यहां लगेगा भारत का सबसे बड़ा एल्युमिनियम प्लांट, 1 लाख करोड़ के निवेश से 53 हजार लोगों को मिलेगा रोजगार
Udaipur Times, Adani-IHC to Invest 1.08 Lakh Rupees Crore in Aluminium Project : Adani Group ने मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में बड़ा दांव खेलते हुए पहली बार एल्युमिनियम कारोबार में उतरने का ऐलान किया है। समूह की प्रमुख कंपनी Adani Enterprises ने अबू धाबी की International Holding Company (IHC) की माइनिंग शाखा International Resources Holding (IRH) के साथ मिलकर ओडिशा में 1.08 लाख करोड़ रुपये (11.5 अरब डॉलर) का इंटीग्रेटेड एल्युमिनियम कॉम्प्लेक्स स्थापित करने का फैसला किया है। यह भारत के मेटल सेक्टर में अब तक के सबसे बड़े प्रस्तावित विदेशी निवेश (FDI) वाले प्रोजेक्ट्स में से एक माना जा रहा है।
दो चरणों में होगा निवेश
इस परियोजना के लिए Adani Enterprises और IRH ने ओडिशा सरकार के साथ एमओयू (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। कुल 1.08 लाख करोड़ रुपये का निवेश दो चरणों में किया जाएगा।
पहला चरण: 66,000 करोड़ रुपये
दूसरा चरण: 44,000 करोड़ रुपये
कंपनी के अनुसार, जमीन अधिग्रहण, पर्यावरण मंजूरी और अन्य सरकारी अनुमतियों में 12 से 18 महीने लग सकते हैं। इसके बाद प्लांट का निर्माण पूरा होने में करीब 3.5 वर्ष का समय लगेगा।
क्या-क्या बनेगा इस मेगा प्रोजेक्ट में?
यह सिर्फ एक एल्युमिनियम प्लांट नहीं होगा, बल्कि पूरी इंटीग्रेटेड एल्युमिनियम मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम विकसित की जाएगी। इसमें शामिल होंगे—
4 MMTPA क्षमता की एल्युमिना रिफाइनरी
2 MMTPA क्षमता का एल्युमिनियम स्मेल्टर
4,000 मेगावाट का कैप्टिव पावर प्लांट
1 MMTPA डाउनस्ट्रीम एल्युमिनियम मैन्युफैक्चरिंग पार्क
400 मेगावाट ग्रीन एनर्जी क्षमता
डाउनस्ट्रीम पार्क में ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिकल उपकरण, पैकेजिंग, निर्माण सामग्री और इंजीनियरिंग उत्पाद बनाने वाली कई एमएसएमई (MSME) इकाइयों को भी बढ़ावा मिलेगा।
53,500 से ज्यादा रोजगार मिलेंगे
इस मेगा प्रोजेक्ट से ओडिशा में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। अनुमान है कि निर्माण के दौरान करीब 35,000 लोगों को रोजगार मिलेगा, जबकि प्लांट शुरू होने के बाद 18,500 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। यानी कुल मिलाकर 53,500 से अधिक रोजगार सृजित होने की उम्मीद है।
ओडिशा को ही क्यों चुना गया?
ओडिशा में एल्युमिनियम उत्पादन के लिए जरूरी बॉक्साइट समेत कई खनिज प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं। इसके अलावा कोयला, लौह अयस्क, बेहतर बंदरगाह कनेक्टिविटी और उद्योगों के अनुकूल नीतियां भी राज्य को इस निवेश के लिए उपयुक्त बनाती हैं।
भारत के लिए क्यों अहम है यह प्रोजेक्ट?
यह परियोजना भारत में एल्युमिनियम की पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करेगी। इससे देश में एल्युमिना रिफाइनिंग, स्मेल्टिंग और वैल्यू-एडेड एल्युमिनियम उत्पादों का घरेलू उत्पादन बढ़ेगा। साथ ही आयात पर निर्भरता कम होगी और इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV), रिन्यूएबल एनर्जी, पावर ट्रांसमिशन, डिफेंस और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे तेजी से बढ़ते सेक्टरों को भी इसका फायदा मिलेगा।
यह परियोजना 'मेक इन इंडिया' (Make In India) और 'विकसित भारत 2047' (Viksit Bharat 2047) के विजन को भी मजबूती देगी।
भारत-UAE साझेदारी को मिलेगा बल
यह प्रोजेक्ट Adani Group और IHC के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी का भी हिस्सा है। इससे पहले वर्ष 2026 में IHC समर्थित ePointZero ने Adani Green Energy के साथ नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) क्षेत्र में साझेदारी की थी। अब एल्युमिनियम सेक्टर में यह संयुक्त निवेश दोनों कंपनियों के रिश्तों को नई ऊंचाई देगा।
