5 KW का सोलर पैनल रोजाना कितने यूनिट बिजली बनाता है, आइए जाने इसे लगवाना कितना सही ?
Udaipur Times, RoofTop Solar : गर्मियों के महीने में दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों में गर्मियों के दौरान कई परिवारों का बिजली बिल 10,000 रुपये से भी अधिक पहुंच जाता है। हालांकि, अब सोलर पावर इस परेशानी का बड़ा समाधान बनकर उभरा है।
कैसे खत्म हो सकता है बिजली बिल?
रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाकर घर की बिजली जरूरतों को काफी हद तक पूरा किया जा सकता है। इसके लिए सबसे अहम भूमिका निभाती है नेट मीटरिंग (Net Metering)। नेट मीटरिंग में दिन के समय सोलर पैनल से बनने वाली अतिरिक्त बिजली को बिजली कंपनी (DISCOM) के ग्रिड में भेज दिया जाता है। रात में या जरूरत पड़ने पर उपभोक्ता उसी ग्रिड से बिजली ले सकता है। महीने के अंत में केवल नेट खपत (कुल खपत - ग्रिड में भेजी गई बिजली) का बिल बनता है। अगर आपने ज्यादा बिजली ग्रिड को दी है, तो उसका क्रेडिट अगले महीने के लिए जोड़ दिया जाता है।
सोलर लगाने से बिजली बिल कितना कम हो सकता है?
अगर आपके घर में हर महीने करीब 600 यूनिट बिजली की खपत होती है, तो बिना सोलर के आपको लगभग 6,000 रुपये या उससे ज्यादा का बिजली बिल देना पड़ सकता है। लेकिन 5 किलोवाट का सोलर सिस्टम लगाने के बाद स्थिति पूरी तरह बदल सकती है।
उदाहरण के तौर पर, 600 यूनिट खपत वाले घर में सोलर सिस्टम हर महीने करीब 650 यूनिट बिजली पैदा कर सकता है। ऐसे में आपकी पूरी बिजली खपत सोलर से पूरी हो जाएगी और 50 यूनिट अतिरिक्त बिजली का क्रेडिट भी मिल सकता है। इससे ऊर्जा शुल्क शून्य हो जाता है और आपको सिर्फ फिक्स्ड चार्ज और टैक्स के रूप में करीब 450 से 500 रुपये तक का भुगतान करना पड़ता है। यानी, 6,000 रुपये से ज्यादा का बिजली बिल घटकर सिर्फ 450-500 रुपयेतक रह सकता है।
कितना बड़ा सोलर सिस्टम लगाना होगा?
5 KW का सोलर पैनल औसतन रोजाना 20 से 25 यूनिट बिजली बनाता है। यह पूरी तरह से आपके इलाके में मिलने वाली धूप और मौसम पर निर्भर करता है; गर्मियों में यह 25 से 30 यूनिट तक भी बना सकता है, जबकि सर्दियों में या बादल होने पर उत्पादन घटकर 15 से 20 यूनिट हो जाता है।
भारत में आमतौर पर 1 किलोवाट (kW) का सोलर सिस्टम हर महीने 120 से 150 यूनिट बिजली पैदा करता है। इसलिए आपकी मासिक बिजली खपत के अनुसार सोलर सिस्टम का चयन किया जाता है। अगर आपका बिजली बिल हर महीने 3,000 से 4,000 रुपये के बीच आता है और आपकी खपत 350 से 450 यूनिट है, तो 3 किलोवाट का सोलर सिस्टम पर्याप्त रहेगा। इसके लिए करीब 300 वर्गफुट छत की जरूरत होगी। अगर आपका मासिक बिल 6,000 से 8,000 रुपये के बीच है और खपत 700 से 900 यूनिट है, तो 5 से 6 किलोवाट का सोलर सिस्टम लगाना बेहतर रहेगा। इसके लिए 500 से 600 वर्गफुट छत की आवश्यकता होगी।
यदि आपका बिजली बिल 12,000 से 15,000 रुपये तक पहुंचता है और खपत 1,400 से 1,700 यूनिट है, तो 10 किलोवाट का सोलर सिस्टम उपयुक्त रहेगा, जिसके लिए लगभग 1,000 वर्गफुट छत चाहिए।
वहीं, जिन घरों का बिजली बिल 25,000 रुपये से अधिक है और खपत 2,800 यूनिट से ज्यादा है, उन्हें 20 किलोवाट या उससे अधिक क्षमता का सोलर सिस्टम लगाना चाहिए, जिसके लिए करीब 2,000 वर्गफुट या उससे ज्यादा जगह की जरूरत पड़ती है।
फिर भी बिजली बिल पूरी तरह जीरो क्यों नहीं होता?
