झीलो को पाटने से बचाने के लिए पुलियाओ पर लगे झालिया
स्मार्ट सिटी की झीलो में तैरता हुआ पॉलीथिन, सड़ी गली खाद्य सामग्री, शराब की बोतले और कचरा झीलो को ही नही वरन् पर्यटको की आँखों में भी खटकता होगा। पिछोला के अमरकुंड और बारीघाट पर इस नज़ारे को देख झील प्रेमियो ने अफ़सोस प्रकट करते हुए झील क्षेत्र से तैरता हुआ कचरा, पूजन सामग्री व जलीय घास के साथ खरपतवार निकाली। श्रमदान में मानव सिंह, दिगम्बर सिंह, रमेश चन्द्र राजपूत, मोहन सिंह, राम लाल गेहलोत, महंत इंद्र देव दास, मुकुल कुमावत, तेज शंकर पालीवाल व नन्द किशोर शर्मा ने भाग लिया।
स्मार्ट सिटी की झीलो में तैरता हुआ पॉलीथिन, सड़ी गली खाद्य सामग्री, शराब की बोतले और कचरा झीलो को ही नही वरन् पर्यटको की आँखों में भी खटकता होगा। पिछोला के अमरकुंड और बारीघाट पर इस नज़ारे को देख झील प्रेमियो ने अफ़सोस प्रकट करते हुए झील क्षेत्र से तैरता हुआ कचरा, पूजन सामग्री व जलीय घास के साथ खरपतवार निकाली। श्रमदान में मानव सिंह, दिगम्बर सिंह, रमेश चन्द्र राजपूत, मोहन सिंह, राम लाल गेहलोत, महंत इंद्र देव दास, मुकुल कुमावत, तेज शंकर पालीवाल व नन्द किशोर शर्मा ने भाग लिया।
श्रमदान पश्चात चांदपोल पर आयोजित संवाद में झील प्राधिकरण के सदस्य तेज शंकर पालीवाल ने कहा कि ब्रह्म पोल दरवाजे के पास दोनों तरफ झील पेटे में इमारती मिट्टी डाल झील को पाटा जा रहा है, जिससे झील की भराव क्षमता प्रभावित हो रहीं है। नगर निगम को चाहिए कि झील के किनारे छोटी दीवार बना दे ताकि भवन निर्माण की मिट्टी व अन्य कुड़ा कचरा डालना बंद हो।
समाज विज्ञानी नन्द किशोर शर्मा ने कहा कि जन आस्थाओ को ध्यान में रखते हुए झील किनारे ऐसे कलश या पात्र रखे जाए जिसमे हवन पूजा सामग्री डाली जाये साथ ही झील पर बनी पुलियाओं पर पारदर्शी झालिया लगाई जाए ताकि झीलो में डाली जा रही सामग्री पर रोक लग सके।
