अगले तीन माह मेें झाड़ोल मातियाबिंद रहित क्षेत्र घोषित होगा
अलख नयन मंदिर के मेडीकल डायरेक्टर डॉ. एल.एस.झाला ने कहा कि देश में कुल जनसंख्या की एक प्रतिशत जनता आज भी अंधता के अभिशाप से ग्रसित है और उसमें सर्वाधिक अंधता राजस्थान,

अलख नयन मंदिर के मेडीकल डायरेक्टर डॉ. एल.एस.झाला ने कहा कि देश में कुल जनसंख्या की एक प्रतिशत जनता आज भी अंधता के अभिशाप से ग्रसित है और उसमें सर्वाधिक अंधता राजस्थान, उत्तरप्रदेश एंव बिहार में है, उनमें से भी आधा प्रतिशत अधिक जनता राजस्थान में अंधता से ग्रसित है और दुख की बात यह है कि जिसमें दक्षिणी राजस्थान सबसे अव्वल है।
उन्होंने कहा कि अलख नयन मंदिर द्वारा इस वर्ष पंाच गांव गोद लेकर वहंा अंधता निवारण हेतु शिविर लगा कर मोतियाबिरद से ग्रसित लोगों की रोशनी में वृद्धि करने का प्रयास किया जाएगा। पिछले कुछ वर्षो से अलख नयन मंदिर सुदूर ग्रामीण इलाकों मुख्यतया झाड़ोल में पिदले कुछ वर्षो से किये जा रहे अंधता निवारण हेतु मोतियाबिंद के किये जा रहे ऑपरेशन के कारण आगामी 2-3 माह में इस क्षेत्र को पूर्णतया मोतियाबिंदरहित क्षेत्र घोषित कर दिया जाएगा।
डॉ. झाला ने बताया कि संभाग में संस्थान द्वारा वर्ष 2014-15 में संभाग के सभी जिलों के ग्रामीण इलाकों में किये मुख्य चिकित्सा एंव स्वास्थ्य अधिकारी संजीव टांक,आशा सहयोगिनी एंव आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के सहयोग से मोतियाबिंद के कुल 6756 ऑपरेशन किये गये जिसमें 4000 से अधिक ऑपेरशन नि:शुल्क थे। इतनी संख्या में नि:शुल्क ऑपरेशन करने वाला संभाग का यह एक मात्र नेत्र संस्थान है। सभी रोगियों के लैंस प्रत्यारोपित किये गये।
संस्थान की कार्यकारी ट्रस्टी डॉ. लक्ष्मी झाला ने बताया कि इस संभाग में इतनी संख्या में अंधता के रोगी पाये जाने के पीछे मुख्य कारण अॅापरेशन के प्रति डर, गरीबी, शिक्षा का अभाव रहा है। संस्थान द्वारा गत सत्र में 4207 स्कूली बच्चों का नि:शुल्क नेत्र परीक्षण किया गया। नये वित्तिय वर्ष में संस्थान ने 10 हजार स्कूली बच्चों के नि:शुल्क नेत्र परीक्षण करने का लक्ष्य रखा है।
श्रीमती डॉ. झाला ने बताया कि संस्थान ने झाड़ोल, फलासिया,सीमलवाड़ा,बड़ीसादड़ी, धरियावद डूंगरपुर के गांवों की तहसीलों पर में सहयोगी केन्द्र के रूप में प्राथमिक नेत्र चिकित्सा इकाईयों की स्थापना कर जमीनी स्तर तक नेत्र रोगियों तक पंहुच कर उनका ईलाज किया जाएगा। इन चिकित्सा इकाईयों की स्थापना कर न केवल स्थनाीय लोगों को रोजगार मुहैया कराया है वरन् उन्हें प्राथमिक नेत्र चिकित्सा करने का प्राथमिक परीक्षण का प्रशिक्षण भी दिया है।