हाइब्रिड हेल्थ मॉडल से बदलेगा सरकारी इलाज का चेहरा

सरकारी अस्पतालों में ‘प्रीमियम इलाज’ की तैयारी

 | 

उदयपुर 12 जनवरी 2026। रविंद्र नाथ टैगोर मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ विपिन माथुर ने सरकारी अस्पतालों में प्रीमियम उपचार सुविधाएं शुरू करने के लिए एक व्यापक ब्लूप्रिंट तैयार किया है।

इस योजना का उद्देश्य आमजन को किफायती दरों पर निजी अस्पतालों जैसी उच्च गुणवत्ता की चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराना है, जबकि आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं पहले की तरह पूरी तरह निःशुल्क रहेंगी।

अधिकारियों के अनुसार यह पहल “कॉरपोरेट और इंश्योरेंस आधारित हाइब्रिड मॉडल” पर आधारित है। इसके तहत अस्पतालों के बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जाएगा, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों को अपग्रेड किया जाएगा, अस्पताल प्रबंधन में सुधार किया जाएगा और विशेषज्ञ सेवाओं को सुदृढ़ किया जाएगा। योजना के अंतर्गत जो मरीज भुगतान करने में सक्षम होंगे, उन्हें बेहतर इन-पेशेंट सुविधाएं, फास्ट-ट्रैक जांच और प्राथमिकता आधारित अपॉइंटमेंट जैसी वैकल्पिक प्रीमियम सेवाएं मिल सकेंगी, जबकि असमर्थ मरीजों को निःशुल्क उपचार में कोई कमी नहीं होगी।

उदयपुर स्थित रवींद्र नाथ टैगोर मेडिकल कॉलेज को इस मॉडल के तहत प्रमुख संस्थानों में शामिल किया गया है, जहां चरणबद्ध तरीके से बड़े स्तर पर निवेश प्रस्तावित है। यहां आधुनिक चिकित्सा तकनीक और बेहतर रोगी सेवाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

इस पहल पर प्रतिक्रिया देते हुए रवींद्र नाथ टैगोर मेडिकल कॉलेज, उदयपुर के प्राचार्य डॉ. विपिन माथुर ने कहा कि यह मॉडल सरकारी अस्पतालों को मजबूत करने में सहायक होगा। उन्होंने कहा कि इससे गरीबों के लिए निःशुल्क उपचार से समझौता किए बिना बुनियादी ढांचे और मरीज सुविधाओं में सुधार किया जा सकेगा। जो मरीज वैकल्पिक भुगतान सेवाएं लेने में सक्षम होंगे, उनके माध्यम से उत्पन्न होने वाला राजस्व उसी अस्पताल में बेहतर सेवाओं के लिए पुनर्निवेश किया जाएगा।

अधिकारियों ने बताया कि वैकल्पिक भुगतान सेवाएं पूरी तरह स्वैच्छिक होंगी, उनकी दरें पारदर्शी होंगी और राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा कड़ाई से विनियमित की जाएंगी। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी मरीज पर भुगतान के लिए दबाव न बनाया जाए और निःशुल्क सेवाओं या बजटीय आवंटन में कोई कटौती न हो। निःशुल्क और भुगतान सेवाओं के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं रहेंगी तथा नियमित ऑडिट के जरिए जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी।

सरकार का मानना है कि इस पहल से सरकारी अस्पतालों में भीड़ कम होगी, निजी अस्पतालों पर दबाव घटेगा और मरीजों की संतुष्टि में सुधार आएगा।

आवश्यक मंजूरी के बाद इस मॉडल को पहले चयनित तृतीयक अस्पतालों में पायलट आधार पर लागू किया जाएगा, जिसके बाद इसे अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण के रूप में अपनाया जा सकता है।

To join us on Facebook Click Here and Subscribe to UdaipurTimes Broadcast channels on   GoogleNews |  Telegram |  Signal