33 एकड़ जमीन में यहां बनेगा इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम, इन 5 इलाकों में प्रॉपर्टी रेट होगा बूस्ट

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33 एकड़ जमीन में यहां बनेगा इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम, इन 5 इलाकों में प्रॉपर्टी रेट होगा बूस्ट

Udaipur Times, Ghaziabad News: गाजियाबाद के रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के लिए आने वाले समय में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। शहर के राजनगर एक्सटेंशन में अंतरराष्ट्रीय स्तर का क्रिकेट स्टेडियम विकसित करने की योजना प्रस्तावित है। करीब 33 एकड़ जमीन पर पीपीपी मॉडल के तहत विकसित होने वाली इस परियोजना में गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) और उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (UPCA) की भूमिका बताई जा रही है। 

क्रिकेट स्टेडियम के साथ-साथ शहर में चल रहे एक्सप्रेसवे, मेट्रो, एयर कनेक्टिविटी और नई टाउनशिप से जुड़े प्रोजेक्ट भी रियल एस्टेट बाजार को प्रभावित कर रहे हैं। ऐसे में राजनगर एक्सटेंशन, हरनंदीपुरम, सिद्धार्थ विहार, वेव सिटी और वैशाली-वसुंधरा से लेकर दिल्ली बॉर्डर तक के इलाकों पर खास नजर है। हालांकि, किसी भी इलाके में प्रॉपर्टी की कीमत बढ़ना कई कारकों पर निर्भर करता है। इसलिए स्टेडियम या किसी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के आधार पर कीमतों में निश्चित या “रॉकेट” जैसी बढ़ोतरी की गारंटी नहीं दी जा सकती।

राजनगर एक्सटेंशन को मिल सकता है सीधा फायदा

राजनगर एक्सटेंशन में प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम इस क्षेत्र के लिए सबसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं में से एक हो सकता है। इलाके में पहले से ही बड़ी संख्या में आवासीय प्रोजेक्ट विकसित हो रहे हैं। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और अन्य प्रमुख सड़कों से कनेक्टिविटी के कारण राजनगर एक्सटेंशन में लोगों की आवाजाही आसान हुई है। अगर स्टेडियम परियोजना निर्धारित योजना के मुताबिक आगे बढ़ती है, तो इसके आसपास होटल, रेस्टोरेंट, रिटेल, पार्किंग और कमर्शियल गतिविधियों की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। इस तरह खेल और मनोरंजन से जुड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर इस इलाके में रहने वाले लोगों के साथ-साथ कारोबारियों के लिए भी नए अवसर पैदा कर सकता है।

हरनंदीपुरम में नई टाउनशिप से बढ़ेगी गतिविधि

हरनंदीपुरम योजना भी गाजियाबाद के बड़े शहरी विकास प्रोजेक्ट्स में शामिल है। यहां नियोजित तरीके से नई टाउनशिप विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इस तरह की टाउनशिप में सड़क, हरित क्षेत्र, स्कूल, स्वास्थ्य सुविधाएं, कमर्शियल क्षेत्र और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं को एक साथ विकसित करने की योजना होती है। अगर क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास तय समय के अनुसार होता है, तो आसपास रहने और कारोबार करने की मांग में बदलाव देखने को मिल सकता है। दिल्ली और नोएडा की तुलना में अलग-अलग बजट वाले घरों के विकल्प भी इस इलाके को होमबायर्स के लिए महत्वपूर्ण बनाते हैं।

सिद्धार्थ विहार की लोकेशन है बड़ी ताकत

सिद्धार्थ विहार भी गाजियाबाद के तेजी से विकसित हो रहे इलाकों में शामिल है। इसकी लोकेशन ऐसी है कि यहां से नोएडा, इंदिरापुरम और दिल्ली के कई हिस्सों तक पहुंच बनाई जा सकती है। क्षेत्र में पहले से कई आवासीय परियोजनाएं मौजूद हैं और सड़क कनेक्टिविटी में सुधार के साथ यहां मिड-सेगमेंट और प्रीमियम हाउसिंग की मांग बनी हुई है। स्टेडियम सहित आसपास के बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट इस पूरे बेल्ट में कमर्शियल गतिविधियों को बढ़ावा दे सकते हैं। हालांकि, इसका वास्तविक असर परियोजनाओं के पूरा होने और लोगों की मांग पर निर्भर करेगा।

वेव सिटी में स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर का होगा निर्माण

वेव सिटी गाजियाबाद के प्रमुख नियोजित रियल एस्टेट क्षेत्रों में से एक है। यहां बड़े पैमाने पर आवासीय और कमर्शियल विकास हुआ है। इलाके की प्लानिंग, खुले ग्रीन स्पेस और आधुनिक सुविधाओं के कारण यह परिवारों और प्रोफेशनल्स के बीच एक प्रमुख विकल्प के रूप में सामने आया है। एनएच-9 से कनेक्टिविटी होने के कारण दिल्ली, नोएडा और मेरठ की तरफ जाने वाले लोगों के लिए भी यह क्षेत्र महत्वपूर्ण है। आने वाले समय में आसपास के बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट इस क्षेत्र की कनेक्टिविटी और कमर्शियल गतिविधियों को प्रभावित कर सकते हैं।

