हरियाणा में किसान की बेटी समायरा ने रचा इतिहास, कड़ी मेहनत से NEET में 643 अंक लाकर लहराया परचम

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हरियाणा में किसान की बेटी समायरा ने रचा इतिहास, कड़ी मेहनत से NEET में 643 अंक लाकर लहराया परचम 

Udaipur Times, Haryana News, Sirsa News : कहते है की मेहनत करने वालों की कभी भी हार नहीं होती है जो मेहनत करना जानते है वो एक न एक दिन सफल जरुर होते है। आज हम ऐसी ही कड़ी मेहनत कर अपने परिवार और अपने क्षेत्र का नाम रोशन करने वाली सिरसा जिले की बेटी समायरा की बात करने वाले है, जिस बेटी ने अपनि कड़ी मेहनत से परिवार-क्षेत्र का नाम रोशन किया है। 

हरियाणा में सिरसा जिले के गांव मोहम्मदपुरिया की बेटी समायरा ने अपनी शानदार सफलता से साबित कर दिया है की जो मेहनत करना जानते है सफलता उनके कदम खुद चूमती है। साधारण किसान परिवार से आने वाली समायरा ने NEET यूजी 2026 में 643 अंक प्राप्त कर ऑल इंडिया रैंक 1963 हासिल की है। इस उपलब्धि के बाद पूरे गांव में खुशी का माहौल है और हर कोई इस होनहार बेटी की सफलता पर गर्व महसूस कर रहा है।

समायरा के पिता राजेश कुमार और माता सुमन खेती-बाड़ी से जुड़े हुए हैं। परिवार ने हमेशा शिक्षा को प्राथमिकता दी और बेटी के सपनों को साकार करने के लिए हर संभव प्रयास किया। ग्रामीण परिवेश में रहते हुए भी समायरा ने अपने लक्ष्य से कभी समझौता नहीं किया। नियमित अध्ययन, अनुशासित दिनचर्या और कठिन मेहनत के दम पर उन्होंने देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक में उल्लेखनीय सफलता हासिल की।

समायरा के दादा कृष्ण देवकरण कड़वासरा भी इस उपलब्धि से बेहद उत्साहित हैं। परिवार का कहना है कि समायरा बचपन से ही पढ़ाई के प्रति गंभीर रही हैं और डॉक्टर बनने का सपना लंबे समय से देख रही थीं। अब उनकी मेहनत रंग लाई है और उनका सपना साकार होने की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ चुका है।

गांव मोहम्मदपुरिया में जैसे ही परिणाम की जानकारी पहुंची, बधाई देने वालों का तांता लग गया। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि समायरा ने यह साबित कर दिया कि यदि परिवार का सहयोग और स्वयं का समर्पण हो तो गांवों के बच्चे भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं।

हरियाणा में किसान की बेटी समायरा ने रचा इतिहास

अब समायरा का लक्ष्य एक कुशल और संवेदनशील डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करना है। उनका मानना है कि चिकित्सा केवल एक पेशा नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का सबसे बड़ा माध्यम है। भविष्य में वह ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम करना चाहती हैं।

समायरा की इस उपलब्धि ने सिरसा जिले का गौरव बढ़ाया है। यह सफलता न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे मोहम्मदपुरिया गांव और क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है। आज गांव की बेटियां उन्हें अपनी प्रेरणा मान रही हैं और अभिभावकों में भी शिक्षा के प्रति नई जागरूकता देखने को मिल रही है।

समायरा आने वाले समय में जब वह डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करेंगी, तब यह उपलब्धि और भी अधिक प्रेरणादायक बन जाएगी। सिरसा सहित पूरे क्षेत्र को इस होनहार बेटी पर गर्व है।

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