किताब पढ़ने का मजा है वो केंडल में नहीं – डी. सरकार
जनार्दनराय नागर राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय एंव राष्ट्रीय पुस्तक न्यास भारत, मानव संसाधन विकास मंत्रालय भारत सरकार के संयुक्त तत्वावधान आयोजित सात दिवसीय पुस्तक प्रकाशन प्रमाण पत्र के तीसरे दिन ट्रस्ट के डिप्टी डायरेक्टर डी. सरकार ने छात्रों को सम्बोधित करते हुए कहा कि पुस्तकों का महत्व आजीवन रहेगा, चाहे कितनी भी आधुनिक क्रांति आ जाये।

जनार्दनराय नागर राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय एंव राष्ट्रीय पुस्तक न्यास भारत, मानव संसाधन विकास मंत्रालय भारत सरकार के संयुक्त तत्वावधान आयोजित सात दिवसीय पुस्तक प्रकाशन प्रमाण पत्र के तीसरे दिन ट्रस्ट के डिप्टी डायरेक्टर डी. सरकार ने छात्रों को सम्बोधित करते हुए कहा कि पुस्तकों का महत्व आजीवन रहेगा, चाहे कितनी भी आधुनिक क्रांति आ जाये।
उन्होने कहा कि पुरे विश्व मंे ई बुक्स एवं ई जर्नल का प्रचलन चल रहा है लेकिन अभी इसका प्रतिशत 11 से घटकर 4 प्रतिशत ही रह गया है। विदेशों में शिक्षा में क्षेत्र में आधुनिक परिवर्तन करते हुए पूरा शिक्षा तंत्र को कम्प्यूटीकृत कर दिया है। उन्होने कहा कि व्यक्ति को लिखने की आदत को नहीं छोडना हेागा, यदि उन्होने लिखना छोड़ दिया तो उनके ब्रेन का विकास भी रूक जायेगा इसलिए व्यक्ति ने लिखने की प्रवृत्ति को नहीं छोड़ा है। जो किताब पढ़ने का मजा है वो केंडल में नहीं है।
सेमीनार में प्रोडेक्शन आफिसर नरेन्द्र कुमार ने बताया कि चार तकनीकी सत्रों में प्रतिभागियों को पुस्तकों के निर्माण की विभिन्न विधाओं को विस्तार से बताया। प्रथम सत्र में वरिष्ठ सम्पादक मानस रंजन महापात्र ने कॉपीराईट एवं उसकेे एडिटिंग पर विस्तार से चर्चा की। इस अवसर पर डॉ. हेमेन्द्र चौधरी, डॉ. राजन सूद, डॉ. लिलि जैन, डॉ. हीना खान, डॉ. सुनिता मुर्डिया, डॉ. रचना राठौड, डॅा. पारस जेन, डॉ. शेलेन्द्र मेहता सहित प्रतिभागी उपस्थित थे।
पुस्तको में बदलाव आवश्यक:- डी. सरकार ने कहा कि पुस्तकों के प्रकाशन में परम्परागत पद्धति तो रहेगी लेकिन उसे आधुनिक समय के हिसाब से उसमें बदलाव करना होगा जैसे कवर पेज की डिजाईनिंग, शब्दों का चयन, साज सज्जा, आकर्षित करने वाले चित्र प्रकाशित करने होंगे। उन्होने कहा कि बच्चों को पुस्तकों के प्रति जागरूक करने के लिए आज बाजार में थ्री बुक्स का प्रचलन दिनों दिन बढता जा रहा है। सरकार के साथ साथ सामाजिक संगठन भी पुस्तकालय खोल एवं चल पुस्तकालय व मोबाईल वेन के माध्यम से पुस्तकों के महत्व को ग्रामीण जन को बताये।
