सोलर सिस्टम लगवाना हुआ महंगा ! पैनल और बैटरी के दाम बढ़ने से उपभोक्ताओं को बड़ा झटका, 30 हजार रुपये तक बढ़े दाम
Solar panels have become more expensive: अगर आप बढ़ते बिजली बिल से राहत पाने के लिए घर की छत पर सोलर पैनल (Solar panels) लगाने की योजना बना रहे हैं, तो अब इसके लिए पहले से ज्यादा खर्च करना पड़ेगा। देशभर में महंगाई, कच्चे माल की बढ़ती कीमतों और नीतिगत बदलावों का असर घरेलू सोलर बाजार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। सोलर पैनलों और बैटरियों के दाम बढ़ने से रूफटॉप सोलर सिस्टम की कुल लागत में 20 से 30 हजार रुपये तक की बढ़ोतरी हो गई है।
सोलर पैनल और बैटरियों की कीमत में 7-10 प्रतिशत की बढ़ोतरी
सोलर कारोबार से जुड़े विशेषज्ञों के मुताबिक, सोलर पैनलों की कीमतों में करीब 7 प्रतिशत और बैटरियों की कीमतों में लगभग 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसका सबसे ज्यादा असर उन मध्यमवर्गीय परिवारों पर पड़ रहा है, जो बिजली बिल में बचत के लिए तीन किलोवाट क्षमता का सोलर सिस्टम लगवाना चाहते हैं।
पहले की तुलना में 20-30 हजार रुपये अधिक बढ़े
पहले 3 किलोवाट क्षमता वाले घरेलू सोलर सिस्टम की कीमत करीब 1.70 लाख से 1.80 लाख रुपये के बीच थी। अब यही सिस्टम 1.90 लाख से 2 लाख रुपये तक पहुंच गया है। यानी उपभोक्ताओं को पहले की तुलना में 20 से 30 हजार रुपये अधिक खर्च करने पड़ रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि सामान्य घरेलू जरूरतों के लिए 3 किलोवाट का सोलर सिस्टम पर्याप्त माना जाता है। हालांकि कीमतों में बढ़ोतरी के कारण अब इसे लगवाने का शुरुआती निवेश काफी बढ़ गया है, जिससे कई परिवारों का बजट प्रभावित हो रहा है।
निवेश की वसूली में भी लगेगा ज्यादा समय
सोलर सिस्टम की बढ़ी हुई लागत का असर निवेश की वापसी यानी पे-बैक पीरियड पर भी पड़ेगा। पहले बिजली बिल में होने वाली बचत के जरिए सोलर प्लांट की लागत करीब 3 से 4 साल में निकल जाती थी, लेकिन अब कीमत बढ़ने के कारण यह अवधि 1 से 2 साल तक और बढ़ सकती है।
क्यों बढ़ रहे हैं सोलर सिस्टम के दाम?
सोलर कारोबारियों के अनुसार, सोलर पैनल बनाने में इस्तेमाल होने वाले सिलिकॉन, एल्यूमीनियम और कॉपर जैसे कच्चे माल की वैश्विक कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा आयातित सोलर सेल और मॉड्यूल पर बेसिक कस्टम ड्यूटी, सरकार की एएलएमएम (ALMM) नीति और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने वाले नियमों का भी लागत पर असर पड़ा है। वहीं परिवहन और लॉजिस्टिक्स खर्च बढ़ने से सोलर सिस्टम की अंतिम कीमत और अधिक हो गई है।
हालांकि कीमतें बढ़ने के बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय में सोलर सिस्टम बिजली बिल में राहत देने का एक किफायती विकल्प बना रहेगा। इसलिए सोलर लगाने का फैसला करते समय उपभोक्ताओं को शुरुआती लागत के साथ-साथ लंबे समय की बचत को भी ध्यान में रखना चाहिए।
