12 साल की उम्र में मां को खोया ! 3 बार फेल हुईं, चौथे प्रयास में SDM बनकर बेटी ने किया सपना पूरा
Udaipur Times, SDM Ankita Kumari Success Story : बहुत सारे लोग हालातों से समझौता करके अपने सपने को छोड़ देते हैं लेकिन जो इंसान हालातों से लड़कर अपने सपनों को पूरा करते हैं असल में वहीं इतिहास रचते हैं। ऐसी ही एक कहानी है बिहार के सारण जिले की रहने वाली अंकिता कुमारी की। ये कहानी संघर्ष, हौसले और धैर्य की है।
अंकिता की मां का सपना था कि उनकी बेटी एक दिन अफसर बने, लेकिन जब अंकिता मात्र 12 साल की थीं, तभी उनकी मां का निधन हो गया। इस दुख ने उन्हें तोड़ने की बजाय और मजबूत बना दिया। तमाम मुश्किलों और जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और आखिरकार SDM बनकर अपनी मां का सपना पूरा किया।

12 साल की छोटी उम्र में छूटा मां का साथ
12 साल की छोटी उम्र में सिर से मां का साया उठ गया था। जैसे-तैसे इस इतनी छोटी उम्र में अंकिता ने खुद को संभाला और घर की जिम्मेदारियों के साथ-साथ अपनी पढ़ाई पूरी की। अंकिता ने अपनी शुरुआती पढ़ाई छपरा के सरस्वती शिशु विद्या मंदिर से की। इसके बाद उन्होंने राजेंद्र कॉलेज से इंटरमीडिएट और पटना विमेंस कॉलेज से ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की, जहां वह यूनिवर्सिटी टॉपर रहीं।
इसके बाद उन्होंने पटना यूनिवर्सिटी से मास्टर्स की डिग्री हासिल की। पढ़ाई में उनकी प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने तीन बार UGC-NET परीक्षा भी पास की।
3 बार BPSX की परीक्षा में मिली असफलता
उनका लक्ष्य प्रशासनिक अधिकारी बनना था। इसके लिए उन्होंने 2022 में बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) परीक्षा की तैयारी शुरू की। लेकिन सफलता का रास्ता आसान नहीं था। लगातार तीन बार वह BPSC की प्रारंभिक परीक्षा भी पास नहीं कर सकीं। बार-बार की असफलता ने उन्हें मानसिक रूप से काफी परेशान किया और कई बार उन्हें लगा कि शायद वह अपनी मां का सपना पूरा नहीं कर पाएंगी।

चौथे प्रयास में मिली सफलता
ऐसे मुश्किल समय में उनके परिवार ने उनका हौसला बढ़ाया और हार न मानने की सलाह दी। अंकिता ने भी असफलताओं से सीख लेते हुए अपनी तैयारी जारी रखी। चौथे प्रयास में उन्होंने पूरी मेहनत और आत्मविश्वास के साथ परीक्षा दी। इस बार उन्होंने प्रीलिम्स, मेन्स और इंटरव्यू तीनों चरण सफलतापूर्वक पार कर लिए।

SDM बनकर मां के सपने को पूरा किया
70वीं बीपीएससी परीक्षा में अंकिता ने 272वीं रैंक हासिल की और SDM के पद के लिए चयनित हुईं। उनकी यह सफलता केवल एक प्रतियोगी परीक्षा पास करने की कहानी नहीं है, बल्कि एक बेटी के अपनी मां के सपने को पूरा करने की प्रेरणादायक यात्रा भी है।
अंकिता का कहना है कि किसी भी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में धैर्य, निरंतर अभ्यास और सीमित संसाधनों का सही उपयोग बेहद जरूरी है। उनका मानना है कि असफलताएं सफलता की राह का हिस्सा हैं और यदि इंसान हार नहीं मानता, तो एक दिन मंजिल जरूर मिलती है।
