सभी धर्मों की प्रेरणा मानव श्रमविहीन न हों
श्रमणसंघीय महामत्री सौभाग्य मुनि महाराज ने कहा कि सभी धर्म मानव को श्रम विहिन नहीं होने की प्रेरणा देते है क्योंकि श्रमविहिनता के कारण भी अनेक पाप पैदा होते है। व्यक्ति यदि सही कार्यो मेें लगा रहे तो उसके मस्तिष्क में बुरी बातों के प्रवेश करने का अवसर नहीं मिलेगा।
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श्रमणसंघीय महामत्री सौभाग्य मुनि महाराज ने कहा कि सभी धर्म मानव को श्रम विहिन नहीं होने की प्रेरणा देते है क्योंकि श्रमविहिनता के कारण भी अनेक पाप पैदा होते है। व्यक्ति यदि सही कार्यो मेें लगा रहे तो उसके मस्तिष्क में बुरी बातों के प्रवेश करने का अवसर नहीं मिलेगा।
वे आज कुम्हारवाड़ा स्थित अम्बा गुरू शोध संस्थान में श्रावकों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि उपभोक्तावाद की अधिकता के कारण मानव की श्रमशक्ति का हस हुआ है। बहुत अधिक यंत्रो पर आधारित रहने के कारण भी मानव की सक्रियता में कमी आयी है।
भारत के पास अथाह मानवशक्ति है और यह विश्व में विशिष्ठ स्थान प्राप्त कर सकता है। हमें अपनी श्रमनिष्ठा को आगे बढ़ाना चाहिये। हमारें सभी धर्मो में आलस्य एवं प्रमाद को अपराध कहा है। हमारी पूरी संस्कृति श्रम पर आधारित है। सोच समझ कर सही दिशा में मानव द्वारा किया गया श्रम देश के विकास का मूल आधार है।
