अचानक ऑफिस में हुआ पति का निधन, बच्चों के लिए बदलनी पड़ी जीवन की राह, जाने OSD कनिका की कहानी ?
Udaipur Times, OSD Kanika Kaushik : ये तो कोई नहीं जानता है कि जिंदगी कब और किस मोड़ पर पूरी तरह बदल जाएगी। GDA (गाजियाबाद डेवलपमेंट अथॉरिटी) में OSD के तौर पर काम करने वालीं डॉ. कनिका कौशिक की जिंदगी भी कुछ ऐसी ही घटना के बाद बदल गई। पति के अचानक निधन के बाद, तीन छोटे बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। इस मुश्किल दौर में खुद को संभालते हुए, उन्होंने न केवल बच्चों की परवरिश की ज़िम्मेदारी उठाई, बल्कि सरकारी नौकरी में अपना करियर भी बनाया। आज वह अपने बच्चों के लिए माँ और पिता दोनों की भूमिका निभा रही हैं, और उनके संघर्ष की कहानी उन्हें बच्चों के लिए एक रोल मॉडल बनाती है।
27 मार्च 1989 को दिल्ली में जन्मीं कनिका ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से B.Com. किया। इसके बाद उन्होंने MDU से मार्केटिंग और फ़ाइनेंस में MBA किया। उन्होंने महिंद्रा एंड महिंद्रा में मार्केटिंग एसोसिएट के तौर पर अपना करियर शुरू किया। 2013 में उनकी शादी हुई और वह मेरठ चली गईं। शादी के बाद भी उन्होंने अपनी पढ़ाई और प्रोफ़ेशनल काम जारी रखा; उन्होंने चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी से B.Ed. किया और बाद में सोफ़िया गर्ल्स स्कूल में टीचर के तौर पर काम किया।
कार्डियक अरेस्ट के कारण पति का ऑफिस में अचानक से हुआ निधन
तीन बच्चों जिनमें जुड़वां बच्चे (एक लड़का और एक लड़की) भी शामिल थे। उनके जन्म के बाद ज़िंदगी ठीक-ठाक चल रही थी। 2023 में, उनके पति अयोध्या डेवलपमेंट अथॉरिटी में टाउन प्लानर के तौर पर काम कर रहे थे। एक दिन, ऑफ़िस में उन्हें अचानक कार्डियक अरेस्ट हुआ। परिवार कुछ समझ पाता, उससे पहले ही उनका निधन हो गया। उस समय, उनकी बड़ी बेटी मात्र नौ साल की थी, जबकि जुड़वां बच्चे तीन साल के थे। पति की मौत के बाद, बच्चों की परवरिश से लेकर उनके भविष्य को सुरक्षित करने तक की सारी ज़िम्मेदारी कनिका पर आ गई।
2024 में पति की जगह नौकरी मिली
कनिका बताती हैं कि पति के गुज़रने के बाद उनके सारे सपने टूटते हुए लग रहे थे, लेकिन बच्चों के भविष्य के बारे में सोचकर उन्हें फिर से हिम्मत मिली। दुख में डूबने के बजाय, उन्होंने आगे बढ़ने का फ़ैसला किया। इस दौरान, उन्होंने अपनी स्थिति के बारे में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जानकारी दी। इसके बाद, 16 मार्च 2024 को उन्हें गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) में OSD के पद पर नियुक्त किया गया। यह वही पद था जिसे पहले उनके पति संभालते थे। कनिका का कहना है कि हालांकि सरकारी नौकरी हर किसी की पहली पसंद होती है, लेकिन वह नहीं चाहेंगी कि किसी को ऐसी नौकरी तब मिले जब उसने अपनी ज़िंदगी का सबसे बड़ा नुकसान सहा हो।
कनिका चाहती है नौकरी का तनाव बच्चों पर असर न डाले
नौकरी मिलने के बाद भी, उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती है अपने काम की जरूरतों और बच्चों की देखभाल की ज़िम्मेदारी के बीच तालमेल बिठाना, जबकि उन्हें बच्चों से दूर रहना पड़ता है। दिन में जब वह ऑफिस में होती हैं, तो स्कूल से लौटने के बाद उनके ससुराल वाले बच्चों का ध्यान रखते हैं। शाम होते ही, कनिका सीधे घर जाती हैं ताकि अपने बच्चों के साथ अच्छा समय बिता सकें। वह यह पक्का करती हैं कि उनकी नौकरी का तनाव बच्चों पर असर न डाले; ऑफिस में रहते हुए भी उनका ध्यान हमेशा बच्चों पर ही रहता है। उनकी सबसे बड़ी बेटी अभी सातवीं कक्षा में है, जबकि उनके दो छोटे बच्चे पहली कक्षा में हैं।
महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए काम
कनिका मानती हैं कि बच्चों से दूर रहकर काम करना आसान नहीं है, लेकिन वह उनके बेहतर भविष्य के लिए आज की कुछ खुशियों का त्याग करती हैं। साथ ही, GDA में वह मदद के लिए आने वाले लोगों की समस्याओं का तेज़ी से समाधान करने की कोशिश करती हैं। वह महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए भी काम करती हैं।
काम और संघर्ष को कई मंचों पर सराहा गया
उनके काम और संघर्ष को कई मंचों पर सराहा गया है। पिछले साल, उन्हें दिल्ली की रेखा गुप्ता ने 'वुमन अचीवर्स अवॉर्ड' से सम्मानित किया था। हाल ही में, उन्हें फ्रांस के सोरबोन इंटरनेशनल से पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में मानद डॉक्टरेट की उपाधि दी गई। उसी समारोह में अभिनेता विवेक ओबेरॉय को भी 'भारत सम्मान' से सम्मानित किया गया था। कनिका की कहानी पति को खोने के बाद बच्चों के भविष्य के लिए खुद को संभालना और नई ज़िम्मेदारियों के साथ आगे बढ़ना न केवल उनके अपने बच्चों के लिए, बल्कि मुश्किल हालात से जूझ रही दूसरी महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई है।