहन को चार्जिंग स्टेशन पर खड़ा रखना पड़ता है। जापानी वाहन निर्माता कंपनी होंडा (Honda) एक ऐसी अनोखी तकनीक लेकर आई है जो इस समस्या को पूरी तरह खत्म कर सकती है। 

'डायनामिक वायरलेस पावर ट्रांसफर' (DWPT) नाम की इस तकनीक को होंडा ने 2021 से निर्माण कंपनियों 'ताइसेई कॉर्पोरेशन' (Taisei Corporation) और 'ताइसेई रोटेक' (Taisei Rotec) के साथ मिलकर विकसित किया है। इसकी मदद से EV मालिकों को अपने वाहनों को चार्ज करने के लिए चार्जिंग स्टेशन पर रुकने की जरूरत नहीं पड़ेगी। शुरुआत में, इसका इस्तेमाल लॉजिस्टिक्स और कमर्शियल वाहनों के लिए किया जाएगा।

EV को चार्ज करने के लिए रुकने की जरूरत नहीं

निर्माण कंपनियों 'ताइसेई कॉर्पोरेशन' और 'ताइसेई रोटेक' के साथ मिलकर विकसित की गई यह तकनीक, EV मालिकों को चार्जिंग स्टेशन पर रुककर वाहन चार्ज करने की जरूरत को खत्म कर देती है। शुरुआत में इसका उपयोग लॉजिस्टिक्स और कमर्शियल वाहनों के लिए किया जाएगा।

यह वायरलेस चार्जर कैसे काम करता है?

यह तकनीक स्मार्टफोन के वायरलेस चार्जर की तरह ही काम करती है। इसे इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि चलते-फिरते इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्ज किया जा सके। इस सिस्टम के तीन मुख्य हिस्से हैं:

ग्राउंड-बेस्ड DC पावर सप्लाई – यह सड़क की सतह के नीचे लगे पूरे चार्जिंग नेटवर्क को बिजली सप्लाई करती है।

ग्राउंड असेंबली (GA) – सड़क की सतह के ठीक नीचे वायरलेस चार्जिंग पैड लगाए जाते हैं, जो DC पावर केबल से जुड़े होते हैं। जब कोई EV इनके ऊपर से गुजरती है, तो ये पैड एक मैग्नेटिक फील्ड (चुंबकीय क्षेत्र) बनाते हैं।

व्हीकल असेंबली (VA) – इलेक्ट्रिक वाहन के निचले हिस्से में एक पावर रिसीवर लगा होता है। यह सड़क से बनने वाले मैग्नेटिक फील्ड से ऊर्जा लेता है और उसका इस्तेमाल सीधे वाहन की बैटरी को चार्ज करने के लिए करता है। 2027 में टेस्टिंग शुरू होगी

होंडा 2027 से इस वायरलेस चार्जिंग सिस्टम की सड़क पर टेस्टिंग (on-road tests) करने की तैयारी कर रही है।

150 kW तक पावर ट्रांसफर – टेस्टिंग के दौरान, इंजीनियर यह जांचेंगे कि क्या यह सिस्टम चलते हुए कमर्शियल इलेक्ट्रिक वाहनों को 150 kW तक पावर ट्रांसफर कर सकता है।

1 मिलियन व्हील-पास टेस्ट – सड़क की मजबूती और संरचनात्मक अखंडता (structural integrity) को परखने के लिए, इस पर 1 मिलियन (10 लाख) बार वाहनों के पहियों के गुजरने का टेस्ट किया जाएगा।

इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सुरक्षा – टेस्टिंग के दौरान यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि मैग्नेटिक फील्ड से सुरक्षा को कोई खतरा न हो। 

पहले किए गए इसी तरह के परीक्षण

यह पहली बार नहीं है जब इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए 'ऑन-रोड चार्जिंग' (सड़क पर चलते हुए चार्जिंग) का परीक्षण किया गया हो। इंजीनियर लंबे समय से ऐसी तकनीक पर काम कर रहे हैं, जिससे इलेक्ट्रिक वाहनों को चलते समय चार्ज किया जा सके; और पहले भी इस तरह के परीक्षण किए जा चुके हैं। 

फ्रांस, इटली और यूके सहित कई यूरोपीय देशों में ऐसे परीक्षण पहले ही हो चुके हैं। पेरिस के पास, इजरायली स्टार्टअप 'इलेक्ट्रेऑन' (Electreon) और फ्रांसीसी हाईवे ऑपरेटर 'विंसी' (VINCI) ने हाईवे के 0.9 मील लंबे हिस्से पर एक परीक्षण किया, जिसमें 300 kW से अधिक पावर ट्रांसफर करने में सफलता मिली।

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