कितने दिन पहले बनी बासी रोटी को खा सकते हैं ? जानिए बासी रोटी खाने के फायदें

 | 
कितने दिन पहले बनी बासी रोटी को खा सकते हैं ? जानिए बासी रोटी खाने के फायदें

Udaipur Times, Stale Roti : भारतीय खाने में रोटी सबसे अहम मानी जाती है। हम इसे लंच और डिनर दोनों में बड़े चाव से खाते हैं। अक्सर रात में ज़रूरत से ज़्यादा रोटियां बन जाती हैं और सुबह के लिए बच जाती हैं। पहले लोग इन्हें मजे से खाते थे, लेकिन आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में कई लोग बासी खाने को सेहत के लिए अच्छा नहीं मानते। 

आज हम जानेंगे कि क्या बासी रोटी खाना सच में नुकसानदायक है, या इसके फायदे भी हैं? आइए जानते हैं कि रोटी कितनी पुरानी होने पर खाने लायक नहीं रहती।

कितने घंटे पहले बनी बासी रोटी को खा सकते हैं? 

रोटी को सिर्फ़ एक दिन यानी 12 से 24 घंटे तक ही खाने के लिए सुरक्षित माना जाता है। अगर इसे सही तरीके से रखा जाए जैसे किसी डिब्बे में बंद करके फ्रिज में तो यह अगली सुबह या दोपहर तक खाने लायक बनी रहती है। लेकिन अगर इसे खुले में छोड़ दिया जाए, तो मौसम के हिसाब से रोटी कुछ ही घंटों में खराब हो सकती है। 

गर्मियों में खाना जल्दी खराब होता है, इसलिए पिछली रात की रोटी को अगले दिन खाना जोखिम भरा हो सकता है। हालांकि सर्दियों में रोटी थोड़ी ज़्यादा देर तक ताज़ी रहती है, फिर भी अगर यह 24 घंटे से ज़्यादा पुरानी हो तो इसे खाने से बचना चाहिए। बासी खाने में फंगस या बैक्टीरिया पनपने का खतरा रहता है, जिससे पेट खराब हो सकता है।

बासी रोटी खाने के फायदे

अगर रोटी ताजी है और उसे सही तरीके से रखा गया है, तो अगले दिन यानी 12 से 15 घंटे बाद उसे खाने से कुछ खास फायदे मिलते हैं।

जब रोटी ठंडी हो जाती है, तो उसमें मौजूद स्टार्च 'रेसिस्टेंट स्टार्च' में बदल जाता है। इसे पचने में ज़्यादा समय लगता है, जिससे पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है और बार-बार भूख नहीं लगती। वज़ृन कम करने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए यह एक अच्छा विकल्प है।

फाइबर से भरपूर बासी रोटी पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में मदद करती है। जिन लोगों को सुबह पेट साफ होने में दिक्कत होती है, उनके लिए ठंडी रोटी को दूध के साथ खाने से पेट से जुड़ी कई समस्याओं में राहत मिल सकती है। सुबह ठंडे दूध के साथ ठंडी, बासी रोटी खाने से शरीर को ठंडक मिलती है और पेट को आराम मिलता है।

क्या डायबिटीज के मरीज बासी रोटी खा सकते हैं?

कुछ रिसर्च से पता चलता है कि ठंडी रोटी में रेसिस्टेंट स्टार्च की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे इसके ग्लाइसेमिक असर को कुछ हद तक कम किया जा सकता है। हालांकि, डायबिटीज़ के मरीज़ों को डॉक्टर या डायटीशियन से सलाह लेनी चाहिए और रोटी की मात्रा, कुल कार्बोहाइड्रेट का सेवन और अपनी सेहत की स्थिति का ध्यान रखना चाहिए।

बासी रोटी में रेसिस्टेंट स्टार्च क्या होता है?

जैसे-जैसे रोटी ठंडी होती है, उसका कुछ स्टार्च रेसिस्टेंट स्टार्च में बदल जाता है। यह धीरे-धीरे पचता है, जिससे पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि कई दिन पुरानी रोटी खाना सुरक्षित है; रोटी की ताज़गी और उसे सही तरीके से रखने पर ध्यान देना बहुत ज़रूरी है।

बासी रोटी खाने से पहले ध्यान रखने वाली बातें

हमेशा देखें कि रोटी से कोई अजीब गंध तो नहीं आ रही या उसका रंग तो नहीं बदला है। अगर रोटी पर फंगस या सफ़ेद धब्बे दिखें, तो उसे तुरंत फेंक दें। फ्रिज से निकाली गई रोटी को खाने से पहले थोड़ा गर्म ज़रूर कर लें; इससे वह नरम हो जाती है और गले में अटकती नहीं है।

Follow UdaipurTimes on Facebook , Instagram , and Google News