मेट्रो के दूसरे चरण में सेक्टर 9 से साइबर सिटी तक के रूट को मिली मंजूरी, दिल्ली मेट्रो से जुड़ेगा पुराना गुड़गांव
Udaipur Times, Old Gurugram Metro Corridor : हरियाणा सरकार ने गुरुग्राम मेट्रो प्रोजेक्ट के दूसरे चरण (Phase 2) में सिविल कंस्ट्रक्शन के काम के प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी है, जिससे लंबे समय से अटकी टेंडर प्रक्रिया शुरू होने के करीब आ गई है। उम्मीद है कि गुरुग्राम मेट्रो रेल लिमिटेड (GMRL) अक्टूबर के पहले हफ़्ते में 1,662 करोड़ रुपये के सिविल कंस्ट्रक्शन पैकेज के लिए बोलियां (bids) मंगाएगी। इस पैकेज में सेक्टर 9 और साइबर सिटी के बीच 14.5 किलोमीटर का हिस्सा शामिल होगा, जिसमें 14 स्टेशन बनाने की योजना है।
यह मंज़ूरी तब मिली है जब दूसरे चरण का टेंडर लगभग दो महीने से अटका हुआ था। इस देरी से चिंता बढ़ गई थी कि क्या पूरा मिलेनियम सिटी सेंटर-साइबर सिटी कॉरिडोर 2029 के लक्ष्य तक तैयार हो पाएगा या नहीं।
दूसरे चरण में क्या-क्या शामिल होगा?
सेक्टर 9-साइबर सिटी सेक्शन पुराने गुरुग्राम के कई इलाकों को उद्योग विहार और साइबर सिटी जैसे बड़े रोज़गार केंद्रों से जोड़ेगा। उम्मीद है कि यह रूट सेक्टर 7, 4, 5 और 3, अशोक विहार, बाजघेरा रोड, पालम विहार एक्सटेंशन, पालम विहार, सेक्टर 23A और सेक्टर 22 जैसे इलाकों से होकर गुजरेगा।
सिविल पैकेज में दो खास स्ट्रक्चर भी शामिल होंगे जिन्हें इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि एलिवेटेड मेट्रो लाइन व्यस्त सड़कों को पार कर सके और नीचे का ट्रैफ़िक पूरी तरह से न रुके।
एक स्ट्रक्चर ओल्ड दिल्ली रोड के साथ लगभग 1.2 किलोमीटर तक बनेगा, जबकि दूसरा बाजघेरा रोड पर लगभग 800 मीटर तक होगा। ये दोनों मिलकर लगभग 2 किलोमीटर तक फैले होंगे और इन्हें गुरुग्राम मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMDA) के लिए 'डिपॉज़िट वर्क' के तौर पर विकसित किया जाएगा।
पहले चरण का काम पहले से ही जारी
यह बड़ा मेट्रो कॉरिडोर दो चरणों में बनाया जा रहा है। पहला चरण, जिसमें मिलेनियम सिटी सेंटर से सेक्टर 9 तक लगभग 15.3 किलोमीटर का हिस्सा शामिल है, उस पर पहले से ही काम चल रहा है। इसका सिविल कॉन्ट्रैक्ट पिछले साल अगस्त में दिया गया था और इस सेक्शन को 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
GMRL ने एलिवेटेड ट्रैक के लिए यू-गर्डर (U-girders) जोड़ने का काम शुरू कर दिया है। पहले सेक्शन पर पाइलिंग और वायडक्ट (viaduct) से जुड़े अन्य कामों सहित कंस्ट्रक्शन का काम तेज़ी से चल रहा है। हालांकि, दूसरा चरण बहुत अहम माना जाता है क्योंकि प्रोजेक्ट का पूरा फ़ायदा तभी मिलेगा जब सेक्टर 9-साइबर सिटी सेक्शन भी पूरा हो जाएगा।
टेंडर में देरी क्यों हुई
प्रोजेक्ट की फ़ाइनेंसिंग व्यवस्था में बदलाव के कारण दूसरे चरण के टेंडर की अतिरिक्त जांच-पड़ताल हुई। मेट्रो प्रोजेक्ट के पहले हिस्से के लिए ज़्यादातर सरकारी संसाधनों से फ़ंडिंग हो रही थी, जबकि बाद वाले हिस्से के लिए अंतरराष्ट्रीय लेंडर्स से मदद की ज़रूरत थी। यूरोपियन इन्वेस्टमेंट बैंक पहले फ़ाइनेंसिंग प्रक्रिया का हिस्सा था, लेकिन बाद में हट गया। इसके बाद जर्मनी के सरकारी डेवलपमेंट बैंक KfW को इस व्यवस्था में शामिल किया गया, और फिर वर्ल्ड बैंक ने टेंडर डॉक्यूमेंट्स की जांच की। वर्ल्ड बैंक ने जुलाई के आखिर में टेंडर डॉक्यूमेंट्स की समीक्षा पूरी की। इसके बाद GMRL ने मंज़ूरी के लिए हरियाणा सरकार को प्रस्ताव भेजा।
2029 की डेडलाइन अहम बनी
