गेहूं की जगह इन 6 प्रकार के आटे की बनाए रोटी, स्वाद के साथ बीमारियां रहेगी कोसों दूर
Udaipur Times, Wheat Roti Alternatives : भारतीय घरों में रोटी खाने का चलन सदियों पुराना है और ज्यादातर परिवारों में रोजाना गेहूं के आटे की रोटी बनाई जाती है। गेहूं की रोटी स्वादिष्ट होने के साथ आसानी से उपलब्ध भी होती है, लेकिन रोज एक ही तरह की रोटी खाने से डाइट में वैरायटी कम हो सकती है। ऐसे में आप गेहूं के अलावा दूसरे अनाजों और दालों से बने आटे की रोटियों को भी अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं।
अलग-अलग अनाजों से बनी रोटियों में फाइबर, प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम और अन्य पोषक तत्व अलग-अलग मात्रा में मिल सकते हैं। इससे खाने में स्वाद और वैरायटी बढ़ती है। हालांकि, किसी एक आटे को सभी लोगों के लिए गेहूं से बेहतर मानना सही नहीं है। आपकी जरूरत, स्वास्थ्य स्थिति और डाइट के अनुसार आटे का चुनाव किया जाना चाहिए।अगर आप भी रोज की गेहूं की रोटी से थोड़ा बदलाव चाहते हैं तो इन 6 तरह के आटे की रोटियां ट्राई कर सकते हैं।
1 बाजरे की रोटी
सर्दियों के मौसम में बाजरे की रोटी खास तौर पर लोकप्रिय होती है। बाजरा फाइबर और कई खनिजों का स्रोत माना जाता है। इससे बनी रोटी पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराने में मदद कर सकती है।बाजरे की रोटी को आप दाल, सब्जी, दही या हरी चटनी के साथ खा सकते हैं। इसका स्वाद गेहूं की रोटी से काफी अलग होता है, इसलिए डाइट में बदलाव के लिए यह अच्छा विकल्प हो सकता है।
हालांकि, बाजरे की रोटी थोड़ी भारी और सूखी हो सकती है। इसे नरम बनाने के लिए आटा गूंधते समय पर्याप्त पानी का इस्तेमाल करना जरूरी है।
2 ज्वार की रोटी
ज्वार का आटा भी गेहूं की रोटी का एक अच्छा विकल्प हो सकता है। ज्वार में फाइबर के साथ कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसकी रोटी खासकर उन लोगों को पसंद आ सकती है जो अपनी डाइट में मिलेट्स यानी मोटे अनाज को शामिल करना चाहते हैं।ज्वार की रोटी को सब्जी, दाल या दही के साथ खाया जा सकता है। इसका स्वाद हल्का अलग होता है और नियमित रूप से गेहूं खाने वालों के लिए यह डाइट में वैरायटी लाने का आसान तरीका हो सकता है।
3 रागी की रोटी
रागी यानी फिंगर मिलेट को कैल्शियम के अच्छे स्रोतों में गिना जाता है। इसके अलावा इसमें फाइबर और अन्य पोषक तत्व भी पाए जाते हैं। रागी के आटे से बनी रोटी डाइट में पोषण की विविधता बढ़ाने का एक विकल्प हो सकती है। रागी की रोटी को अकेले या किसी दूसरे आटे के साथ मिलाकर भी बनाया जा सकता है। अगर आपको इसका स्वाद थोड़ा ज्यादा मजबूत लगता है तो शुरुआत में इसमें गेहूं या किसी अन्य आटे को मिलाकर रोटी बनाई जा सकती है।
4 मक्के की रोटी
मक्के की रोटी भारतीय खाने में खास पहचान रखती है। खासकर पंजाब और उत्तर भारत में इसे सरसों के साग के साथ खाने का चलन काफी लोकप्रिय है।मक्के के आटे में फाइबर समेत कई पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसकी रोटी स्वाद में अलग होती है और खाने में बदलाव लाने के लिए इसे डाइट में शामिल किया जा सकता है। मक्के की रोटी बनाते समय आटा टूटने की समस्या हो सकती है। इसलिए इसे सामान्य गेहूं की रोटी की तरह बेलने के बजाय हाथ से आकार देकर या प्लास्टिक शीट की मदद से तैयार करना आसान रहता है।
5 चने के आटे की रोटी
बेसन या चने के आटे को भी रोटी के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। चना प्रोटीन और फाइबर का स्रोत है, इसलिए इससे बनी रोटी डाइट में प्रोटीन और फाइबर बढ़ाने का एक तरीका हो सकती है। बेसन की रोटी को आप अकेले बनाने के बजाय इसमें गेहूं, ज्वार या बाजरे का आटा मिलाकर भी तैयार कर सकते हैं। इसमें प्याज, हरी मिर्च, धनिया या अजवाइन जैसी चीजें मिलाने से इसका स्वाद और बेहतर हो सकता है। अगर आप अपनी रोजाना की रोटी में कुछ अलग स्वाद चाहते हैं तो चने के आटे की रोटी एक आसान विकल्प हो सकती है।
6 कुट्टू के आटे की रोटी
कुट्टू का आटा आम दिनों के साथ-साथ व्रत के दौरान भी इस्तेमाल किया जाता है। इसमें फाइबर, प्रोटीन और कुछ खनिज पाए जाते हैं। कुट्टू से बनी रोटी का स्वाद और बनावट गेहूं की रोटी से अलग होती है। इसे दही, सब्जी या किसी हल्के साइड डिश के साथ खाया जा सकता है। हालांकि, कुट्टू की रोटी बनाते समय आटा आसानी से टूट सकता है, इसलिए इसे तैयार करने के लिए सही मात्रा में पानी और उचित तकनीक का इस्तेमाल करना जरूरी है।
अलग-अलग आटे की रोटी खाने का क्या फायदा?
