प्लास्टिक के नोटों की छपाई पर कितना होगा खर्च, क्या कागजी नोटों की होगी छुट्टी ?
Udaipur Times, Cost of Plastic Currency Note : भारत में जल्द ही करेंसी सिस्टम में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) देश में पॉलिमर (प्लास्टिक) (Plastic Currency Note) बैंक नोट शुरू करने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। बताया जा रहा है कि इस प्रस्ताव पर आरबीआई बोर्ड की उच्चस्तरीय बैठकों में चर्चा हुई है। इसका उद्देश्य करेंसी को अधिक सुरक्षित, टिकाऊ और लंबे समय में किफायती बनाना है।
क्या होते हैं पॉलिमर नोट?
पॉलिमर नोट पारंपरिक सूती कागज की बजाय पॉलीप्रोपाइलीन प्लास्टिक (Plastic Currency Note) से बनाए जाते हैं। इनमें पारदर्शी विंडो, एंबेडेड होलोग्राम और अत्याधुनिक सुरक्षा फीचर होते हैं, जिससे इनकी नकल करना बेहद मुश्किल हो जाता है।
कितनी होगी छपाई की लागत?
शुरुआत में पॉलिमर नोटों की छपाई सामान्य नोटों की तुलना में महंगी होगी। जहां एक कागजी नोट को छापने में लगभग 1 से 3 रुपये खर्च होते हैं, वहीं समान मूल्यवर्ग के पॉलिमर नोट की छपाई पर 2 से 6 रुपये तक खर्च आ सकता है।
फिर क्यों फायदेमंद हैं प्लास्टिक के नोट (Plastic Currency Note)?
हालांकि शुरुआती लागत ज्यादा है, लेकिन पॉलिमर नोटों की सबसे बड़ी खासियत उनकी लंबी उम्र है। विशेषज्ञों के मुताबिक, ये नोट सामान्य कागजी नोटों की तुलना में तीन से चार गुना अधिक समय तक चल सकते हैं। इससे बार-बार नए नोट छापने की जरूरत कम होगी और लंबे समय में आरबीआई का खर्च भी घटेगा।
पॉलिमर नोटों के बड़े फायदे
पानी और नमी से खराब नहीं होते।
पसीने और धूल-मिट्टी का कम असर पड़ता है।
आसानी से फटते नहीं हैं।
लंबे समय तक साफ-सुथरे बने रहते हैं।
नकली नोट तैयार करना बेहद मुश्किल होता है।
बार-बार बदलने की जरूरत नहीं पड़ती।
फिलहाल क्या है स्थिति?
अभी देश में मुख्य रूप से सूती कागज से बने नोट ही चलन में हैं। पहले छोटे मूल्यवर्ग के पॉलिमर नोटों को लेकर पायलट प्रोजेक्ट की चर्चा हुई थी, लेकिन अब तक इन्हें पूरे देश में लागू नहीं किया गया है। वर्तमान में 20 रुपये के नोट की छपाई पर करीब 1 रुपये, 200 रुपये के नोट पर लगभग 3 रुपये और 500 रुपये के नोट पर करीब 2.29 रुपये का खर्च आता है।
अगर आरबीआई इस प्रस्ताव को मंजूरी देता है, तो आने वाले समय में देश की करेंसी पहले से ज्यादा सुरक्षित, टिकाऊ और आधुनिक हो सकती है।
