बिना धुएं और बिजली के तार कैसे चलेगी भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन ! जाने इसकी सभी खासियत ?
Udaipur Times, India First Hydrogen Train : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से देश की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसके साथ ही भारत जर्मनी, जापान, चीन और अमेरिका जैसे चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो गया है, जो स्वच्छ और हरित रेल परिवहन के लिए हाइड्रोजन तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) द्वारा विकसित यह ट्रेन फिलहाल जींद-सोनीपत रेलखंड पर चलाई जाएगी।
जींद-सोनीपत रूट पर चलेगी ट्रेन
89 किलोमीटर लंबे जींद-सोनीपत सेक्शन पर चलने वाली यह ट्रेन जींद जंक्शन, गोहाना जंक्शन और सोनीपत के बीच संचालित होगी। रास्ते में जींद सिटी, पांडु पिंडारा, ललित खेड़ा, भाम्बेवा, ईसापुर खेड़ी, बुटाना, खंडराई, राभड़ा, लाठ, मोहाना और बरवासनी समेत 12 स्टेशनों पर इसका ठहराव होगा।
ट्रेन संख्या 74010 जींद से सुबह 7:40 बजे रवाना होकर 9:40 बजे सोनीपत पहुंचेगी। वापसी में ट्रेन संख्या 74009 सोनीपत से 10:40 बजे चलेगी और दोपहर 1:00 बजे जींद पहुंचेगी।
कैसे काम करती है हाइड्रोजन ट्रेन?
यह ट्रेन पारंपरिक इलेक्ट्रिक ट्रेनों की तरह ओवरहेड बिजली लाइनों पर निर्भर नहीं रहती। इसमें लगा हाइड्रोजन फ्यूल सेल ही एक छोटे पावर प्लांट की तरह काम करता है। टैंकों में संग्रहित हाइड्रोजन हवा में मौजूद ऑक्सीजन के साथ रासायनिक प्रतिक्रिया कर बिजली पैदा करती है, जिससे ट्रेन के मोटर चलते हैं और पहिए घूमते हैं।
इस प्रक्रिया में धुआं, कार्बन डाइऑक्साइड या अन्य प्रदूषक गैसें नहीं निकलतीं। केवल जलवाष्प (Water Vapour) और थोड़ी गर्मी ही उप-उत्पाद के रूप में निकलती है। इसलिए इसे दुनिया की सबसे पर्यावरण अनुकूल रेल तकनीकों में माना जा रहा है।
10 कोच और 2,600 यात्रियों की क्षमता
भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन दुनिया की कई हाइड्रोजन ट्रेनों से बड़ी है। इसमें 10 कोच हैं और यह करीब 2,600 यात्रियों को ले जाने में सक्षम है।
परिचालन गति: 75 किमी/घंटा
अधिकतम डिजाइन गति: 110 किमी/घंटा
दो ड्राइविंग पावर कार, कुल 2,400 किलोवाट की क्षमता
जींद में बना देश का पहला रेलवे हाइड्रोजन रिफ्यूलिंग स्टेशन
इस ट्रेन के संचालन के लिए हरियाणा के जींद में भारतीय रेलवे ने देश का पहला और सबसे बड़ा रेलवे हाइड्रोजन रिफ्यूलिंग स्टेशन बनाया है। यहां ट्रेन को यात्रा से पहले हाइड्रोजन गैस से भरा जाएगा।
सुरक्षा के लिए हाईटेक सिस्टम
हाइड्रोजन ट्रेन में कई आधुनिक सुरक्षा तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है।
हाइड्रोजन लीकेज, आग, धुआं और तापमान की निगरानी करने वाले सेंसर।
लगातार वेंटिलेशन सिस्टम, जिससे हाइड्रोजन गैस जमा न हो।
किसी भी गड़बड़ी पर हाइड्रोजन सप्लाई तुरंत बंद करने वाला ऑटोमैटिक शट-ऑफ सिस्टम।
लोको पायलट के केबिन में रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम, जो ट्रेन की पूरी स्थिति पर नजर रखता है।
आपात स्थिति में ट्रेन को सुरक्षित स्थान तक ले जाने के लिए विशेष ऑपरेटिंग मोड भी उपलब्ध है।
दुनिया में भारत की नई पहचान
हाइड्रोजन ट्रेन तकनीक अभी दुनिया में शुरुआती चरण में है। जर्मनी ने सबसे पहले व्यावसायिक रूप से हाइड्रोजन ट्रेनें शुरू की थीं, जबकि फ्रांस, इटली, चीन, जापान और अमेरिका जैसे देश भी इस तकनीक पर काम कर रहे हैं। हालांकि इन देशों में अधिकांश हाइड्रोजन ट्रेनें 2 से 4 कोच वाली हैं।
भारत की 10 कोच वाली हाइड्रोजन ट्रेन यह साबित करती है कि यह तकनीक बड़े पैमाने पर यात्री परिवहन के लिए भी सफलतापूर्वक इस्तेमाल की जा सकती है। भारतीय रेलवे का मानना है कि यह परियोजना देश को स्वच्छ, सुरक्षित और टिकाऊ रेल परिवहन की दिशा में नई पहचान दिलाएगी।
