UPI पर चार्ज लगा तो 53 प्रतिशत लोग बना सकते हैं दूरी, क्या बदल सकता है डिजिटल पेमेंट का तरीका ?

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UPI पर चार्ज लगा तो 53 प्रतिशत लोग बना सकते हैं दूरी, क्या बदल सकता है डिजिटल पेमेंट का तरीका ?

Udaipur Times, Payment and Settlement Systems : अगर आप भी डिजिटल पेमेंट के लिए गूगल पे, फोन पे, पेटीएम का इस्तेमाल करते हैं तो यह खबर आपके लिए बहुत ही खास है। यदि केंद्र सरकार पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 में प्रस्तावित  यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफ़ेस (UPI) के आधे से अधिक यूजर 3000 रुपए से अधिक के ट्रांजैक्शन के लिए पेमेंट के दूसरे तरीकों पर स्विच कर सकते हैं।

 वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में ' Payment and Settlement Systems Act' पेश किया है। यदि ये बिल पास हुआ, तो UPI पेमेंट पर फीस का भुगतान करना पड़ सकता है।

UPI पेमेंट में आने वाले दिनों में हो सकते हैं बड़े बदलाव 

गौरतलब है कि हर महीने UPI के माध्यम से करोड़ों रुपये का ट्रांजेैक्शन होता है। एक सर्वे के मुताबिक, जुलाई 2026 में करीब 23.7 अरब पेमेंट UPI के जरिए हुए और करीब  29,9 लाख करोड़ रुपये का ट्रांजैक्शन किया गया। अब तक कुछ बड़े पेमेंट को छोड़कर UPI से ट्रांजैक्शन फ्री है, जिसमें पेमेंट करने वाले या पेमेंट लेने वालों को किसी भी तरह का कोई चार्ज नहीं देना पड़ता है। लेकिन आने वाले दिनों में UPI पेमेंट नियमों में कुछ बदलाव होने की आशंका जताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, UPI पेमेंट पर सर्चेंट चार्ज लग सकता है, ये कितना होगा, किसे देना होगा, कौन-से पेमेंट पर लगेगा इसका जवाब तो सरकारी नोटिफिकेशन जारी होने के बाद ही पता चलेगा। 

2 हजार रुपये से अधिक के लेनदेन पर लग सकता है चार्ज

आशंका जताई जा रही है कि 2 हजार रुपये से अधिक के टांजैक्शन पर चार्ज लग सकता है। लेकिन अभी तक इसको लेकर कोई ऑफिशियल स्टेटमेंट जारी नहीं किया गया है।  वित्त मंत्रालय की ओर से पेश किए 'पेमेंट एंड सेटलमेंट एक्ट' बिल से तुरंत कोई चार्ज नहीं लगेगा। इस बिल से एक ऐसा कानून बनेगा, जो सरकार को MDR लागू करने का अधिकार मिल जाएगा।

क्या है MDR ?

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) द्वारा रेगुलेट किया जाने वाला  Merchant Discount Rates ऐसी फीस है जो बिजनेस कस्टमर्स द्वारा किए गए ऑनलाइन ट्रांजैक्शन को प्रोसेस करने के लिए बैंकों और PSPs को देते हैं। साल 2020 से यह फीस UPI और RuPay डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शन के लिए 0 प्रतिशत है क्योंकि केंद्र सरकार डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देना चाहती थी और कस्टमर्स और मर्चेंट्स के लिए कोई MDR जरूरी नहीं किया था।

किसे देना पड़ सकता है फीस और किसके लिए रहेगा फ्री

MDR फीस डिजिटल पेमेंट के लिए मर्चेंट की ओर से बैंक या सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों को दिया जाता है। अभी तक सामने आयी जानकारी के मुताबिक, MDR का बोझ मुख्य तौर पर बड़े कारोबारियों, बिजनेसमैन को देना पड़ सकता है। छोटे दुकानदारों, छोटे रिटेलर्स और आम उपभोक्ताओं के लिए UPI पेमेंट आगे भी मुफ्त रहने वाला है।

जानिए सर्वे में क्या सामने आया 

इसको लेकर आमजन के साथ जो सर्वे हुआ उसके मुताबिक, भारत के 322 जिलों से 45,000 से अधिक जवाब मिले हैं। जवाबों से सामने आया है कि यदि बड़े व्यापारियों पर MDR लगाया जाता है, तो 53 प्रतिशत लोग 3000 से ज़्यादा के ट्रांजैक्शन के लिए UPI का इस्तेमाल नहीं करेंगे। इनमें से 27 प्रतिशत ने कहा कि वह क्रेडिट कार्ड, 14  प्रतिशत डेबिट कार्ड और 12 प्रतिशत बैंक ट्रांसफर या कैश का इस्तेमाल करेंगे।

18 प्रतिशत यूजर ने कहा कि वह UPI का इस्तेमाल तभी जारी रखेंगे जब व्यापारी फ़ीस का भुगतान खुद करेंगे, जबकि 12 प्रतिशत लोगों ने कहा कि अगर उन्हें चार्ज देना पड़ा, तब भी वह UPI का इस्तेमाल करते रहेंगे।

सर्वे के मुताबिक, 14 प्रतिशत ने कहा कि उनका फैसला फीस की रकम पर निर्भर करेगा। यह सर्वे पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट के सेक्शन 10A में बदलाव के सरकार के प्रस्ताव के बाद आया है, जो अभी बैंकों और पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर्स को नोटिफाइड डिजिटल पेमेंट मोड्स पर MDR चार्ज करने से रोकता है। प्रस्तावित बदलाव के तहत, केंद्र के पास यह बताने का अधिकार होगा कि कौन से पेमेंट मोड्स ऐसे चार्ज से मुक्त रहेंगे।

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