बारिश के मौसम में कैसे रखें सोलर पैनल का ध्यान ? जाने रख-रखाव का सही तरीका

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बारिश के मौसम में कैसे रखें सोलर पैनल का ध्यान ? जाने रख-रखाव का सही तरीका 

Udaipur Times, Solar Panel Care in Monsoon : घर की छत पर लगे सोलर सिस्टम को आमतौर पर बहुत ज्यादा मेंटेनेंस की जरूरत नहीं होती, लेकिन लगातार बेहतर बिजली उत्पादन के लिए समय-समय पर इसकी देखभाल करना जरूरी है। खासकर मानसून के दौरान बारिश, तेज हवाओं, धूल और जलजमाव जैसी समस्याएं सोलर सिस्टम की कार्यक्षमता और सुरक्षा को प्रभावित कर सकती हैं।

काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (CEEW) द्वारा दिल्ली में किए गए एक शोध के मुताबिक, धूल जमने और आसपास की छाया की वजह से सोलर सिस्टम की कार्यक्षमता सबसे ज्यादा प्रभावित होती है। यदि उपभोक्ता अपने सोलर पैनलों की नियमित और सही तरीके से सफाई करें, तो दिल्ली के घरेलू उपभोक्ता सामूहिक रूप से हर साल करीब 2 करोड़ रुपये तक की बचत कर सकते हैं। इस विषय पर CEEW की सीनियर प्रोग्राम लीड भावना त्यागी ने सोलर पैनलों की देखभाल से जुड़े कई जरूरी सुझाव दिए हैं। आइए जानते हैं मानसून में सोलर सिस्टम की देखभाल कैसे करनी चाहिए।

जाने धूल जमने की समस्या और सफाई का सही समय

भावना त्यागी के मुताबिक, सोलर पैनलों को कितने अंतराल पर साफ किया जाना चाहिए, यह आपके आसपास के वातावरण और स्थानीय प्रदूषण पर निर्भर करता है। अगर आपके इलाके में वाहनों का धुआं ज्यादा है, आसपास निर्माण कार्य चल रहा है, बार-बार धूल भरी आंधियां आती हैं या पैनलों के आसपास पक्षियों की आवाजाही ज्यादा है, तो पैनल जल्दी गंदे हो सकते हैं। पैनलों पर धूल और दूसरी गंदगी की परत जमने से सूर्य की रोशनी ठीक से नहीं पहुंच पाती और बिजली उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इसलिए अपने आसपास के वातावरण को ध्यान में रखते हुए नियमित अंतराल पर पैनलों की सतह को साफ करते रहना जरूरी है।

सोलर पैनल धोने का सही और सुरक्षित तरीका क्या हो  

सोलर पैनलों की सफाई करते समय पानी और कपड़े के चुनाव पर विशेष ध्यान देना चाहिए। पैनलों को साफ करने के लिए  खनिज वाले पानी, जैसे RO वॉटर का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। पोंछने के लिए मुलायम ब्रश या माइक्रोफाइबर कपड़े का ही इस्तेमाल करें। सफाई के दौरान डिटर्जेंट, तेज केमिकल, कठोर वायर ब्रश या हाई-प्रेशर वॉटर जेट का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इससे पैनल के शीशे की बाहरी सुरक्षात्मक परत पर खरोंच आ सकती है या ग्लास को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए सफाई हमेशा सावधानी से और उचित उपकरणों के साथ करनी चाहिए।

मानसून में वाटर ड्रेनेज और स्ट्रक्चर की सुरक्षा भी है जरूरी

बरसात के दौरान तेज बारिश पैनलों पर जमा धूल को काफी हद तक बहा सकती है और प्राकृतिक सफाई का काम कर सकती है। हालांकि, सिर्फ बारिश के भरोसे सोलर पैनलों की सफाई छोड़ देना सही नहीं है। बारिश के बाद पैनलों की सतह पर गंदगी या कीचड़ जमा रह सकती है। इसके अलावा उपभोक्ताओं को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि सोलर स्ट्रक्चर और छत पर पानी की निकासी की उचित व्यवस्था हो। पैनल के फ्रेम या स्ट्रक्चर के आसपास पानी जमा नहीं होना चाहिए। लंबे समय तक जलजमाव रहने से जंग लगने और लीकेज जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।

तेज आंधी-तूफान के बाद वायरिंग की करें पूरी जांच

मानसून के दौरान तेज हवाओं और आंधी के बाद सोलर सिस्टम का एक बार निरीक्षण जरूर करना चाहिए। यह जांचें कि हवा के साथ उड़कर आया कचरा, पत्तियां या अन्य सामग्री पैनलों पर जमा तो नहीं हुई है।

इसके साथ ही यह भी देखना जरूरी है कि तेज हवा की वजह से कोई तार ढीला तो नहीं हुआ या सिस्टम के किसी हिस्से को भौतिक नुकसान तो नहीं पहुंचा है। वायरिंग का ढीला होना या तार का कट जाना सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक हो सकता है। ऐसी स्थिति में खुद से वायरिंग ठीक करने के बजाय किसी योग्य तकनीशियन या सर्विस वेंडर से जांच कराना बेहतर है।

पैनलों पर कीचड़ जमने से घट सकता है बिजली उत्पादन

कभी-कभी हल्की बारिश के दौरान पैनलों पर जमा धूल पूरी तरह साफ होने के बजाय गीली होकर कांच पर या पैनल के कोनों में कीचड़ की तरह चिपक जाती है। बारिश रुकने के बाद यह गंदगी सूखकर धब्बों में बदल सकती है और सूर्य की किरणों को पैनल की सतह तक पहुंचने से रोक सकती है।

इससे पैनल के प्रभावित हिस्से की कार्यक्षमता कम हो सकती है और कुल ऊर्जा उत्पादन में गिरावट आ सकती है। इसलिए बारिश के बाद अगर पैनल की सतह पर गंदगी या कीचड़ के धब्बे दिखाई दें, तो उन्हें उचित तरीके से साफ कर देना चाहिए।

रोजाना किस ऐप से चेक करें सोलर सिस्टम का प्रदर्शन

आजकल अधिकांश ग्रिड-कनेक्टेड सोलर सिस्टम ऑनलाइन मॉनिटरिंग ऐप से जुड़े होते हैं। ऐसे में उपभोक्ताओं को नियमित रूप से ऐप के जरिए यह देखते रहना चाहिए कि उनका सोलर सिस्टम कितनी बिजली का उत्पादन कर रहा है।

अगर किसी दिन पर्याप्त धूप होने के बावजूद ऐप पर बिजली उत्पादन सामान्य से काफी कम या असामान्य दिखाई दे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में अपने सोलर वेंडर या सर्विस टेक्नीशियन से संपर्क करके सिस्टम की जांच कराना बेहतर रहेगा। 

मानसून के दौरान पैनलों की सफाई, पानी की निकासी, स्ट्रक्चर की स्थिति, वायरिंग और बिजली उत्पादन की निगरानी पर ध्यान देकर सोलर सिस्टम को बेहतर तरीके से चलाया जा सकता है। समय पर की गई देखभाल से सिस्टम की कार्यक्षमता बनाए रखने और संभावित खराबियों को समय रहते पहचानने में मदद मिल सकती है।

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