एक दौर पीछे छूट गया वही दौर ढूंढने निकला हूं……..


एक दौर पीछे छूट गया वही दौर ढूंढने निकला हूं……..

जहां कभी बच्चे घरों के बाहर देखे जाते थे वहीं आज के दौर में बच्चे 9 से 10 घंटे घर पर फोन में बिता देते हैं वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार फोन के अत्यंत उपयोग से मानसिक स्थिति में काफी असर पड़ा है। फोन में खेले जाने वाले खेलों की बात करें तो पब जी युवाओं में अपना क्रेज अपने आप बढ़ाए जा रहा है।

 

एक दौर पीछे छूट गया वही दौर ढूंढने निकला हूं……..

जहां कभी बच्चे घरों के बाहर देखे जाते थे वहीं आज के दौर में बच्चे 9 से 10 घंटे घर पर फोन में बिता देते हैं वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार फोन के अत्यंत उपयोग से मानसिक स्थिति में काफी असर पड़ा है। फोन में खेले जाने वाले खेलों की बात करें तो पब जी युवाओं में अपना क्रेज अपने आप बढ़ाए जा रहा है।

आइए जानते हैं कि कैसे खेला जाता है पब जी!!! पैराशूट के जरिए 100 प्लेयर्स को एक आयरलैंड उतारा जाता है जहां प्लेयर्स को बंदूके ढूंढनी पड़ती है और दुश्मनों को मारना होता है आखिर में जो बचता है वह विनर होता है चार लोग ग्रुप बनाकर भी खेलते हैं जो आखिरी तक पहुंच गया है वो विनर कहलाते है। अंत में जीते हुए प्लेयर को चिकन डिनर मिलता है अगर हम बात करें कुछ बीते हुए वक्त की तब भी ब्लू व्हेल, पोकेमोन गो, मोमो व्हाट्सएप चैलेंज जैसे खेलो ने बच्चों की जिंदगी को भी खतरे में डाल दिया था यहां तक कि बच्चों को अपनी जिंदगी से भी हाथ धोना पड़ा।

ब्लू व्हेल चैलेंज 2016 में काफी वायरल हुआ था जिसके अन्र्तगत पूर्वोत्तर भारत के असम में 15 सितम्बरए 2017को कॉलेज में पढ़ने वाले एक छात्र ने एक इमारत के टॉप फ्लोर से कूदकर आत्महत्या करने की कोशिश की। मोमो व्हाट्सएप चैलेंज की बात करे तो इस खतरनाक खेल से मौत की खबर राजस्थान के अजमेर से सामने आई जहां मोमो गेम के चक्कर में दसवीं क्लास की एक छात्रा ने आत्महत्या कर ली थी। ऐसा ही मंजर पोकीमॉन गो के समय भारत में भी दिखा इस गेम में हर व्यक्ति हाथ में मोबाइल लिए कुछ ढूंढने की कोशिश करता रहता था इसके जरिए भी कई लोगों ने अपनी जान गवाई है।

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शहर की बड़ी बड़ी इमारतों, थकते बदन और उदास चेहरों में अब तो ऐसा ही लग रहा है कि मानो बचपन खत्म ही हो गया है अगर जिंदा भी है तो बचपन शायद बंद है उस मोबाइल में जिसे टेक्नोलॉजी की उंगलियां दिन रात चलाया करती है।

Views in the article are solely of the author GARIMA SHARMA- sharmagarima640@gmail.com +91 7690900639 –

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