मोबाइल इंडस्ट्री में भारत का मेगा प्लान ! 62500 करोड़ रुपये की इंसेंटिव स्कीम की शुरुआत से बढ़ेगा उत्पादन

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मोबाइल इंडस्ट्री में भारत का मेगा प्लान ! 62500 करोड़ रुपये की इंसेंटिव स्कीम की शुरुआत से बढ़ेगा उत्पादन 

Udaipur Times, New Delhi : भारत अब सिर्फ मोबाइल फोन के निर्यात में ही नहीं, बल्कि मोबाइल फोन निर्माण और भारतीय ब्रांड तैयार करने के क्षेत्र में भी वैश्विक ताकत बनने की तैयारी कर रहा है। आपको बतादें कि केंद्र सरकार ने मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए रु 62,500 करोड़ की नई इंसेंटिव स्कीम लॉन्च की है। पांच साल की इस योजना का लक्ष्य देश में बड़े पैमाने पर मोबाइल उत्पादन बढ़ाने के साथ भारतीय डिजाइन और भारतीय बौद्धिक संपदा (IP) वाले ब्रांड को वैश्विक बाजार तक पहुंचाना है।

पांच साल में रु 39 लाख करोड़ के उत्पादन का रखा है लक्ष्य

यह नई योजना वित्त वर्ष 2026-27 से लागू होगी और इसकी अवधि पांच साल रखी गई है। सरकार के मुताबिक, योजना के तहत पांच वर्षों में करीब रु 39 लाख करोड़ के मोबाइल फोन का उत्पादन होने का अनुमान है। इनमें से करीब रु 15 लाख करोड़ के मोबाइल फोन निर्यात किए जाने का लक्ष्य रखा गया है।

योजना से करीब 60,000 प्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने की उम्मीद है। सरकार का फोकस केवल विदेशी कंपनियों के लिए भारत को मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि देश से ऐसे मोबाइल ब्रांड तैयार करने पर है जिनकी डिजाइन और तकनीक का मालिकाना हक भी भारतीय कंपनियों के पास हो।

इस योजना से भारतीय कंपनियों को मिलेगा ज्यादा इंसेंटिव

नई स्कीम में भारतीय और विदेशी कंपनियों के लिए अलग-अलग प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है।

पिछले वित्त वर्ष में रु 10,000 करोड़ का कारोबार करने वाली भारत में पंजीकृत मोबाइल फोन निर्माता कंपनियां इस योजना के लिए पात्र होंगी। हालांकि, विदेशी मूल की कंपनियों को इंसेंटिव पाने के लिए पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले कम से कम रु 5,000 करोड़ अतिरिक्त बिक्री का लक्ष्य हासिल करना होगा।

वहीं, शुद्ध रूप से भारतीय कंपनियों के लिए नियम अपेक्षाकृत आसान रखे गए हैं। रु 1,000 करोड़ का कारोबार करने वाली पात्र भारतीय कंपनियों के लिए कोई अतिरिक्त बिक्री लक्ष्य नहीं रखा गया है।

भारतीय ब्रांड, डिजाइन और IP पर सरकार का जोर

सरकार इस बार सिर्फ असेंबलिंग और उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान नहीं दे रही है। योजना का बड़ा उद्देश्य भारतीय डिजाइन और भारतीय IP वाले मोबाइल ब्रांड विकसित करना है।

इसके लिए मोबाइल का ब्रांड भारत में पंजीकृत होना चाहिए और उसके ट्रेडमार्क तथा बौद्धिक संपदा अधिकार भारत में होने चाहिए। कंपनी की प्रबंधन समिति में भारतीय नागरिकों की भूमिका भी जरूरी होगी।

इसके अलावा फोन की डिजाइनिंग और रिसर्च एवं डेवलपमेंट भी भारत में होने पर जोर दिया गया है।

भारतीय कंपनियों को मिलेगा 5% तक इंसेंटिव

इंसेंटिव के मामले में भी भारतीय कंपनियों को प्राथमिकता दी गई है। पात्र भारतीय कंपनियों को बिक्री पर 5 प्रतिशत तक इंसेंटिव दिया जाएगा।

दूसरी कंपनियों के लिए यह दर अलग होगी। निर्धारित बिक्री सीमा से ऊपर की बिक्री पर पहले दो वित्त वर्षों में 2.75 प्रतिशत, अगले दो वर्षों में 2.5 प्रतिशत और अंतिम वर्ष में 2.25 प्रतिशत इंसेंटिव का प्रावधान है।

मोबाइल ब्रेंड तैयार करना है सरकार का उद्देश्य

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, यह योजना मौजूदा PLI स्कीम से अलग है क्योंकि इसमें घरेलू कंपनियों के लिए विशेष इंसेंटिव का प्रावधान किया गया है।

सरकार का उद्देश्य ऐसे भारतीय मोबाइल ब्रांड तैयार करना है जिनकी पहचान केवल भारत तक सीमित न रहे, बल्कि वे वैश्विक बाजार में भी प्रतिस्पर्धा कर सकें।

सरकार के अनुसार, फिलहाल तीन भारतीय कंपनियां मोबाइल फोन डिजाइन करने पर काम कर रही हैं। इनमें इकोनॉमी, प्रीमियम और सुपर-प्रीमियम सेगमेंट के लिए अलग-अलग डिजाइन तैयार किए जा रहे हैं। क्योंकि भारत में मोबाइल फोन का निर्माण बड़े पैमाने पर हो रहा है, लेकिन बाजार में अभी भी विदेशी मूल की कंपनियों का दबदबा है। Apple, Samsung, Xiaomi, Vivo और Oppo जैसी कंपनियां भारत में बड़े स्तर पर फोन का निर्माण कर रही हैं।

अब सरकार चाहती है कि भारत केवल इन कंपनियों के लिए मैन्युफैक्चरिंग बेस न रहे, बल्कि यहां से अपने वैश्विक स्तर के मोबाइल ब्रांड भी निकलें।

मोबाइल से आगे दूसरे सेक्टर को भी फायदा इस योजना का असर केवल स्मार्टफोन उद्योग तक सीमित रहने की उम्मीद नहीं है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी सचिव एस. कृष्णन के मुताबिक, भारतीय कंपनियों के मोबाइल निर्माण क्षेत्र में आगे बढ़ने से कई दूसरे 

इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को भी फायदा मिल सकता है।

इससे लैपटॉप, पावर टूल्स, ई-बाइक, ड्रोन, मेडिकल डिवाइस, पावर बैंक, LED डिस्प्ले और मल्टी-कैमरा मॉड्यूल जैसी तकनीकों में स्किल और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को बढ़ावा मिल सकता है।

मोबाइल निर्यात के बाद अब निर्माण में विश्वस्तरीय बनने की तैयारी

भारत ने मोबाइल फोन निर्यात के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल करने के बाद अब अगला लक्ष्य मैन्युफैक्चरिंग और भारतीय ब्रांड को मजबूत करना रखा है।

रु62,500 करोड़ की यह योजना इसी रणनीति का हिस्सा है।

अगर योजना के लक्ष्य हासिल होते हैं, तो आने वाले पांच वर्षों में भारत में मोबाइल निर्माण का पैमाना कई गुना बढ़ने के साथ-साथ भारतीय डिजाइन, भारतीय IP और भारतीय ब्रांड भी वैश्विक बाजार में अपनी जगह बना सकते हैं।

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