सोलर सिस्टम लगाने के बाद भी बिजली बिल पूरी तरह शून्य नहीं होता, क्योंकि कुछ अनिवार्य शुल्क हर उपभोक्ता को देने पड़ते हैं। इनमें स्वीकृत बिजली लोड के आधार पर लगने वाला फिक्स्ड चार्ज, नेट मीटर का किराया और कुछ स्थानीय टैक्स एवं सेस शामिल हैं। हालांकि, इन शुल्कों के बावजूद 12,000 रुपये तक का बिजली बिल घटकर केवल 400-500 रुपये तक रह सकता है, जो व्यावहारिक रूप से बिजली खर्च खत्म होने जैसा है।
सालभर एक जैसा नहीं रहता सोलर उत्पादन
सोलर पैनलों से बनने वाली बिजली मौसम के अनुसार बदलती रहती है। मार्च और अप्रैल में एक 5 किलोवाट का सोलर सिस्टम करीब 700 यूनिट बिजली पैदा कर सकता है, जबकि घर की खपत केवल 400 यूनिट होने पर 300 यूनिट का अतिरिक्त क्रेडिट मिल जाता है।
मई और जून में सोलर उत्पादन करीब 750 यूनिट रहता है, लेकिन AC के ज्यादा इस्तेमाल के कारण खपत 1,000 यूनिट तक पहुंच सकती है। ऐसे में पहले से जमा क्रेडिट का इस्तेमाल किया जाता है।
जुलाई और अगस्त में मानसून की वजह से सोलर उत्पादन घटकर करीब 450 यूनिट रह जाता है, जबकि खपत 600 यूनिट होती है। इस दौरान भी पहले से जमा क्रेडिट काम आता है।
अक्टूबर और नवंबर में फिर से सोलर उत्पादन बढ़कर करीब 650 यूनिट पहुंच जाता है और 400 यूनिट की खपत पर लगभग 250 यूनिट का नया क्रेडिट बन जाता है।
अधिकांश राज्यों में नेट मीटरिंग का हिसाब पूरे वित्तीय वर्ष यानी अप्रैल से मार्च तक किया जाता है। इसलिए धूप वाले महीनों में बनाई गई अतिरिक्त बिजली का फायदा कम उत्पादन वाले महीनों में भी मिलता रहता है।
AC चलाने के लिए कितना सोलर सिस्टम चाहिए?
1 टन AC: 2 kW सोलर सिस्टम
1.5 टन AC: 3 kW सोलर सिस्टम
2 टन AC: 4 से 5 kW सोलर सिस्टम
हालांकि, वास्तविक जरूरत AC के उपयोग, अन्य उपकरणों की संख्या और आपके इलाके में उपलब्ध धूप पर भी निर्भर करती है।
क्यों फायदेमंद है सोलर?
बिजली बिल में 80-100% तक की बचत।
25 साल तक लंबे समय का फायदा।
बढ़ती बिजली दरों से राहत।
पर्यावरण के लिए बेहतर विकल्प।
सरकारी सब्सिडी योजनाओं का लाभ।
यही वजह है कि अब हजारों भारतीय परिवार रूफटॉप सोलर की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं और हर महीने आने वाले भारी बिजली बिल से छुटकारा पा रहे हैं।
