Udaipur Times, Gratuity calculator : ग्रेच्युटी (Gratuity) वह एकमुश्त राशि है जो एक नियोक्ता (employer) द्वारा किसी पात्र कर्मचारी को उसकी लंबी सेवा के लिए दी जाती है। यह राशि कर्मचारी के अंतिम वेतन, सेवा के वर्षों और 'कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी, 2020' (Code on Social Security, 2020) के तहत तय पात्रता शर्तों पर निर्भर करती है।
ग्रेच्युटी (Gratuity) के लिए कौन पात्र है?
'कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी, 2020' की धारा 53 के तहत, इस्तीफा देने, रिटायर होने या सेवानिवृत्ति की आयु पूरी करने पर ग्रेच्युटी पाने के लिए कर्मचारी का आमतौर पर पांच साल तक लगातार सेवा में रहना जरूरी है। हालांकि, मृत्यु या विकलांगता के मामलों में पांच साल की यह शर्त लागू नहीं होती है। निश्चित अवधि (fixed-term) वाले कर्मचारियों के लिए अलग प्रावधान हैं, जिनमें पांच साल की सामान्य शर्त लागू नहीं होती। कामकाजी पत्रकारों (working journalists) के लिए, इसके लिए जरूरी सेवा अवधि तीन साल तय की गई है।
निश्चित अवधि (fixed-term) वाले कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी के अलग नियम हैं
'कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी, 2020' में निश्चित अवधि वाले कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी के विशेष प्रावधान दिए गए हैं। धारा 2(34)(b) के तहत, इन कर्मचारियों के लिए आनुपातिक (proportionate) ग्रेच्युटी का प्रावधान है, भले ही उनकी सेवा अवधि सामान्य रूप से जरूरी सेवा अवधि से कम क्यों न हो।
50,000 रुपये के वेतन और 10 साल की सेवा के लिए ग्रेच्युटी की गणना
धारा 53(2) के अनुसार, ग्रेच्युटी की सामान्य दर सेवा के प्रत्येक पूरे वर्ष के लिए 15 दिनों का वेतन है। इसमें छह महीने से अधिक के समय को भी एक पूरा वर्ष माना जाता है (लागू नियमों के अधीन)। मासिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों के लिए गणना इस प्रकार है:
ग्रेच्युटी = अंतिम मासिक वेतन × 15 × सेवा के वर्ष ÷ 26। यदि अंतिम वेतन 50,000 रुपये है और सेवा 10 साल की है, तो गणना होगी: 50,000 रुपये × 15 × 10 ÷ 26। अनुमानित ग्रेच्युटी: 2,88,462 रुपये।
ग्रेच्युटी के लिए 'लगातार सेवा' (continuous service) किसे माना जाता है?
'कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी, 2020' की धारा 54 में बताया गया है कि 'लगातार सेवा' का आकलन कैसे किया जाता है। इसमें बीमारी, चोट, छुट्टी, छंटनी, हड़ताल, तालाबंदी या काम के निलंबन (जो कर्मचारी की गलती से न हुआ हो) के कारण आने वाली रुकावटें शामिल हो सकती हैं, जो कि संबंधित अधिनियम के अधीन हैं। जहां सेवा लगातार (continuous) नहीं है, वहां 'लगातार सेवा' (deemed-continuous-service) के लिए तय सीमाएं लागू हो सकती हैं।
'लगातार कार्यरत' (continuously employed) माने जाने के लिए आपको कितने दिन काम करना होगा?
कुछ विशेष मामलों में, जहां सेवा लगातार नहीं होती, वहां कोड (Code) के तहत ये सीमाएं तय की गई हैं:
एक वर्ष: सामान्य प्रतिष्ठान (establishment) में 240 दिन।
एक वर्ष: ऐसी खदान या प्रतिष्ठान में 190 दिन, जहां सप्ताह में छह दिन से कम काम होता है।
छह महीने: सामान्य प्रतिष्ठान में 120 दिन।
छह महीने: ऐसी खदान या प्रतिष्ठान में 95 दिन, जहां सप्ताह में छह दिन से कम काम होता है।
कौन सी सीमा लागू होगी, यह प्रतिष्ठान के प्रकार और उस अवधि पर निर्भर करता है जिसका आकलन किया जा रहा है।
नियोक्ता (employer) को ग्रेच्युटी का भुगतान कब करना चाहिए?
'सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020' (Code on Social Security, 2020) की धारा 56 के तहत, जब ग्रेच्युटी देय (payable) हो जाती है, तो नियोक्ता को इसकी गणना करनी चाहिए, भले ही कर्मचारी ने इसके लिए आवेदन न किया हो। नियोक्ता को सक्षम प्राधिकारी (competent authority) और ग्रेच्युटी पाने के हकदार व्यक्ति को लिखित रूप में सूचित करना होगा कि कितनी राशि देय है।
यदि नियोक्ता ग्रेच्युटी (Gratuity) के भुगतान में देरी करता है, तो क्या होगा?
ग्रेच्युटी देय होने की तारीख से 30 दिनों के भीतर नियोक्ता को इसका भुगतान करना होगा। यदि भुगतान में देरी होती है, तो आमतौर पर देरी की अवधि के लिए ब्याज देना पड़ता है। हालांकि, एक अपवाद तब लागू होता है जब देरी कर्मचारी की वजह से हुई हो और नियोक्ता ने उचित प्राधिकारी से आवश्यक लिखित स्वीकृति प्राप्त कर ली हो।