IMD Weather Alert: हरियाणा, राजस्थान समेत देशभर में मॉनसून से कब होगी झमाझम बारिश, देखें मौसम विभाग का क्या है पूर्वानुमान ?

भारत विभाग ने शुक्रवार को अपने पूर्वानुमान में कहा कि 26 मई को मानसून केरल में दस्तक दे सकता है. यह 4 दिन पहले या 4 दिन बाद भी पहुंच सकता है
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IMD Weather Alert: देशभर में पड़ रही भीषण गर्मी और लू के बीच भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राहतभरी खबर दी है। मौसम विभाग ने दक्षिण-पश्चिम मानसून 2026 के आगमन को लेकर अपना आधिकारिक पूर्वानुमान जारी कर दिया है। IMD के मुताबिक, इस बार मानसून सामान्य समय से पहले केरल में दस्तक दे सकता है, जिससे देश के कई हिस्सों में जल्द राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।

 

10 दिन बाद होगी मानसून की एंट्री

भारत विभाग ने शुक्रवार को अपने पूर्वानुमान में कहा कि 26 मई को मानसून केरल में दस्तक दे सकता है. यह 4 दिन पहले या 4 दिन बाद भी पहुंच सकता है. आमतौर पर केरल में मानसून की शुरुआत 1 जून के आसपास होती है, जिसके बाद यह उत्तर की ओर बढ़ते हुए देश के बाकी हिस्सों में पहुंचता है. इस वर्ष मानसून के दौरान देश में सामान्य से कम बारिश की संभावना है, जिसकी मुख्य वजह अल नीनो की परिस्थितियों का विकसित होना हो सकता है.

4 दिन पहले भी आ सकता है

आईएमडी के मुताबिक इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून के 26 मई को केरल पहुंचने की संभावना है। हालांकि, यह चार दिन पहले या चार दिन बाद भी पहुंच सकता है। मौसम विभाग ने कहा कि अगले 24 घंटों के दौरान दक्षिण बंगाल की खाड़ी, अंडमान सागर तथा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के कुछ हिस्सों में मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं

यूपी, हरियाणा-पंजाब में सबसे ज्यादा असर


शक्तिशाली अल नीनो का सबसे अधिक उत्तर और मध्य भारत पर प्रभाव पड़ने की आशंका है। पश्चिम भारत के कुछ हिस्से भी प्रभावित हो सकते हैं। इनमें पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे कृषि प्रधान राज्यों पर बुरा असर पड़ सकता है। दिल्ली-एनसीआर के लिए गर्मी और सूखे के दोहरे संकट का सामना करना पड़ सकता है।

  • मानसूनी बारिश कम होने से प्रमुख फसलों को नुकसान हो सकता है। इससे खाद्य पदार्थों की कीमतों, बिजली आपूर्ति और ग्रामीण आय पर दबाव बढ़ सकता है। भारत की वार्षिक वर्षा का लगभग 70 फीसदी मानसून से आता है और लगभग आधी आबादी कृषि पर निर्भर है, ऐसे में कम बारिश वाला वर्ष भी व्यापक आर्थिक प्रभाव डाल सकता है।

अल नीनो के कारण बारिश में कमी

भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार, अल नीनो तेजी से आकार ले रहा है। भारत के लिए अल नीनो हमेशा से ही खराब रहा है। इस बार मजबूत अल नीनो बन रहा है, जिसका भयावह परिणाम हो सकता है। मजबूत अल नीनो दक्षिण पश्चिम मानसून की हवाओं को कमजोर कर देता है। इसका नतीजा यह होता है कि देश के अधिकांश हिस्से में बारिश कम होती है और सूखे जैसे हालात पैदा हो जाता हैं। इस बार उत्तर और मध्य भारत में कुछ ऐसी ही स्थिति की आशंका है।

दूसरी तरफ, तमिनलाडु, आंध्र प्रदेश जैसे तटीय राज्यों में तबाही वाली बढ़ आ सकती है। आईएमडी के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून इस बार सामान्य तिथि से करीब चार दिन पहले, यानी 26 मई के आसपास केरल तट पर दस्तक दे सकता है। शनिवार को यह दक्षिण बंगाल की खाड़ी, अंडमान सागर और अंडमान- निकोबार द्वीप समूह के कुछ हिस्सों में और आगे बढ़ा है। इसके आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं।

देश में मानसून के महीनों में लगभग 80 सेंटीमीटर बारिश होने की संभावना है, जबकि 1971-2020 की दीर्घकालिक औसत मौसमी बारिश 87 सेंटीमीटर रही है। आईएमडी के मुताबिक इसका कारण अल नीनो परिस्थितियों का विकसित होना हो सकता है, जिसके चलते देश में बारिश कम होती है। मौसम विभाग ने एक मई को जारी अपने महीने के पूर्वानुमान में कहा था कि भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में अल नीनो-साउदर्न ओसिलेशन (ईएनएसओ) की तटस्थ परिस्थितियां धीरे-धीरे अल नीनो की स्थिति की ओर बढ़ रही हैं।

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