भोपाल से इंदौर का सफर होगा आसान ! 4 हजार करोड़ से तैयार होगा ये नया 6 लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे, देखें पूरा रूटमैप
Udaipur Times, Bhopal-Indore Greenfield Expressway : मध्य प्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए भोपाल और इंदौर के बीच नए ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे की योजना बनाई जा रही है। मौजूदा भोपाल-इंदौर मार्ग पर ट्रैफिक और शहरी क्षेत्रों की भीड़ के कारण सफर में काफी समय लगता है। नए कॉरिडोर के तैयार होने के बाद दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय करीब 2 से 2.5 घंटे तक आने की उम्मीद है। इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 4,000 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
मौजूदा सड़क को चौड़ा करने के बजाय बनेगा नया रास्ता
प्रस्तावित परियोजना की खास बात यह है कि मौजूदा भोपाल-इंदौर मार्ग को ही चौड़ा करने के बजाय एक नया ग्रीनफील्ड कॉरिडोर विकसित करने की योजना है। नया रास्ता प्रमुख कस्बों, चौराहों और भीड़भाड़ वाले हिस्सों से अलग बनाया जाएगा, जिससे वाहनों को बार-बार रुकने और स्थानीय ट्रैफिक का सामना करने की जरूरत कम हो सकती है। यह करीब 6 लेन का एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे होगा। ऐसे हाईवे पर प्रवेश और निकास निर्धारित स्थानों से होता है, जिससे तेज रफ्तार वाहनों के लिए लगातार और अपेक्षाकृत सुगम आवागमन सुनिश्चित करने में मदद मिलती है।
करीब 160 किलोमीटर का होगा नया कॉरिडोर
भोपाल और इंदौर के बीच मौजूदा सड़क दूरी करीब 191 किलोमीटर बताई जाती है, जबकि प्रस्तावित ग्रीनफील्ड कॉरिडोर करीब 160 किलोमीटर लंबा हो सकता है। नया रास्ता दोनों शहरों के बीच ज्यादा सीधा कनेक्शन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार किया जा रहा है।
मौजूदा रूट पर यात्रा में लगभग 4 घंटे तक लग सकते हैं, जबकि नए एक्सप्रेसवे के बनने के बाद यह समय करीब 2 से 2.5 घंटे तक कम होने की उम्मीद है। हालांकि वास्तविक यात्रा समय ट्रैफिक, प्रवेश-निकास बिंदुओं और कॉरिडोर के अंतिम अलाइनमेंट पर निर्भर करेगा।
सीहोर और देवास जैसे इलाकों को भी मिलेगा फायदा
भोपाल-इंदौर एक्सप्रेसवे का फायदा केवल दोनों प्रमुख शहरों तक सीमित नहीं रहने की उम्मीद है। सीहोर और देवास जैसे इलाकों की कनेक्टिविटी भी बेहतर हो सकती है। नए कॉरिडोर से पश्चिमी मध्य प्रदेश के प्रमुख शहरी और आर्थिक केंद्रों के बीच आवाजाही आसान होने की संभावना है।
बेहतर सड़क संपर्क से यात्रियों के साथ-साथ माल परिवहन को भी फायदा मिल सकता है। इससे औद्योगिक गतिविधियों, व्यापार और क्षेत्रीय आर्थिक संपर्क को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है
2028 के सिंहस्थ से पहले पूरा करने का लक्ष्य
इस परियोजना को लेकर 2028 का साल खास माना जा रहा है। उज्जैन में 2028 में सिंहस्थ कुंभ मेले का आयोजन प्रस्तावित है और इस दौरान मध्य प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और यात्रियों के पहुंचने की उम्मीद है। इसी वजह से भोपाल-इंदौर कनेक्टिविटी से जुड़े इस कॉरिडोर को सिंहस्थ से पहले तैयार करने का लक्ष्य महत्वपूर्ण हो जाता है।
