सूरज की रोशनी से कैसे बनती है बिजली ? जानिए Solar Panel का पूरा साइंस
Udaipur Times, How Solar Panels Work : इन दिनों सोलर पैनल बिजली बचाने का सबसे लोकप्रिय विकल्प बन चुके हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि छत पर लगा सोलर पैनल आखिर सूरज की रोशनी को बिजली में कैसे बदल देता है? यह कोई जादू नहीं, बल्कि फोटोवोल्टिक इफेक्ट (Photovoltaic Effect) नाम की प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया के बारें में विस्तार से जानते हैं-
सोलर सेल (Solar cell) होता है सोलर पैनल (solar panel) का दिल
हर सोलर पैनल कई छोटे-छोटे फोटोवोल्टिक (PV) सेल (Photovoltaic Cells) से मिलकर बना होता है। ये सेल मुख्य रूप से सिलिकॉन नामक सेमीकंडक्टर से तैयार किए जाते हैं। एक सोलर सेल में सिलिकॉन (Silicon) की दो परतें होती हैं। पहली एन-टाइप (N-Type) परत, जिसमें अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन होते हैं, जबकि दूसरी पी-टाइप (P-Type) परत में इलेक्ट्रॉनों की कमी होती है।
जब ये दोनों परतें आपस में जुड़ती हैं, तो इनके बीच एक पी-एन जंक्शन (P-N Junction) बनता है, जो बिजली बनने की प्रक्रिया में सबसे अहम भूमिका निभाता है।
धूप पड़ते ही शुरू हो जाता है बिजली बनने का खेल
सूरज की रोशनी में मौजूद छोटे-छोटे ऊर्जा कण, जिन्हें फोटॉन (Photons) कहा जाता है, सोलर पैनल पर गिरते हैं। इनकी ऊर्जा सिलिकॉन के इलेक्ट्रॉनों को उनकी जगह से बाहर निकाल देती है।
इसके बाद P-N जंक्शन का विद्युत क्षेत्र इन इलेक्ट्रॉनों को एक दिशा में धकेलता है। जब सोलर पैनल को किसी बाहरी सर्किट से जोड़ा जाता है, तो यही इलेक्ट्रॉन एक निश्चित दिशा में बहने लगते हैं। इलेक्ट्रॉनों का यही प्रवाह डायरेक्ट करंट (DC) यानी बिजली बन जाता है।
इन्वर्टर (Inverter) क्यों है जरूरी?
सोलर पैनल से निकलने वाली बिजली डायरेक्ट करंट (DC) होती है, जबकि घर में इस्तेमाल होने वाले अधिकांश उपकरण अल्टरनेटिंग करंट (AC) पर चलते हैं। यहीं इन्वर्टर (Inverter) काम आता है। यह DC बिजली को AC में बदल देता है, जिससे आप फ्रिज, टीवी, वॉशिंग मशीन, पंखा और अन्य घरेलू उपकरण आसानी से चला सकते हैं।
बिजली का इस्तेमाल कैसे होता है?
इन्वर्टर (Inverter) से बदली गई बिजली का उपयोग तीन तरह से किया जा सकता है। इसे घर में तुरंत इस्तेमाल किया जा सकता है, बैटरी में स्टोर किया जा सकता है या फिर अतिरिक्त बिजली को बिजली ग्रिड में भेजा जा सकता है।
यानी सूरज की एक किरण से शुरू हुआ इलेक्ट्रॉनों का सफर आखिरकार आपके घर के बिजली के उपकरणों तक पहुंचकर उन्हें चलाता है।
