आगरा से अलीगढ़ का सफर होगा आसान ! ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे से बढ़ेगी कनेक्टिविटी, देखें पूरा रूटमैप ?

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आगरा से अलीगढ़ का सफर होगा आसान ! ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे से बढ़ेगी कनेक्टिविटी, देखें पूरा रूटमैप ?

Udaipur Times, Agra-Aligarh Greenfield Expressway : उत्तर प्रदेश में सड़क और एक्सप्रेसवे नेटवर्क को लगातार विस्तार दिया जा रहा है। इसी कड़ी में आगरा-अलीगढ़ ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे परियोजना को भी आगे बढ़ाया जा रहा है। करीब 65 किलोमीटर लंबा फोरलेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे तैयार होने के बाद आगरा और अलीगढ़ के बीच सड़क कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है।

मौजूदा मार्ग की तुलना में यात्रा का समय कम हो सकता है और अलीगढ़ से हाथरस की कनेक्टिविटी भी आसान होगी। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, परियोजना का निर्माण कार्य इस महीने से शुरू होने की संभावना है। एक्सप्रेसवे के पूरा होने के बाद अलीगढ़ से आगरा का सफर करीब एक घंटे में पूरा होने का दावा किया जा रहा है। वहीं अलीगढ़ से हाथरस की दूरी भी करीब आधे घंटे में तय होने की उम्मीद है। 

इस परियोजना का असर केवल आगरा और अलीगढ़ तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दिल्ली-एनसीआर, लखनऊ, कानपुर और पूर्वांचल की ओर जाने वाले यात्रियों को भी बेहतर कनेक्टिविटी मिल सकती है।

अभी आगरा-अलीगढ़ पहुंचने में लगता है 2 से ढाई घंटे का समय

फिलहाल अलीगढ़ और हाथरस के बीच नेशनल हाईवे-509 प्रमुख मार्गों में शामिल है। यह मार्ग सासनी और हाथरस जैसे शहरों से होकर गुजरता है। रास्ते में स्थानीय और अन्य यातायात के कारण वाहनों की गति प्रभावित होती है। कई हिस्सों में सड़क पर डिवाइडर की सुविधा भी नहीं होने से यात्रा की रफ्तार सीमित रहती है। 

मौजूदा व्यवस्था में आगरा से अलीगढ़ आने-जाने में करीब 2 से ढाई घंटे तक का समय लग सकता है। नए ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के बनने के बाद आगरा और अलीगढ़ के बीच सीधी और तेज कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है।

अलीगढ़ से आगरा का सफर करीब 1 घंटे में होने की उम्मीद

प्रस्तावित एक्सप्रेसवे फोरलेन होगा। इसके तैयार होने के बाद अलीगढ़ और आगरा के बीच यात्रा का समय काफी कम होने की संभावना है। परियोजना से जुड़े अनुमान के मुताबिक, अलीगढ़ से आगरा की दूरी करीब एक घंटे में तय की जा सकेगी। इसी तरह अलीगढ़ से हाथरस पहुंचने में भी करीब 30 मिनट का समय लगने की उम्मीद है। इससे रोजाना सफर करने वाले लोगों के साथ-साथ माल परिवहन और दूसरे व्यावसायिक वाहनों को भी फायदा मिल सकता है। हालांकि, वास्तविक यात्रा समय एक्सप्रेसवे के संचालन, वाहनों की गति, प्रवेश-निकास व्यवस्था और ट्रैफिक की स्थिति पर निर्भर करेगा।

दो फेज में तैयार किया जा रहा है 65 KM लंबा एक्सप्रेसवे

आगरा-अलीगढ़ ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई करीब 65 किलोमीटर बताई जा रही है। परियोजना को दो फेज में पूरा करने की योजना है। इसकी अनुमानित लागत करीब 820 करोड़ रुपये बताई गई है।

पहला फेज

पहले चरण में अलीगढ़ से हाथरस के असरोई तक करीब 28 किलोमीटर लंबा हिस्सा विकसित किया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस हिस्से पर काम जारी है।

दूसरा फेज

दूसरे चरण में असरोई से आगरा के खंदौली तक करीब 37 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण किया जाएगा। दोनों चरण पूरे होने के बाद करीब 65 किलोमीटर का पूरा ग्रीनफील्ड कॉरिडोर तैयार हो सकेगा। ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे की खासियत यह होती है कि इसे नए अलाइनमेंट पर विकसित किया जाता है, जिससे पुराने शहरों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों से गुजरने की जरूरत अपेक्षाकृत कम हो सकती है।

