Udaipur Times, Model Tenancy Act, 2021: किराये के घर में रहने के दौरान, अक्सर नल खराब होने, दीवारों में दरारें आने या मरम्मत की अन्य ज़रूरतें सामने आती हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह होता है कि इसका खर्च कौन उठाएगा - मकान मालिक या किरायेदार? इस तरह के विवादों को कम करने के लिए, 'मॉडल टेनेंसी एक्ट, 2021' (Model Tenancy Act, 2021) में स्पष्ट नियम दिए गए हैं। यह कानून दोनों पक्षों के अधिकारों और ज़िम्मेदारियों को साफ तौर पर तय करता है।
संपत्ति की देखभाल करना दोनों की ज़िम्मेदारी है
'मॉडल टेनेंसी एक्ट' के अनुसार, संपत्ति को अच्छी स्थिति में बनाए रखने की ज़िम्मेदारी मकान मालिक और किरायेदार दोनों की है। सामान्य टूट-फूट को छोड़कर, संपत्ति को उसी स्थिति में रखा जाना चाहिए, जैसी वह किराये पर देते समय थी। हालाँकि, बड़ी मरम्मत और रखरखाव का काम मुख्य रूप से मकान मालिक की ज़िम्मेदारी है। इसके अलावा, अगर किराये के समझौते (rent agreement) में कोई विशेष व्यवस्था तय की गई है, तो ज़िम्मेदारियाँ उसी के अनुसार तय की जा सकती हैं।
मरम्मत न होने पर किरायेदार के अधिकार
अगर मकान मालिक अपनी ज़िम्मेदारी के तहत आने वाली मरम्मत कराने से मना कर देता है या बार-बार टालता है, तो किरायेदार के पास कानूनी रास्ता मौजूद है। किरायेदार खुद मरम्मत करवा सकता है और उसका खर्च भविष्य के किराये से काट सकता है। हालाँकि, इसकी एक सीमा है: किसी भी महीने में काटी जाने वाली रकम, कुल मासिक किराये के 50 प्रतिशत से ज़्यादा नहीं हो सकती। यह प्रावधान किरायेदार को राहत देता है और साथ ही मकान मालिक को अपनी ज़िम्मेदारियाँ पूरी करने के लिए प्रेरित करता है।
संपत्ति रहने लायक न रहने पर उसे खाली करने का अधिकार
कभी-कभी, मरम्मत न होने की वजह से संपत्ति की हालत इतनी खराब हो सकती है कि वहाँ रहना मुश्किल हो जाए। ऐसे मामलों में, कानून किरायेदार को कुछ खास अधिकार देता है। अगर मकान मालिक की लापरवाही के कारण संपत्ति रहने लायक नहीं रह जाती है, तो किरायेदार 15 दिन का लिखित नोटिस देकर घर खाली कर सकता है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि किरायेदार को असुरक्षित या असुविधाजनक स्थितियों में रहने के लिए मजबूर न होना पड़े।
किरायेदारों की भी कई ज़िम्मेदारियां होती हैं
कानून सिर्फ मकान मालिक पर ही ज़िम्मेदारियाँ नहीं डालता, बल्कि किरायेदार के लिए भी कई नियम तय करता है। किरायेदार को संपत्ति को कोई नुकसान नहीं पहुँचाना चाहिए, चाहे वह जानबूझकर किया गया हो या लापरवाही से। अगर कोई खराबी या नुकसान होता है, तो तुरंत मकान मालिक को लिखित रूप में सूचित करना ज़रूरी है। इसके अलावा, घर की फिटिंग, फिक्स्चर और अन्य सुविधाओं की उचित देखभाल करना किरायेदार की जिम्मेदारी है। सामान्य इस्तेमाल के दौरान प्रॉपर्टी को रहने लायक बनाए रखना भी किरायेदार की ही जिम्मेदारी है।
नियम तोड़ने पर सिक्योरिटी डिपॉजिट से कटौती
अगर किरायेदार उन मरम्मत कार्यों को नहीं करवाता है जो उसकी जिम्मेदारी हैं, या बिना अनुमति के प्रॉपर्टी के ढांचे में कोई बदलाव या फेरबदल करता है, तो मकान मालिक खुद मरम्मत करवा सकता है। इस पर आने वाला खर्च सिक्योरिटी डिपॉजिट से काटा जा सकता है। अगर मरम्मत का खर्च सिक्योरिटी डिपॉजिट की रकम से ज्यादा हो जाता है, तो किरायेदार को नोटिस मिलने के एक महीने के भीतर बाकी बची रकम का भुगतान करना होगा। यह नियम प्रॉपर्टी को बिना अनुमति किए गए बदलावों और नुकसान से बचाने के लिए बनाया गया है।
प्राकृतिक आपदा की स्थिति में कोई किराया नहीं देना होगा
बाढ़, आग, चक्रवात, भूकंप या अन्य प्राकृतिक आपदाओं जैसी स्थितियों में नियम अलग होते हैं। अगर ऐसी किसी घटना के कारण प्रॉपर्टी रहने लायक नहीं रह जाती है, तो मकान मालिक तब तक किराया नहीं मांग सकता जब तक कि प्रॉपर्टी को फिर से रहने लायक न बना दिया जाए। अगर प्रॉपर्टी की मरम्मत करना संभव नहीं है, तो मकान मालिक को नोटिस की अवधि खत्म होने के 15 दिनों के भीतर सिक्योरिटी डिपॉजिट और कोई भी एडवांस किराया वापस करना होगा। इस नियम का उद्देश्य ऐसी आपातकालीन स्थितियों में दोनों पक्षों को उचित सुरक्षा प्रदान करना है।