उज्जैन से अहमदाबाद का सफर होगा आसान ! इंदौर-देवास से वडोदरा तक सुपरफास्ट होगी कनेक्टिविटी

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उज्जैन से अहमदाबाद का सफर होगा आसान ! इंदौर-देवास से वडोदरा तक सुपरफास्ट होगी कनेक्टिविटी

Udaipur Times, Ujjain-Garoth Highway : मध्य प्रदेश में बन रहा उज्जैन-गरोठ फोर-लेन हाईवे पश्चिमी और मध्य भारत के बीच सड़क कनेक्टिविटी को नया रूप देने वाला है। उज्जैन को सीधे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाले इस कॉरिडोर का निर्माण तेजी से आगे बढ़ रहा है। करीब 136.1 किलोमीटर लंबा यह सेक्शन सिंहस्थ-2028 को ध्यान में रखते हुए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके तैयार होने के बाद उज्जैन से गुजरात के अहमदाबाद और वडोदरा जैसे शहरों तक पहुंचना पहले की तुलना में आसान और तेज हो सकता है। 

रिपोर्ट के मुताबिक, अभी उज्जैन से अहमदाबाद पहुंचने में करीब 9 से 10 घंटे तक लगते हैं, जबकि नया कनेक्शन तैयार होने के बाद यह सफर करीब 5.5 से 6 घंटे में पूरा होने की उम्मीद है। इसका फायदा सिर्फ उज्जैन ही नहीं, बल्कि इंदौर, देवास, रतलाम और मंदसौर जैसे शहरों को भी मिल सकता है।

उज्जैन से अहमदाबाद का सफर 6 घंटे में होने की उम्मीद

उज्जैन-गरोठ हाईवे का सबसे बड़ा फायदा उज्जैन और अहमदाबाद के बीच यात्रा करने वाले लोगों को मिल सकता है। फिलहाल दोनों शहरों के बीच आने-जाने के लिए झाबुआ-दाहोद की ओर जाने वाले पुराने मार्ग का इस्तेमाल किया जाता है। उज्जैन और अहमदाबाद के बीच सड़क दूरी करीब 420 किलोमीटर बताई जाती है।

 पुराने मार्ग पर कई जगह सिंगल लेन सड़क और शहरों के ट्रैफिक से गुजरना पड़ता है, जिसके कारण यात्रा में करीब 9 से 10 घंटे तक का समय लग जाता है।उज्जैन-गरोठ कॉरिडोर तैयार होने के बाद यह गरोठ के पास सीधे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जुड़ जाएगा। 

एक्सप्रेसवे पर बेहतर सड़क और नियंत्रित यातायात व्यवस्था के कारण वाहनों को अधिक तेज गति से चलने का अवसर मिलेगा। ऐसे में नए कॉरिडोर के जरिए उज्जैन से अहमदाबाद की यात्रा करीब 5.5 से 6 घंटे में पूरी होने की उम्मीद जताई जा रही है। यानी यात्रियों के समय में लगभग 3 से 4 घंटे तक की बचत हो सकती है। हालांकि, वास्तविक यात्रा समय वाहन, ट्रैफिक, प्रवेश-निकास और अंतिम रूट पर निर्भर करेगा।

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से सीधे जुड़ेगा अब उज्जैन रूट

उज्जैन-गरोठ सेक्शन की सबसे बड़ी खासियत इसका दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जुड़ना है। गरोठ के पास यह कॉरिडोर एक्सप्रेसवे नेटवर्क से कनेक्ट होगा। इससे उज्जैन और आसपास के शहरों को देश के सबसे महत्वपूर्ण एक्सप्रेसवे कॉरिडोर में से एक तक सीधी पहुंच मिल सकेगी। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के जरिए आगे राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र की दिशा में यात्रा करना आसान हो सकता है। 

इस कनेक्टिविटी का फायदा केवल यात्रियों को ही नहीं, बल्कि माल परिवहन को भी मिलने की संभावना है। उज्जैन और मालवा क्षेत्र से निकलने वाले कृषि उत्पाद, औद्योगिक सामान और दूसरे माल को बड़े बाजारों तक पहुंचाने के लिए बेहतर सड़क मार्ग उपलब्ध हो सकता है। इससे लॉजिस्टिक्स और क्षेत्रीय व्यापार को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

