अब ट्रेन की छत बनाएगी बिजली, भारतीय रेलवे ने शुरू किया ये नया सोलर सिस्टम
Udaipur Times, Railway Solar-Assisted Coach : बीते दिनों ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा में भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन (Hydrogen Train) को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस बड़ी सफलता के बाद अब भारतीय रेलवे ट्रेनों को अधिक पर्यावरण अनुकूल बनाने और कार्बन उत्सर्जन कम करने की दिशा में एक नई पहल शुरू कर दी है।
इसके तहत एक कोच की छत पर सोलर पैनल (Solar panel) लगाकर परीक्षण किया जा रहा है। यदि यह ट्रायल सफल रहता है, तो भविष्य में देशभर की ट्रेनों की छतों पर सोलर पैनल लगाए जा सकते हैं, जिससे उनकी बिजली की जरूरत का बड़ा हिस्सा सौर ऊर्जा से पूरा होगा।
ऐसे काम करती है नई तकनीक
इस ट्रायल के तहत कोच की छत पर फोटोवोल्टिक (PV) सोलर पैनल लगाए गए हैं, जो 7 किलोवाट पीक (7 kWp) तक बिजली पैदा करने में सक्षम हैं। यह नई तकनीक मौजूदा विद्युत प्रणाली को हटाने के बजाय उसके साथ मिलकर काम करती है। सोलर पैनलों (Solar panel) से बनने वाली बिजली लगातार ट्रेन के बैटरी बैंक को चार्ज करती रहती है। यही बैटरी कोच के अंदर लगी लाइट, पंखे और मोबाइल चार्जिंग सॉकेट जैसे उपकरणों को बिजली उपलब्ध कराती है।
सामान्य कोच से कैसे अलग है?
सामान्य रेल कोच में बिजली एक्सल-ड्रिवन अल्टरनेटर से बनती है, जो तभी काम करता है जब ट्रेन के पहिए घूमते हैं। यानी ट्रेन चलने पर ही बिजली का उत्पादन होता है। इसके विपरीत, सोलर पैनल (Solar panel) वाले कोच में ट्रेन के स्टेशन या यार्ड में खड़ी रहने के दौरान भी बिजली बनती रहती है।
इससे बैटरियां लगातार चार्ज होती रहती हैं और कोच के भीतर बिजली की कमी नहीं होती। यह तकनीक ऊर्जा की बचत के साथ-साथ रेलवे के कार्बन फुटप्रिंट को कम करने में भी अहम भूमिका निभा सकती है।
