हरियाणा में चलेगी देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन, जींद से सोनीपत के बीच होगा ट्रेन का रूट
Udaipur Times,Hydrogen Train: हरियाणा वासियों के लिए अच्छी खबर सामने आई है। PM मोदी 17 जुलाई को हरियाणा के जींद में देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन ( Hydrogen Train ) को हरी झंडी दिखाएंगे। प्रधानमंत्री के जींद आगमन को लेकर हरियाणा सरकार पूरी तरह से सक्रिय है। जानकारी के अनुसार पता चला है कि हरियाणा के मुख्य सचिव ने शुक्रवार को दो IAS और चार HCS अधिकारियों को जींद में तैनात किया है। इसके अलावा हरियाणा सरकार में मंत्री कृष्ण कुमार बेदी ने बताया कि PM मोदी हरियाणा में कई अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का भी उद्घाटन करेंगे।
मिली जानकारी के अनुसार, देश में हाइड्रोजन से चलने वाली पहली ट्रेन जींद और सोनीपत के बीच 89 किलोमीटर की दूरी दो घंटे में तय करेगी और इसी बीच 12 स्टेशनों पर रुकेगी। रेलवे बोर्ड के एक आधिकारिक संदेश के अनुसार, हाइड्रोजन ट्रेन नंबर 74010 सुबह 7.40 बजे जींद रेलवे स्टेशन से रवाना होगी और सुबह 9.40 बजे सोनीपत पहुंचेगी।
रेलवे के अनुसार, हाइड्रोजन ट्रेन बीच में पड़ने वाले 12 स्टेशनों पर रुकेगी। इनमें जींद सिटी, पांडु पिंडारा, ललित खेड़ा, भम्बेवा, ईशापुर खेड़ी, बुटाना, खंदराई, गोहाना, रभड़ा, लाठ, मोहना और बड़वासनी शामिल हैं। वापसी की यात्रा में ट्रेन नंबर 74009 सोनीपत से सुबह 10.40 बजे चलेगी और दोपहर 1.00 बजे जींद पहुँचेगी।
जानकारी के मुताबिक, जींद-सोनीपत सेक्शन के लिए प्रस्तावित हाइड्रोजन फ्यूल सेल-बेस्ड ट्रेन 10-कोच वाली होगी। जिसकी अधिकतम स्पीड 75 किमी प्रति घंटा होगी। यह 1,200 KW के हाइड्रोजन फ्यूल सेल प्रोपल्शन सिस्टम से चलेगी। इस ट्रेन को पूरी तरह से भारत में डिजाइन और डेवलप किया गया है। ब्रॉड गेज प्लेटफॉर्म पर बनी यह ट्रेन 10 कोच के साथ दुनिया की सबसे लंबी हाइड्रोजन-पावर्ड ट्रेन है।
खबरों की माने तो इस प्रोजेक्ट के लिए हरियाणा में जींद-सोनीपत रूट को पायलट कॉरिडोर के तौर पर चुना गया है। ऑपरेशन को सपोर्ट करने के लिए जींद में एक स्वदेशी हाइड्रोजन स्टोरेज और रीफ्यूलिंग सुविधा बनाई गई है। पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गनाइज़ेशन (PESO) ने इस सुविधा केंद्र पर कंप्रेस्ड हाइड्रोजन गैस के स्टोरेज और वितरण के लिए जरूरी लाइसेंस जारी कर दिया है। रीफ्यूलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में हाइड्रोजन कम्प्रेशन सिस्टम के साथ-साथ जरूरी टेक्निकल सपोर्ट और अहम स्पेयर पार्ट्स शामिल हैं, ताकि भरोसेमंद और सुरक्षित ऑपरेशन सुनिश्चित किया जा सके। एक स्टैंडबाय कम्प्रेशर यूनिट भी उपलब्ध कराई जा रही है।
दुनिया भर में हाइड्रोजन-पावर्ड रेल ट्रांसपोर्ट को सस्टेनेबल मोबिलिटी के लिए एक बेहतर विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। इस पहल के साथ भारत जर्मनी, जापान, चीन और अमेरिका जैसे उन चुनिंदा देशों के समूह में शामिल हो जाएगा जो हाइड्रोजन-आधारित रेल ट्रांसपोर्ट पर काम कर रहे हैं।