योजना के अनुसार 2028 के आसपास इसके कुछ हिस्सों या पूरे कॉरिडोर को चालू करने की दिशा में काम किया जा सकता है। हालांकि अंतिम समयसीमा परियोजना की स्वीकृतियों, भूमि अधिग्रहण और निर्माण की प्रगति पर निर्भर करेगी।
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से भी जुड़ सकता है नेटवर्क
भोपाल-इंदौर कॉरिडोर की अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि इसे मध्य प्रदेश के दूसरे बड़े एक्सप्रेसवे नेटवर्क से जोड़ने की योजना है। इंदौर की तरफ गारोठ-इंदौर लिंक एक्सप्रेसवे के जरिए दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे नेटवर्क से कनेक्शन उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है।
अगर ये कनेक्टिविटी परियोजनाएं निर्धारित योजना के अनुसार विकसित होती हैं, तो भोपाल और आसपास के क्षेत्रों से इंदौर के रास्ते दिल्ली और मुंबई की ओर जाने वाले यात्रियों को तेज सड़क नेटवर्क का फायदा मिल सकता है।
नर्मदा एक्सप्रेसवे नेटवर्क से भी जुड़ने की योजना
प्रस्तावित भोपाल-इंदौर कॉरिडोर को सीहोर-देवास क्षेत्र के आसपास नर्मदा एक्सप्रेसवे नेटवर्क से जोड़ने की भी योजना बताई जा रही है। इससे मध्य प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों के बीच हाई-स्पीड सड़क कनेक्टिविटी का नेटवर्क विकसित हो सकता है। इस तरह अलग-अलग एक्सप्रेसवे और ग्रीनफील्ड कॉरिडोर एक-दूसरे से जुड़ने पर राज्य के प्रमुख शहरों के बीच सड़क यात्रा और माल परिवहन के लिए ज्यादा तेज रूट उपलब्ध हो सकते हैं।
भोपाल-जबलपुर एक्सप्रेसवे से भी बढ़ेगी कनेक्टिविटी
मध्य प्रदेश में भोपाल से दूसरे प्रमुख शहरों को जोड़ने के लिए एक और बड़ा प्रोजेक्ट प्रस्तावित है। करीब 255 किलोमीटर लंबे भोपाल-जबलपुर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का उद्देश्य दोनों शहरों के बीच यात्रा के समय को कम करना है।
इस परियोजना के जरिए भोपाल-जबलपुर यात्रा का समय करीब 6 घंटे से घटाकर लगभग 3 घंटे करने का लक्ष्य बताया गया है। भोपाल-इंदौर और भोपाल-जबलपुर जैसे कॉरिडोर अगर आगे बढ़ते हैं तो राज्य में हाई-स्पीड सड़क नेटवर्क को विस्तार मिल सकता है।
मध्य प्रदेश में बन सकता है बड़ा एक्सप्रेसवे नेटवर्क
भोपाल-इंदौर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को केवल दो शहरों को जोड़ने वाली सड़क के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। इसे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, नर्मदा एक्सप्रेसवे और दूसरे प्रस्तावित ग्रीनफील्ड कॉरिडोर से जोड़ने की योजनाओं के साथ देखा जाए तो मध्य प्रदेश में एक बड़ा हाई-स्पीड रोड नेटवर्क तैयार हो सकता है।
आपको बता दें कि करीब 4,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाला यह 6 लेन कॉरिडोर पूरा होने पर भोपाल और इंदौर के बीच सड़क यात्रा को तेज करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। करीब 160 किलोमीटर के नए रास्ते से शहरों के बीच दूरी और यात्रा समय कम करने का लक्ष्य है। हालांकि परियोजना की अंतिम लागत, अलाइनमेंट, निर्माण समयसीमा और वास्तविक यात्रा समय आधिकारिक मंजूरियों और निर्माण पूरा होने के बाद ही स्पष्ट रूप से सामने आएगा।