रंगमंचीय कलाओं की प्रस्तुति को सशक्त करने की पहल
पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र द्वारा रंगमंचीय तथा लोक कलाओं के प्रस्तुतिकरण को सशक्त और प्रभावी बनाने की दिशा में एक पहल बागोर की हवेली में आयोजित ‘‘सूत्रधार कार्यशाला’’ के माध्यम से की गई है। मंगलवार को प्रारम्भ हुई कार्यशाला में युवक युवतियों को रंगमंच पर कलाओं को प्रस्तुत करने के सलीके सिखाये जायेंगे।
पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र द्वारा रंगमंचीय तथा लोक कलाओं के प्रस्तुतिकरण को सशक्त और प्रभावी बनाने की दिशा में एक पहल बागोर की हवेली में आयोजित ‘‘सूत्रधार कार्यशाला’’ के माध्यम से की गई है। मंगलवार को प्रारम्भ हुई कार्यशाला में युवक युवतियों को रंगमंच पर कलाओं को प्रस्तुत करने के सलीके सिखाये जायेंगे।
बागोर की हवेली सभागार में वरिष्ठ रंगकर्मी विलास जानवे के सानिध्य में आयोजित इस कार्यशाला में एंकरिंग करने वालों को लोक कला, शास्त्रीय कलाओं के प्रस्तुतिकरण पर कार्य प्रारम्भ हुआ है। कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर केन्द्र निदेशक श्री फुरकान ख़ान ने प्रतिभागियों को केन्द्र के आयोजन की जानकारी दी तथा कार्यशाला के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि लोक कलाओं व शास्त्रीय कलाओं को रंगमंच पर प्रस्तुत करने की तकनीक पर कार्य करने से एक ओर जहां दर्शकों को कला को समझने में सहायता मिलेगी वहीं वह कला के प्रदर्शन के दौरान उससे निरन्तर जुड़ा हुआ अनुभव करेगा।
कार्यशाला में श्री जानवे ने प्रतिभागियों को केन्द्र के आयोजन शिल्पग्राम उत्सव, लोक उत्सव तथा अन्य कार्यक्रमों में प्रस्तुतिकरण के विभिन्न पक्षों की जानकारी दी। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों की सम्प्रेषण शक्ति में अभिवृद्धि करने के साथ-साथ एक सूत्र धार में विद्यमान होने वाले गुणों की व्याख्या कर उनका महत्व समझाया। कार्यशाला मे प्रतिभागियों की प्रतिभा निखारने के लिये व्यायाम और तकनीक के प्रयोग भी किये।