हालांकि राज्य की मंज़ूरी से एक बड़ी बाधा दूर हो गई है, लेकिन समय-सीमा अभी भी बहुत कम है। अधिकारियों का अनुमान है कि टेंडर प्रक्रिया में ही कम से कम चार महीने लग सकते हैं। इसके बाद कंस्ट्रक्शन में लगभग ढाई साल लग सकते हैं, और फिर ट्रैक, सिग्नलिंग, ट्रैक्शन सिस्टम और ट्रेनों की टेस्टिंग और कमीशनिंग होगी। अगर पूरे कॉरिडोर को 2029 के टारगेट तक पूरा करना है, तो आगे और देरी की गुंजाइश बहुत कम है। इस प्रोजेक्ट की निगरानी केंद्रीय स्तर पर भी की जा रही है। सितंबर में, अधिकारियों ने हाई-लेवल इंफ्रास्ट्रक्चर मॉनिटरिंग के तहत मेट्रो प्रोजेक्ट की समीक्षा की और अधिकारियों को काम में तेज़ी लाने का निर्देश दिया।
1. मिलेनियम सिटी सेंटर गुरुग्राम (येलो लाइन)
ओल्ड गुरुग्राम मेट्रो का पहला स्टेशन, दिल्ली मेट्रो के मौजूदा मिलेनियम सिटी सेंटर स्टेशन से 100 मीटर की दूरी पर है। ये दोनों स्टेशन सीधे जुड़े होंगे। समयपुर बादली, राजीव चौक या कुतुब मीनार से आने वाले यात्री स्टेशन से बाहर निकले बिना ही ओल्ड गुरुग्राम मेट्रो में चढ़ सकेंगे।
2. साइबर सिटी: रैपिड मेट्रो और येलो लाइन कनेक्शन
फेज़-2 मेट्रो कॉरिडोर का आखिरी स्टेशन साइबर सिटी रैपिड मेट्रो गुरुग्राम से जुड़ता है। ओल्ड गुरुग्राम मेट्रो (फेज़-2) का आखिरी स्टेशन, साइबर सिटी रैपिड मेट्रो के मौजूदा स्टेशन से जुड़ेगा। यहाँ से यात्री रैपिड मेट्रो लेकर सिकंदरपुर इंटरचेंज स्टेशन पहुंच सकते हैं और आसानी से दिल्ली मेट्रो की येलो लाइन पर जा सकते हैं।
3. पालम विहार: ब्लू लाइन और एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन
हरियाणा सरकार ने पालम विहार (रेज़ांग ला चौक) को दिल्ली के द्वारका सेक्टर-21 से जोड़ने वाले 8.4 किलोमीटर लंबे स्पेशल मेट्रो लिंक को मंज़ूरी दी है। यह लिंक दिल्ली मेट्रो की ब्लू लाइन और एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन, दोनों से जुड़ेगा। पालम विहार से शुरूहोने वाला यह स्पेशल रूट सीधे दिल्ली के द्वारका सेक्टर-21 स्टेशन से जुड़ेगा। इससे ओल्ड गुरुग्राम के निवासियों को दिल्ली मेट्रो की ब्लू लाइन (द्वारका, कीर्ति नगर, राजीव चौक और नोएडा की ओर) तक पहुंच मिलेगी और एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन के ज़रिए इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (T3) के लिए सीधी कनेक्टिविटी भी मिलेगी।
गुरुग्राम मेट्रो प्रोजेक्ट: मुख्य जानकारी
मिलेनियम सिटी सेंटर-साइबर सिटी कॉरिडोर 28.5 किलोमीटर लंबा है और इसे जून 2023 में केंद्र सरकार ने मंज़ूरी दी थी। शुरुआती अनुमानित लागत लगभग 5,452 करोड़ रुपये थी, और इस लाइन को एलिवेटेड कॉरिडोर के तौर पर बनाने की योजना थी। बाद में हरियाणा सरकार ने प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत को संशोधित करके 8,500 करोड़ रुपये कर दिया और सेक्टर 5 को गुरुग्राम रेलवे स्टेशन से जोड़ने वाले अतिरिक्त 1.8 किलोमीटर के स्पर (छोटी लाइन) को मंजूरी दी। इस प्रोजेक्ट में द्वारका एक्सप्रेसवे की ओर एक कनेक्शन भी शामिल है।
उम्मीद है कि नया मेट्रो कॉरिडोर पुराने गुरुग्राम के रिहायशी इलाकों और शहर के मुख्य बिज़नेस डिस्ट्रिक्ट्स के बीच पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बेहतर बनाएगा। 2017 के बाद से गुरुग्राम में मौजूदा मेट्रो नेटवर्क का कोई बड़ा विस्तार नहीं हुआ है। इसलिए, मिलेनियम सिटी सेंटर, ओल्ड गुरुग्राम, उद्योग विहार और साइबर सिटी के बीच योजनाबद्ध सीधा कनेक्शन बनाने के लिए दोनों चरणों का पूरा होना महत्वपूर्ण होगा।