पड़ोसी के CCTV कैमरे से अगर हो रही है आपके घर की रिकॉर्डिंग ? जाने कहां करें इसकी शिकायत
Udaipur Times, CCTV Camera Privacy Law : आज के इस दौर में सुरक्षा के लिए घरों, दुकानों और कार्यालयों के बाहर सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य हो गया है। बढ़ती चोरी और आपराधिक घटनाओं के बीच लोग अपनी संपत्ति और परिवार की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरा लगवाना ही उचित समझ रहे हैं। लेकिन कितनी बार यही कैमरे पड़ोसियों के बीच विवाद की वजह बन जाते हैं, खासकर तब जब किसी घर के बाहर लगा कैमरा दूसरे व्यक्ति के घर, खिड़की, बालकनी, आंगन या निजी गतिविधियों को रिकॉर्ड करने लगे।
ऐसी परिस्थिति में आमतौर पर लोगों के मन में सवाल उठता है कि क्या पड़ोसी के लगाए गए सीसीटीवी कैमरे के खिलाफ शिकायत की जा सकती है? क्या यह कानून का उल्लंघन है? और अगर किसी कैमरे की नजर आपकी निजी जिंदगी पर है, तो आपके पास क्या कानूनी अधिकार हैं?
पटियाला कोर्ट के अधिवक्ता महमूद आलम का कहना है कि भारत में फिलहाल सीसीटीवी कैमरों को लेकर कोई अलग और विशेष कानून नहीं है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि कोई व्यक्ति दूसरे की निजता का उल्लंघन कर सकता है। भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को निजता का अधिकार देता है और किसी की निजी जिंदगी में अनावश्यक दखल को कानूनी रूप से चुनौती दी जा सकती है।
अपनी सुरक्षा के लिए कैमरा लगाना वैध, लेकिन...
विशेषज्ञों का कहना है कि कोई भी व्यक्ति अपनी सुरक्षा के लिए अपने घर, दुकान या कार्यालय के बाहर सीसीटीवी कैमरा लगा सकता है। यह पूरी तरह वैध और सामान्य प्रक्रिया है। हालांकि, समस्या तब शुरू होती है जब कैमरे का एंगल अपनी संपत्ति से आगे बढ़कर पड़ोसी के निजी क्षेत्र को कवर करने लगता है।
अगर कैमरा आपके घर के मुख्य दरवाजे, खिड़की, बालकनी, आंगन या ऐसी जगहों को रिकॉर्ड कर रहा है जहां आपकी निजी गतिविधियां होती हैं, तो इसे निजता के अधिकार का उल्लंघन माना जा सकता है।
साझा स्थानों में CCTV लगाने पर सहमति जरूरी
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, सीढ़ियों, छत, कॉमन एरिया, सोसाइटी के साझा प्रवेश द्वार जैसे स्थानों पर सीसीटीवी लगाने के लिए वहां रहने वाले अन्य लोगों की सहमति लेना जरूरी माना जाता है। सुरक्षा के नाम पर किसी की निजी जिंदगी की निगरानी नहीं की जा सकती।
हर कैमरा शिकायत का आधार नहीं बनता
केवल कैमरा लगा होने भर से शिकायत नहीं की जा सकती। यदि कैमरा सड़क, पार्किंग, गली, सोसाइटी के प्रवेश द्वार या सार्वजनिक रास्तों की निगरानी के लिए लगाया गया है और उससे पड़ोसी की निजी गतिविधियां रिकॉर्ड नहीं होती हैं, तो आमतौर पर इसे गलत नहीं माना जाएगा।
उदाहरण के तौर पर, यदि कोई व्यक्ति अपनी कार या घर के मुख्य गेट की सुरक्षा के लिए कैमरा लगाता है और उसका फोकस सार्वजनिक क्षेत्र तक सीमित है, तो ऐसे मामले में कानूनी कार्रवाई की संभावना कम होती है।
पहले बातचीत से सुलझाने की करें कोशिश
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में पहला कदम बातचीत होना चाहिए। कई बार लोगों को यह पता ही नहीं होता कि उनके कैमरे का एंगल पड़ोसी के घर की ओर जा रहा है।
ऐसे में शांतिपूर्ण तरीके से बातचीत कर उनसे कैमरे का एंगल बदलने या उसकी दिशा ठीक करने का अनुरोध किया जा सकता है। कई मामलों में केवल बातचीत से ही विवाद खत्म हो जाता है।
बात नहीं बने तो क्या कर सकते हैं?
अगर बातचीत के बाद भी स्थिति नहीं बदलती और आपको लगता है कि आपकी निजी गतिविधियों की रिकॉर्डिंग लगातार की जा रही है, तो आप निम्न कदम उठा सकते हैं—
1. आरडब्ल्यूए या सोसाइटी प्रबंधन से शिकायत
यदि आप किसी सोसाइटी या अपार्टमेंट में रहते हैं, तो सबसे पहले रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) या सोसाइटी प्रबंधन समिति से शिकायत की जा सकती है।
2. पुलिस में शिकायत दर्ज कराएं
यदि मामला गंभीर है, तो स्थानीय पुलिस थाने में शिकायत की जा सकती है। पुलिस जांच कर सकती है कि कैमरे का इस्तेमाल सुरक्षा के लिए किया जा रहा है या किसी व्यक्ति की निजता में दखल देने के लिए।
कानूनी जानकारों के मुताबिक, यदि कोई व्यक्ति बिना सहमति के किसी के निजी क्षेत्र की तस्वीरें या वीडियो रिकॉर्ड करता है, तो सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66E के तहत कार्रवाई की जा सकती है। इस प्रावधान के तहत दोषी पाए जाने पर जुर्माना और तीन साल तक की सजा का प्रावधान है।
3. सिविल कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं
अगर पुलिस कार्रवाई नहीं करती या समस्या लगातार बनी रहती है, तो पीड़ित व्यक्ति सिविल कोर्ट में याचिका दायर कर सकता है। निजता के उल्लंघन और अनावश्यक हस्तक्षेप के आधार पर अदालत कैमरा हटाने का आदेश दे सकती है और परिस्थितियों के अनुसार मुआवजा भी देने का निर्देश दे सकती है।
कानून क्या संदेश देता है?
कानून लोगों को अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने का अधिकार देता है, लेकिन इसके साथ ही हर व्यक्ति की निजता की रक्षा करना भी उतना ही जरूरी मानता है।
अधिवक्ता महमूद आलम के अनुसार, अपनी संपत्ति की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरा लगाना पूरी तरह वैध है, लेकिन किसी दूसरे की निजी जिंदगी पर नजर रखना या उसकी गतिविधियों की रिकॉर्डिंग करना कानूनी रूप से गलत माना जा सकता है।
इसलिए यदि आपको लगता है कि पड़ोसी का सीसीटीवी कैमरा आपकी निजता का उल्लंघन कर रहा है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। पहले बातचीत से समस्या सुलझाने की कोशिश करें और जरूरत पड़ने पर कानूनी मदद लें। आखिरकार, सुरक्षा और निजता दोनों अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखना ही कानून का मूल उद्देश्य है।
