Udaipur Times, 8th Pay Commission : केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी बढ़ोतरी से जुड़ी एक पुरानी मांग एक बार फिर चर्चा में है। कर्मचारी संगठन 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के सामने महंगाई भत्ते (DA) के एक हिस्से को बेसिक पे में मर्ज करने की मांग रख रहे हैं। अगर सरकार इस मांग को मंजूरी देती है, तो इसका असर केवल बेसिक सैलरी पर ही नहीं, बल्कि बेसिक पे से जुड़े दूसरे भत्तों और भविष्य की वेतन गणना पर भी पड़ सकता है।
हालांकि, DA मर्जर को लेकर अभी सरकार की ओर से कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। 8वां वेतन आयोग अलग-अलग कर्मचारी, पेंशनर और अन्य संगठनों से सुझाव और मांगें ले रहा है। आयोग ने 9 सितंबर 2026 से पुडुचेरी में संबंधित पक्षों के साथ बातचीत शुरू की है। इससे पहले चेन्नई में भी बैठकें हो चुकी हैं। अब आयोग का अगला दौर 16 से 18 सितंबर 2026 के बीच चंडीगढ़ में होने वाला है।
बेसिक पे में DA मर्ज होने से क्या होगा?
केंद्रीय कर्मचारियों के DA में आम तौर पर साल में दो बार बदलाव होता है। यह बढ़ोतरी जनवरी और जुलाई से प्रभावी होती है। मौजूदा व्यवस्था में DA बढ़ने के बावजूद यह अपने आप बेसिक पे का हिस्सा नहीं बनता। कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि DA का एक हिस्सा बेसिक पे में मर्ज होने से कर्मचारियों को लंबे समय में फायदा मिल सकता है। बेसिक पे बढ़ने पर उससे जुड़े कुछ भत्तों और भविष्य की वेतन गणना पर भी असर पड़ सकता है।
ऑल इंडिया नेशनल पेंशनर्स एंड सुपरएनुएट्स फेडरेशन (AINPSEF) ने भी वेतन संशोधन और DA मर्जर को लेकर अपने अनुमान सामने रखे हैं। संगठन के एक अनुमान के मुताबिक, लेवल-1 कर्मचारी की ग्रॉस सैलरी 1 जनवरी 2033 तक करीब रु77,694 हो सकती है। यह 1 जनवरी 2026 के अनुमानित रु37,800 रिवाइज्ड बेसिक पे से करीब 106% अधिक है। ध्यान रहे कि ये आंकड़े कर्मचारी संगठन के अनुमान हैं, सरकार की ओर से घोषित वेतन नहीं।
कर्मचारी संगठनों की क्या मांग है?
DA मर्जर को लेकर अलग-अलग कर्मचारी संगठनों के प्रस्ताव अलग हैं।
NFPE और AINPSEF ने 25% DA के मर्जर का सुझाव दिया है।
IRTSA और PSNM ने 50% DA तक मर्जर की सीमा का सुझाव दिया है।
NC-JCM ने अपने मेमोरेंडम में DA 25% से ज्यादा होने पर उसे बेसिक पे में मर्ज करने की सिफारिश की है।
इसके अलावा कुछ संगठनों ने दूसरे भत्तों में भी बढ़ोतरी की मांग की है। NC-JCM और AIDEF ने सभी अलाउंस को तीन गुना करने और उन्हें DA की बढ़ोतरी से जोड़ने का सुझाव दिया है।इंक्रीमेंट को लेकर भी अलग-अलग प्रस्ताव सामने आए हैं। NFPE, NC-JCM और AIDEF ने 6%, AINPSEF और PSNM ने 7%, जबकि IRTSA ने 5% इंक्रीमेंट की सिफारिश की है।
लेवल-1 कर्मचारी की सैलरी पर कितना होगा असर?
इसे एक उदाहरण से समझते हैं। मौजूदा वेतन मैट्रिक्स में लेवल-1 कर्मचारी का शुरुआती बेसिक पे रु18,000 है। अगर 8वें वेतन आयोग में 2.1 फिटमेंट फैक्टर लागू होने की स्थिति मानें, तो रु18,000 का रिवाइज्ड बेसिक पे करीब रु37,800 बनता है।
AINPSEF के अनुमान के मुताबिक, 1 जनवरी 2032 तक लेवल-1 कर्मचारी का बेसिक पे करीब रु56,728 और DA करीब रु13,615 हो सकता है। वहीं, 1 जनवरी 2033 तक ग्रॉस सैलरी करीब रु77,694 पहुंचने का अनुमान लगाया गया है। हालांकि, अगर DA का कोई हिस्सा बेसिक पे में मर्ज किया जाता है तो 1 जनवरी 2033 को कर्मचारी का वास्तविक बेसिक पे कितना होगा, यह अभी तय नहीं है। इसका स्पष्ट आंकड़ा सरकार के फैसले और 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों के बाद ही सामने आएगा।
लेवल-6 कर्मचारी के लिए क्या है सेलरी का अनुमान है?
लेवल-6 कर्मचारी का मौजूदा शुरुआती बेसिक पे रु35,400 है। 2.1 के फिटमेंट फैक्टर के आधार पर इसे करीब रु74,340 रिवाइज्ड बेसिक पे माना गया है। AINPSEF के अनुमान के अनुसार, 1 जनवरी 2032 तक बेसिक पे करीब रु1,11,564 और DA करीब रु26,775 हो सकता है। वहीं, 1 जनवरी 2033 तक ग्रॉस सैलरी करीब रु1,52,798 पहुंचने का अनुमान है।
यह आंकड़ा रु74,340 के अनुमानित रिवाइज्ड बेसिक पे से दोगुने से अधिक है। लेकिन यहां भी स्पष्ट करना जरूरी है कि ये संगठन के अनुमान हैं, सरकार द्वारा घोषित सैलरी स्ट्रक्चर नहीं।
DA मर्ज का कर्मचारियों को क्या होगा फायदा?
अगर DA का कोई हिस्सा बेसिक पे में मर्ज किया जाता है, तो इसका प्रभाव केवल तत्काल मासिक वेतन तक सीमित नहीं रह सकता। बेसिक पे बढ़ने से बेसिक से जुड़े कुछ भत्तों और भविष्य की वेतन गणना में भी बदलाव हो सकता है। यही वजह है कि कर्मचारी संगठन DA मर्जर की मांग कर रहे हैं। हालांकि, अभी इस मांग पर सरकार की ओर से कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
8वां वेतन आयोग फिलहाल कर्मचारी और पेंशनर संगठनों की मांगों और सुझावों को सुन रहा है। आयोग अपनी सिफारिशें सरकार को देगा और इसके बाद सरकार अंतिम फैसला करेगी। इसलिए फिलहाल 2.1 फिटमेंट फैक्टर, DA मर्जर और रु77,694 या रु1,52,798 जैसी रकम को संभावित/अनुमानित आंकड़ों के तौर पर ही देखना चाहिए।