डाइट में अलग-अलग अनाज शामिल करने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि शरीर को अलग-अलग खाद्य स्रोतों से विभिन्न पोषक तत्व मिलते हैं। गेहूं के अलावा बाजरा, ज्वार, रागी, मक्का, चना और कुट्टू जैसे विकल्पों को अपनी जरूरत के अनुसार डाइट में शामिल किया जा सकता है। इनमें मौजूद फाइबर पाचन तंत्र के लिए उपयोगी हो सकता है, जबकि अलग-अलग अनाजों में मौजूद प्रोटीन और खनिज डाइट को अधिक विविध बना सकते हैं। हालांकि, किसी भी आटे के फायदे व्यक्ति की पूरी डाइट, मात्रा और स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करते हैं।
क्या रोज गेहूं की रोटी छोड़ना जरूरी है?
ऐसा जरूरी नहीं है कि स्वस्थ रहने के लिए आपको गेहूं की रोटी पूरी तरह छोड़नी पड़े। गेहूं भी कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, फाइबर और कई अन्य पोषक तत्व उपलब्ध कराता है। अगर आपको गेहूं से किसी तरह की समस्या नहीं है तो इसे संतुलित डाइट का हिस्सा बनाए रखा जा सकता है। जरूरत सिर्फ इतनी है कि खाने में समय-समय पर वैरायटी लाई जाए। आप कुछ दिनों में बाजरा, कुछ दिनों में ज्वार या रागी और बाकी दिनों में गेहूं की रोटी खा सकते हैं। इससे भोजन में अलग-अलग अनाज शामिल करने का मौका मिलता है।
रोटी को हेल्दी बनाने के लिए इन बातों का रखें ध्यान
सिर्फ आटा बदलने से ही पूरी डाइट हेल्दी नहीं हो जाती। रोटी के साथ आप क्या खा रहे हैं, इसकी भी अहम भूमिका होती है। कोशिश करें कि रोटी के साथ हरी सब्जियां, दाल, दही, सलाद या अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल हों। रोटी बनाते समय जरूरत से ज्यादा तेल या घी का इस्तेमाल करने से बचें। साथ ही, अलग-अलग आटे की रोटियों की मात्रा अपनी ऊर्जा जरूरत और पूरी डाइट के हिसाब से तय करें। अगर आपको किसी अनाज से एलर्जी, ग्लूटेन से जुड़ी समस्या या कोई अन्य चिकित्सकीय स्थिति है तो डाइट में बड़ा बदलाव करने से पहले डॉक्टर या योग्य डाइटिशियन की सलाह लेना बेहतर रहेगा।
स्वाद भी बदलेगा और डाइट में आएगी वैरायटी
रोज एक ही तरह की गेहूं की रोटी खाने के बजाय बाजरा, ज्वार, रागी, मक्का, चना और कुट्टू जैसे आटे को अपनी डाइट में शामिल किया जा सकता है। हर आटे का स्वाद, बनावट और पोषण प्रोफाइल अलग होता है। इसलिए किसी एक आटे को सबसे बेहतर मानने के बजाय अलग-अलग अनाजों को संतुलित तरीके से डाइट में शामिल करना ज्यादा व्यावहारिक तरीका हो सकता है। इससे खाने में बदलाव आएगा और आपकी डाइट में विभिन्न पोषक तत्वों वाले खाद्य पदार्थों की हिस्सेदारी भी बढ़ सकती है।