8वें वेतन आयोग के तहत फिटमेंट फैक्टर 2.0 हुआ तो क्या डबल हो जाएगी सैलेरी ? जानिए

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8वें वेतन आयोग के तहत फिटमेंट फैक्टर 2.0 हुआ तो क्या डबल हो जाएगी सैलेरी ? जानिए 

Udaipur Times, 8th Pay Commission : 8वां केंद्रीय वेतन आयोग 22 अक्टूबर से मुंबई में दो दिवसीय बैठक करने जा रहा है। इस बैठक में कर्मचारी यूनियनों, विभिन्न संस्थानों और केंद्र सरकार के कर्मचारियों के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा की जाएगी। इस बीच, कर्मचारी अपने महंगाई भत्ते (DA) में बढ़ोतरी की घोषणा का इंतजार कर रहे हैं। 

अभी सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर 8वां वेतन आयोग 2.0 का 'फिटमेंट फैक्टर' लागू करता है, तो कर्मचारियों के मूल वेतन (बेसिक सैलरी) और कुल (ग्रॉस) वेतन में कितनी बढ़ोतरी होगी? इसके साथ ही, मकान किराया भत्ता (HRA) और महंगाई भत्ता (DA) कितना होगा, और कुल ग्रॉस सैलरी कितनी बनेगी?

₹21,700 का मूल वेतन बढ़कर ₹43,400 हो सकता है।

फिटमेंट फैक्टर एक ऐसा मल्टीप्लायर (गुणांक) है, जिसका इस्तेमाल मौजूदा मूल वेतन के आधार पर नया मूल वेतन तय करने के लिए किया जाता है। अगर सरकार 2.0 का फिटमेंट फैक्टर लागू करती है, तो अभी का ₹21,700 का मूल वेतन बढ़कर ₹43,400 हो सकता है यानी मूल वेतन सीधे दोगुना हो जाएगा।

वहीं, अगर गणना ₹18,000 के एंट्री-लेवल मूल वेतन के आधार पर की जाती है, तो नया मूल वेतन ₹36,000 होगा। हालांकि, अंतिम ग्रॉस सैलरी इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार नए ढांचे में वेतन संशोधन के लिए किन पैमानों को चुनती है।

अभी की ग्रॉस सैलरी ₹41,230 है; जानिए इसकी गणना कैसे की जाती है।

मान लीजिए कि केंद्र सरकार का लेवल-1 का कोई कर्मचारी 'X' श्रेणी के शहर में तैनात है, जिसका मौजूदा मूल वेतन ₹21,700 है। अगर महंगाई भत्ता (DA) 60% और मकान किराया भत्ता (HRA) 30% मान लिया जाए, तो उनकी ग्रॉस सैलरी की गणना कुछ इस तरह होगी: मूल वेतन: ₹21,700
महंगाई भत्ता (60%): ₹13,020
HRA (30%): ₹6,510
कुल ग्रॉस सैलरी: ₹41,230
इस गणना में ट्रांसपोर्ट अलाउंस (TA) या अन्य लागू भत्तों को शामिल नहीं किया गया है। इनके जुड़ने के बाद ग्रॉस सैलरी बढ़ सकती है।

8वें वेतन आयोग (Pay Commission) के लागू होने पर DA का क्या होगा?

8वें वेतन आयोग के लागू होने पर एक ऐसी व्यवस्था अपनाई जा सकती है, जिसमें मौजूदा महंगाई भत्ते (DA) को संशोधित मूल वेतन (basic pay) में मिला दिया जाए और DA को फिर से शून्य (zero) कर दिया जाए। हालाँकि, इस बारे में अंतिम निर्णय सरकार के निर्देशों पर निर्भर करेगा।

इसका मतलब यह है कि अगर मूल वेतन बढ़ता है, तो कर्मचारी को नई मूल वेतन के ऊपर मौजूदा DA प्रतिशत के बराबर अतिरिक्त राशि अपने आप नहीं मिलेगी। नए वेतन ढांचे (pay structure) के तहत, DA की गणना नए फ्रेमवर्क के अनुसार की जाएगी।

HRA और TA की गणना भी नई दरों और लागू नियमों के आधार पर की जाएगी। इसलिए, 2.0 के फिटमेंट फैक्टर का मतलब यह नहीं है कि कर्मचारी की कुल ग्रॉस सैलरी बस दोगुनी हो जाएगी।

7वें वेतन आयोग के तहत HRA में कैसे बदलाव किया गया था

2017 में 7वें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों के बाद, केंद्र सरकार ने शहरों के वर्गीकरण के आधार पर HRA दरें तय कीं। शुरुआत में, 'X' श्रेणी के शहरों के लिए HRA 24%, 'Y' श्रेणी के शहरों के लिए 16% और 'Z' श्रेणी के शहरों के लिए 8% तय किया गया था।

सरकार की नीति के अनुसार, जब DA 25% से अधिक हो गया, तो इन दरों को क्रमशः 27%, 18% और 9% कर दिया गया। जब DA 50% के पार चला गया, तो HRA दरों को और बढ़ाकर क्रमशः 30%, 20% और 10% कर दिया गया। उस समय, शहरों की श्रेणियों के आधार पर HRA की न्यूनतम राशि भी तय की गई थी: ₹5,400, ₹3,600 और ₹1,800। 8वें वेतन आयोग के तहत HRA दरें, आयोग की सिफारिशों और केंद्र सरकार के अंतिम निर्णय के बाद ही स्पष्ट हो पाएंगी।

ग्रॉस सैलरी और इन-हैंड सैलरी के बीच भी अंतर होगा

कर्मचारियों के लिए यह समझना जरूरी है कि ग्रॉस सैलरी और इन-हैंड सैलरी अलग-अलग होती हैं। सकल वेतन (ग्रॉस सैलरी) में मूल वेतन, DA, HRA, TA और अन्य लागू भत्ते शामिल होते हैं। इसके विपरीत, NPS या UPS में योगदान, आयकर और अन्य कटौतियों के बाद जो राशि बचती है, उसे 'इन-हैंड सैलरी' (हाथ में मिलने वाला वेतन) कहा जाता है।

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