वैशाली से दिल्ली बॉर्डर तक की जमीन पर असर

गाजियाबाद का ट्रांस-हिंडन इलाका, खासकर वैशाली, वसुंधरा और इंदिरापुरम, लंबे समय से दिल्ली से जुड़ा प्रमुख रिहायशी क्षेत्र रहा है। मेट्रो कनेक्टिविटी और दिल्ली के नजदीक होने के कारण इन इलाकों में पहले से ही मजबूत आवासीय मांग है। भविष्य में प्रस्तावित या नियोजित नई कनेक्टिविटी परियोजनाएं इस क्षेत्र की आवाजाही को और सुविधाजनक बना सकती हैं। इसका असर कमर्शियल गतिविधियों और आवासीय मांग पर पड़ सकता है, लेकिन प्रॉपर्टी की कीमतों में वास्तविक बदलाव बाजार की स्थिति, उपलब्धता और परियोजनाओं की प्रगति पर निर्भर करेगा।

स्टेडियम के अलावा ये प्रोजेक्ट भी बदल रहे हैं तस्वीर

गाजियाबाद में केवल क्रिकेट स्टेडियम ही चर्चा में नहीं है। शहर और आसपास के क्षेत्रों में कई बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पहले से ही कनेक्टिविटी को प्रभावित कर रहे हैं। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे ने दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बीच सड़क संपर्क को बेहतर किया है। वहीं हिंडन सिविल एयरपोर्ट की एयर कनेक्टिविटी भी क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है। इसके अलावा मेट्रो नेटवर्क के विस्तार और नई शहरी योजनाओं से गाजियाबाद के अलग-अलग माइक्रो मार्केट में विकास की संभावनाएं बनी हुई हैं।

स्टेडियम से सिर्फ क्रिकेट नहीं, कारोबार को भी मिल सकता है फायदा

किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजन स्थल के आसपास केवल आवासीय गतिविधियां ही नहीं बढ़तीं। मैच और अन्य आयोजनों के दौरान होटल, रेस्टोरेंट, कैफे, रिटेल आउटलेट, पार्किंग और मनोरंजन से जुड़ी सेवाओं की मांग बढ़ सकती है। अगर प्रस्तावित क्रिकेट स्टेडियम तय योजना के अनुसार विकसित होता है और नियमित बड़े आयोजनों का केंद्र बनता है, तो आसपास के क्षेत्र में कमर्शियल गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है। यही वजह है कि रियल एस्टेट सेक्टर में इस तरह की परियोजनाओं को लंबे समय के शहरी विकास के एक महत्वपूर्ण हिस्से के तौर पर देखा जाता है।

रियल एस्टेट एक्सपर्ट्स की क्या है राय ?

काउंटी ग्रुप के डायरेक्टर अमित मोदी के मुताबिक, गाजियाबाद का रियल एस्टेट बाजार अब सिर्फ अफोर्डेबल हाउसिंग तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर, मेट्रो, एयरपोर्ट, एक्सप्रेसवे और नियोजित टाउनशिप जैसे प्रोजेक्ट शहर के विकास को नई दिशा दे सकते हैं। एसकेए के डायरेक्टर संजय शर्मा ने भी राजनगर एक्सटेंशन, सिद्धार्थ विहार और वेव सिटी में हुए इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को महत्वपूर्ण बताया है। उनके अनुसार, नई कनेक्टिविटी और बड़े प्रोजेक्ट इन इलाकों की आवासीय मांग को प्रभावित कर सकते हैं। मिगसन ग्रुप के एमडी यश मिगलानी के मुताबिक, गाजियाबाद के कई माइक्रो मार्केट में एक साथ विकास हो रहा है। वहीं अंसल हाउसिंग के डायरेक्टर कुशाग्र अंसल ने हरनंदीपुरम और आसपास के नए शहरी कॉरिडोर को भविष्य के विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया है।

प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

क्रिकेट स्टेडियम या किसी बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट की खबर सुनकर तुरंत प्रॉपर्टी में निवेश करना जरूरी नहीं है। खरीदारों को जमीन के दस्तावेज, प्रोजेक्ट की मंजूरी, बिल्डर का रिकॉर्ड, निर्माण की स्थिति, कनेक्टिविटी और आसपास के मौजूदा बाजार भाव की जांच करनी चाहिए।किसी प्रस्तावित परियोजना की घोषणा और उसके जमीन पर पूरा होने के बीच काफी समय का अंतर हो सकता है। इसलिए सिर्फ भविष्य में कीमत बढ़ने की उम्मीद के आधार पर फैसला लेने के बजाय सभी पहलुओं की जांच करना जरूरी है।

गाजियाबाद के इन 5 इलाकों पर रहेगी प्रोपर्टी डीलर की नजर

क्रिकेट स्टेडियम और दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को देखते हुए राजनगर एक्सटेंशन, हरनंदीपुरम, सिद्धार्थ विहार, वेव सिटी और वैशाली-वसुंधरा से दिल्ली बॉर्डर तक का क्षेत्र आने वाले समय में चर्चा में रह सकता है। इन इलाकों में कनेक्टिविटी, आवासीय विकास और कमर्शियल गतिविधियों में बदलाव की संभावनाएं हैं। हालांकि, प्रॉपर्टी की कीमतों में कितनी बढ़ोतरी होगी, यह बाजार की मांग, परियोजनाओं की प्रगति और आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

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