10 साल और 9 महीने की नौकरी करने के बाद कितनी मिलेगी ग्रेच्युटी, यहां जानिए पूरा कैलकुलेशन ?

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10 साल और 9 महीने की नौकरी करने के बाद कितनी मिलेगी ग्रेच्युटी, यहां जानिए पूरा कैलकुलेशन ?

Udaipur Times, Gratuity Calculator : अगर आप लंबे समय से किसी कंपनी या संस्था में काम कर रहे हैं और यह जानना चाहते हैं कि आपकी कड़ी मेहनत के बदले कितनी ग्रेच्युटी जमा हुई है, तो इसका हिसाब लगाना बहुत आसान है। ग्रेच्युटी एक तरह का फ़ायदा या इनाम है जो एम्प्लॉयर या कंपनी कर्मचारी को उनकी लंबी सेवा के लिए देती है।

आज जानते हैं कि 30,000 रुपये की सैलरी पर 10 साल और 9 महीने काम करने के बाद कर्मचारी को कितनी ग्रेच्युटी मिलेगी। हम ग्रेच्युटी से जुड़े नियमों, इसके हिसाब-किताब के तरीके और नौकरी छोड़ने पर इसे पाने की पूरी प्रक्रिया के बारे में भी जानेंगे।

क्या होती है ग्रेच्युटी

ग्रेच्युटी एकमुश्त मिलने वाली रकम है जो किसी कर्मचारी को कंपनी छोड़ने पर दी जाती है, चाहे वह रिटायरमेंट की वजह से हो या इस्तीफ़े की वजह से। आम तौर पर, कोई कर्मचारी किसी संस्था में कम से कम पांच साल की लगातार सेवा पूरी करने के बाद ही ग्रेच्युटी पाने का हकदार बनता है। हालांकि, अगर किसी कर्मचारी को दुर्घटना या बीमारी की वजह से कोई विकलांगता हो जाती है, तो पांच साल की यह ज़रूरी शर्त हटा दी जाती है और उस अवधि के पूरा होने से पहले ही ग्रेच्युटी का भुगतान किया जा सकता है।

 'पेमेंट ऑफ़ ग्रेच्युटी एक्ट, 1972' के तहत क्या नियम हैं?

'पेमेंट ऑफ़ ग्रेच्युटी एक्ट, 1972' के तहत, 10 से ज़्यादा कर्मचारियों वाली किसी भी कंपनी या संस्थान में काम करने वाला हर कर्मचारी इस स्कीम का फ़ायदा पाने का हकदार है। अगर कोई कर्मचारी नौकरी बदलता है, रिटायर होता है या किसी भी वजह से इस्तीफ़ा देता है और अगर वह ज़रूरी शर्तों को पूरा करता है तो वह कानूनी तौर पर ग्रेच्युटी पाने का हकदार होता है। ध्यान देने वाली एक अहम बात यह है कि एक बार जब कोई कंपनी इस एक्ट के दायरे में आ जाती है, तो यह नियम तब भी लागू रहता है, भले ही भविष्य में कर्मचारियों की संख्या 10 से कम हो जाए।

सर्विस की अवधि और ग्रेच्युटी की गणना कैसे की जाती है?
ग्रेच्युटी की रकम दो मुख्य बातों पर निर्भर करती है: आपकी आखिरी बेसिक सैलरी (बेसिक पे + महंगाई भत्ता) और कंपनी में आपकी कुल सर्विस के साल।

नौकरी की अवधि की गणना करते समय, अगर सेवा के पूरे सालों के बाद बची हुई अवधि नौ महीने से ज़्यादा है, तो उसे पूरा साल माना जाता है।

उदाहरण के लिए, अगर किसी कर्मचारी ने 10 साल और 9 महीने काम किया है, तो उनकी सेवा अवधि 11 साल मानी जाएगी।
लेकिन, अगर उन्होंने 10 साल और 5 महीने काम किया है, तो इसे 10 साल ही गिना जाएगा।

ऑफिशियल कैलकुलेशन फ़ॉर्मूला:

ग्रेच्युटी अमाउंट = (लास्ट ली गई सैलरी) × (15/26) × (सर्विस के सालों की संख्या).

(यहां, महीने में सिर्फ़ 26 दिन गिने जाते हैं क्योंकि 4 दिन हफ़्ते की छुट्टी के दिन माने जाते हैं, और कैलकुलेशन हर साल की सर्विस के लिए 15 दिनों की सैलरी के आधार पर होता है।)

कैलकुलेशन को एक उदाहरण से समझें:

मान लीजिए आपकी पिछली बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ता मिलाकर कुल 30,000 रुपये है और आपकी सर्विस का समय 10 साल और 9 महीने (यानी, 11 साल) है:

कुल ग्रेच्युटी अमाउंट = (30,000) × (15) × (11) ÷ 26 = 1,90,384.62 रुपये

इसका मतलब है कि 30,000 रुपये की बेसिक सैलरी के साथ, 11 साल की सर्विस पूरी करने के बाद आपकी कुल ग्रेच्युटी लगभग  1,90,384 रुपये होगी।

ग्रेच्युटी का क्लेम करने का आसान तरीका

अगर आप अपनी कंपनी से ग्रेच्युटी का पेमेंट पाना चाहते हैं, तो आपको बस इस आसान प्रोसेस को फॉलो करना होगा:

1. नौकरी छोड़ने के 30 दिनों के अंदर अपनी कंपनी के HR डिपार्टमेंट में 'फॉर्म I' भरकर जमा करें। अगर किसी कर्मचारी की दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु हो जाती है, तो उनके कानूनी उत्तराधिकारी या नॉमिनी यह फॉर्म भर सकते हैं।

2. एप्लीकेशन फॉर्म के साथ अपना पहचान पत्र (identity proof), PAN कार्ड, बैंक पासबुक की कॉपी या कैंसिल्ड चेक और कंपनी से मिला रिलीविंग लेटर ज़रूर लगाएं।

3. फॉर्म जमा होने के बाद, कंपनी आपके सर्विस रिकॉर्ड की जांच करेगी। नियमों के अनुसार, प्रोसेस पूरा होने के 30 दिनों के अंदर ग्रेच्युटी की रकम सीधे आपके बैंक अकाउंट में ट्रांसफर कर दी जाएगी।

आपके लिए काम की जानकारी

यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि ग्रेच्युटी किसी कर्मचारी की सालों की वफादारी और कड़ी मेहनत का इनाम है। हर कामकाजी व्यक्ति के लिए सही कैलकुलेशन का तरीका और पात्रता (eligibility) के नियमों को समझना ज़रूरी है, ताकि उन्हें पूरी रकम मिल सके जिसके वे हकदार हैं। असल में, '6-महीने के राउंड-ऑफ नियम' और '5-साल की कम से कम पात्रता की शर्त' को समझकर आप अपने रिटायरमेंट या नौकरी बदलने के फैसले की बेहतर योजना बना सकते हैं। इसलिए, याद रखें: कंपनी छोड़ने के 30 दिनों के अंदर 'फॉर्म I' भरकर एप्लीकेशन जमा करने से क्लेम का प्रोसेस आसान और तेज़ हो जाता है।

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