सोलर प्लांट लगवाना अब होगा और भी ज्यादा आसान, सरकार GST में करने जा रही है बड़ी कटौती

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सोलर प्लांट लगवाना अब होगा और भी ज्यादा आसान, सरकार GST में करने जा रही है बड़ी कटौती 

Udaipur Times, Solar Plant : सरकार रिन्यूएबल एनर्जी (नवीकरणीय ऊर्जा) को बढ़ावा देने के लिए बड़ी राहत योजनाओं का ऐलान कर सकती है। खासकर, सोलर प्लांट (Solar Plant) लगाने की लागत में काफी कमी आने की उम्मीद है। GST काउंसिल ने अक्टूबर में होने वाली अपनी अगली बैठक में रिन्यूएबल एनर्जी के लिए इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) कॉन्ट्रैक्ट्स पर बड़ी टैक्स छूट देने का इरादा जताया है। अगर इसे लागू किया जाता है, तो सोलर प्लांट (Solar Plant) लगाने में GST से काफी राहत मिल सकती है, जिससे भविष्य में यह प्रक्रिया सस्ती हो जाएगी।

सूत्रों का कहना है कि GST काउंसिल ने इन कॉन्ट्रैक्ट्स के सर्विस वाले हिस्से पर GST दर को 18% से घटाकर 5% करने के प्रस्ताव पर विचार करना शुरू कर दिया है। इस कदम से सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट्स के डेवलपर्स को फायदा होगा। EPC कॉन्ट्रैक्ट्स बड़े पैमाने पर एनर्जी प्रोजेक्ट्स को पूरा करने और ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने का एक मॉडल हैं; ऐसे समझौतों के तहत, कॉन्ट्रैक्टर पूरे प्रोजेक्ट को पूरा करने और उसे मालिक को सौंपने के लिए पूरी तरह से जfम्मेदार होता है। काम के दायरे में डिज़ाइन और इक्विपमेंट की खरीद से लेकर अंतिम निर्माण तक सब कुछ शामिल होता है।

मौजूदा GST दरें

मौजूदा GST नियमों के तहत, सोलर प्लांट (Solar Plant) लगाने के लिए प्रभावी टैक्स दर लगभग 8.9% है, लेकिन काउंसिल ने एक समान 5% दर लागू करने का फैसला किया है, जिससे सीधे 4% की बचत होगी। EPC कॉन्ट्रैक्ट्स पर अभी 70:30 का फॉर्मूला लागू होता है: लागत के 70% हिस्से पर 5% GST लगता है, जबकि बाकी 30% पर 18% GST लगता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि सरकार कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू के 70% हिस्से को इक्विपमेंट और मटीरियल (जिस पर 5% GST लगता है) और बाकी 30% को सर्विस (जिस पर 18% GST लगता है) मानती है। इंडस्ट्री से जुड़े लोगों ने हर जगह एक समान 5% GST दर की मांग की है, जिस पर अगली बैठक में चर्चा हो सकती है। 

ITC का कोई फायदा नहीं

इंडस्ट्री का कहना है कि प्रभावी GST दर इक्विपमेंट और सर्विस पर लगने वाले टैक्स को मिलाकर 8.9 प्रतिशत है; हालांकि, इन प्रोजेक्ट्स से सप्लाई की जाने वाली बिजली GST से मुक्त है। चूंकि आउटपुट पर GST नहीं लगता है, इसलिए प्रोजेक्ट डेवलपर्स इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का दावा नहीं कर पाते हैं। इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का तर्क है कि एक समान 5 प्रतिशत GST दर लागू करने से जमा ITC कम हो जाएगा और उन पर वित्तीय बोझ कम होगा।

ITC मुख्य मुद्दा

इंडस्ट्री ITC रिफंड को अपनी मुख्य चिंता मानती है। ITC का फ़ायदा तब मिलता है जब इनपुट टैक्स, आउटपुट पर लगने वाले टैक्स से ज़्यादा हो। अभी, इन प्रोजेक्ट्स में इस्तेमाल होने वाले ग्लास और मेटल पर 18% GST लगता है, जबकि सोलर पैनल पर 5% टैक्स लगता है। EPC सर्विस पर भी 18% GST लगता है। इसलिए, प्रोजेक्ट बनाने के दौरान चुकाए गए टैक्स को आउटपुट के बदले वापस नहीं लिया जा सकता। इंडस्ट्री का मानना ​​है कि 5% की एक समान GST दर लागू करने से यह पूरा विवाद सुलझ सकता है।

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