समाज के तानों के बीच कैसे हर्षिता पांडे ने हासिल की सरकारी नौकरी, जानिए उनके संघर्ष की कहानी के बारें में

 | 
समाज के तानों के बीच कैसे हर्षिता पांडे ने हासिल की सरकारी नौकरी, जानिए उनके संघर्ष की कहानी के बारें में 

Udaipur Times, Harshita Pandey Success Story: अगस्त 2023 में सरकारी नौकरियों की घोषणा के बाद, हर्षिता पांडे ने सरकारी नौकरी की तैयारी शुरू कर दी। उन्हें उम्मीद थी कि परीक्षा जल्द ही हो जाएगी, लेकिन भर्ती प्रक्रिया लंबी खिंच गई और आखिरकार जनवरी 2025 में परीक्षा आयोजित हुई। लगभग डेढ़ साल की इस पूरी अवधि के दौरान, वह अपने लक्ष्य पर पूरी तरह केंद्रित रहीं। 

बार-बार देरी होने के बावजूद, वह अपने रास्ते से नहीं भटकीं

बार-बार देरी होने के बावजूद, वह अपने रास्ते से नहीं भटकीं; वह बताती हैं कि लगातार टलती परीक्षाओं की वजह से कभी-कभी उनके मन में दूसरे करियर विकल्पों के बारे में सोचने का विचार आया, लेकिन उन्होंने अपना पूरा ध्यान अपने लक्ष्य पर ही बनाए रखा। परीक्षा से ठीक एक महीने पहले, उन्होंने अपनी पढ़ाई और तेज कर दी और बचे हुए समय का भरपूर इस्तेमाल किया। महंगी कोचिंग लेने के बजाय, हर्षिता ने इंटरनेट, यूट्यूब वीडियो और ऑनलाइन स्टडी मटीरियल का सहारा लिया। 

ऑनलाइन शिक्षकों से काफी मदद मिली

उन्होंने अलग-अलग विषयों में अपनी जरूरतों के हिसाब से लेक्चर चुने और पढ़ाई का एक नियमित रूटीन बनाए रखा। उन्हें ऑनलाइन शिक्षकों से काफी मदद मिली खासकर 'रोजगार विद अंकित' के वीडियो उनके लिए बहुत फायदेमंद साबित हुए। कंप्यूटर सेक्शन के लिए उन्होंने धीरेंद्र सर के लेक्चर देखे, जबकि सीए सौरभ के विश्लेषण से उन्हें मुश्किल कॉन्सेप्ट्स को समझने में मदद मिली।

रिश्तेदारों के दबाव का भी सामना करना पड़ा

तैयारी के दौरान, हर्षिता को रिश्तेदारों के दबाव का भी सामना करना पड़ा। वे अक्सर पूछते थे कि उन्होंने अभी तक शादी क्यों नहीं की है, और कहते थे कि अब उनकी उम्र घर बसाने की हो गई है। ऐसे में, उनके पिता पूरी तरह उनके साथ खड़े रहे; उन्होंने रिश्तेदारों की बातों को अनसुना कर दिया और अपनी बेटी की मेहनत पर पूरा भरोसा रखा। 

सामाजिक दबाव हमेशा इंसान को कमजोर ही नहीं बनाता

आखिरकार, हर्षिता ने अपने पिता के भरोसे को सही साबित कर दिखाया ऑडिटर का पद हासिल करना न केवल सरकारी नौकरी मिलने की खुशी थी, बल्कि यह उनके पिता के उस विश्वास की जीत भी थी जो उन्होंने अपनी बेटी पर जताया था। हर्षिता का मानना ​​है कि सामाजिक दबाव हमेशा इंसान को कमजोर ही नहीं बनाता; कभी-कभी यह आगे बढ़ने के लिए एक प्रेरणा (कैटेलिस्ट) का काम भी कर सकता है। उनका मानना ​​है कि लोगों के सवालों में उलझने के बजाय, अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करना ज्यादा जरूरी है।

Follow UdaipurTimes on Facebook , Instagram , and Google News