खंदौली के पास यमुना एक्सप्रेसवे से जुड़ने की योजना

इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत इसकी कनेक्टिविटी बताई जा रही है। प्रस्तावित एक्सप्रेसवे आगरा में खंदौली के पास यमुना एक्सप्रेसवे से जुड़ सकता है। इसके बाद आगरा इनर रिंग रोड के माध्यम से यात्रियों को आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे की ओर जाने की सुविधा मिल सकेगी। इस कनेक्टिविटी से अलीगढ़ और हाथरस जैसे शहरों से आने वाले लोगों के लिए दिल्ली-एनसीआर और लखनऊ की दिशा में सफर आसान हो सकता है।

दिल्ली-एनसीआर से लेकर पूर्वांचल तक बेहतर होगी कनेक्टिविटी

आगरा-अलीगढ़ एक्सप्रेसवे के यमुना एक्सप्रेसवे और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से जुड़ने की स्थिति में इसका असर कई प्रमुख शहरों पर पड़ सकता है। इसके जरिए दिल्ली-एनसीआर, अलीगढ़, हाथरस, आगरा, कानपुर और लखनऊ के बीच सड़क संपर्क बेहतर होने की उम्मीद है। आगे आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के जरिए पूर्वांचल की ओर जाने वाले यात्रियों को भी बेहतर रूट विकल्प मिल सकता है। इससे लंबे सफर के दौरान पुराने और भीड़भाड़ वाले मार्गों पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिल सकती है।

बरेली-मथुरा हाईवे से भी जुड़ेगा ये एक्सप्रेसवे

आगरा-अलीगढ़ ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे की एक और महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी हाथरस के पास निर्माणाधीन बरेली-मथुरा हाईवे से बताई जा रही है। दोनों मार्गों के बीच बेहतर कनेक्शन बनने से पश्चिमी और मध्य उत्तर प्रदेश के कई जिलों के बीच आवागमन आसान हो सकता है। इसका फायदा बरेली, बदायूं, कासगंज, हाथरस, अलीगढ़ और आगरा जैसे क्षेत्रों को मिलने की संभावना है। खासकर माल परिवहन के लिए नए कनेक्टिविटी विकल्प बनने से क्षेत्रीय कारोबार को भी फायदा हो सकता है।

कारोबार और माल परिवहन को भी मिल सकता है एक्सप्रेसवे का फायदा

किसी भी बड़े एक्सप्रेसवे का फायदा केवल यात्रियों तक सीमित नहीं रहता। बेहतर सड़क नेटवर्क से माल की आवाजाही तेज होने पर परिवहन समय कम करने में मदद मिल सकती है। आगरा, अलीगढ़ और हाथरस क्षेत्र में विभिन्न औद्योगिक एवं कारोबारी गतिविधियां हैं। ऐसे में बेहतर कनेक्टिविटी से इन क्षेत्रों के बीच माल ढुलाई के लिए नया विकल्प मिल सकता है। इसके अलावा दिल्ली-एनसीआर और दूसरे बड़े बाजारों तक पहुंच आसान होने से स्थानीय कारोबार और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।

आगरा-अलीगढ़ एक्सप्रेसवे क्यों है अहम?

इस परियोजना को महत्वपूर्ण इसलिए माना जा रहा है क्योंकि यह एक साथ कई प्रमुख सड़क मार्गों से जुड़ने का विकल्प तैयार कर सकती है। एक तरफ इसका कनेक्शन यमुना एक्सप्रेसवे से होने की योजना है, वहीं दूसरी ओर आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है। हाथरस के पास बरेली-मथुरा हाईवे से जुड़ाव इसे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए भी उपयोगी बना सकता है।

कई शहरों के बीच बनेगा नया तेज रूट

कुल मिलाकर करीब 65 किलोमीटर लंबा आगरा-अलीगढ़ ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे आगरा, अलीगढ़ और हाथरस के बीच सड़क संपर्क को मजबूत करने वाली अहम परियोजना हो सकती है। करीब 820 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना को दो चरणों में विकसित किया जा रहा है।

परियोजना पूरी होने के बाद अलीगढ़-आगरा और अलीगढ़-हाथरस के सफर का समय कम होने की उम्मीद है। साथ ही यमुना एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे और बरेली-मथुरा हाईवे से संभावित कनेक्टिविटी के कारण दिल्ली-एनसीआर से लेकर लखनऊ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों के बीच आवागमन के लिए नया विकल्प मिल सकता है।

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