इंदौर और देवास को भी मिलेगा बड़ा फायदा

उज्जैन के साथ इंदौर और देवास के लिए भी यह हाईवे महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। दोनों शहर उज्जैन के आसपास के प्रमुख आर्थिक और औद्योगिक केंद्र हैं। उज्जैन रिंग रोड और आसपास के सड़क नेटवर्क से जुड़ाव होने के कारण इंदौर और देवास से दिल्ली, राजस्थान और गुजरात की ओर जाने वाला ट्रैफिक इस कॉरिडोर का इस्तेमाल कर सकता है। इससे इंदौर-देवास क्षेत्र से अहमदाबाद और वडोदरा जैसे गुजरात के प्रमुख शहरों तक पहुंचने के लिए बेहतर रूट विकल्प उपलब्ध हो सकता है। कारोबार, औद्योगिक परिवहन और लंबी दूरी के यातायात के लिहाज से यह कनेक्टिविटी मालवा क्षेत्र के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

रतलाम और मंदसौर की कनेक्टिविटी भी होगी मजबूत

उज्जैन-गरोठ हाईवे का फायदा मालवा के रतलाम और मंदसौर जिलों को भी मिलने की उम्मीद है। ये दोनों क्षेत्र मध्य प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में स्थित हैं और गुजरात तथा राजस्थान की ओर जाने वाले यातायात के लिए महत्वपूर्ण हैं। नए कॉरिडोर के बनने से इन शहरों के लोगों को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे तक पहुंचने का बेहतर विकल्प मिल सकता है। 

इसके जरिए रतलाम और मंदसौर से अहमदाबाद, वडोदरा और आगे गुजरात के दूसरे हिस्सों तक सड़क संपर्क को मजबूत करने में मदद मिलेगी। इससे स्थानीय कारोबारियों और मालवाहक वाहनों को भी लंबी दूरी के परिवहन में सुविधा मिलने की संभावना है।

उज्जैन-गरोठ हाईवे से जुड़ेंगे ये शहर और इलाके

उज्जैन-गरोठ कॉरिडोर के रूट में मध्य प्रदेश के कई प्रमुख शहर और कस्बे शामिल हैं। इनमें उज्जैन, महिदपुर, घट्टिया, बड़ोद, आलोट, सुवासरा, शामगढ़ और गरोठ प्रमुख हैं। इन क्षेत्रों के बीच सड़क संपर्क मजबूत होने के साथ-साथ दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जुड़ने के बाद इनके लिए बाहरी राज्यों तक पहुंच भी आसान हो सकती है। 

खासकर उज्जैन और गरोठ के बीच यात्रा करने वाले लोगों को फोर-लेन सड़क मिलने से बेहतर परिवहन सुविधा मिल सकती है। इसके अलावा रास्ते में आने वाले कस्बों के लिए भी यह परियोजना क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकती है।

सिंहस्थ-2028 से पहले उज्जैन को मिलेगा बड़ा फायदा

उज्जैन में सिंहस्थ-2028 का आयोजन होना है। ऐसे में देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के उज्जैन पहुंचने की उम्मीद है। इस लिहाज से उज्जैन-गरोठ हाईवे और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से इसकी कनेक्टिविटी महत्वपूर्ण हो जाती है। गुजरात की ओर से उज्जैन आने वाले यात्रियों को इस नए मार्ग से फायदा मिल सकता है। 

अहमदाबाद, वडोदरा और गुजरात के दूसरे हिस्सों से बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सड़क मार्ग उपलब्ध होने की संभावना है। इससे लंबी दूरी की यात्रा का समय कम करने और यात्रा को अधिक सुविधाजनक बनाने में मदद मिल सकती है। सिंहस्थ के दौरान सड़क यातायात को व्यवस्थित रखने में भी बेहतर हाईवे नेटवर्क उपयोगी साबित हो सकता है।

गुजरात से उज्जैन आने वालों को मिलेगा आसान रास्ता

उज्जैन देश के प्रमुख धार्मिक शहरों में शामिल है और महाकालेश्वर मंदिर की वजह से यहां सालभर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। गुजरात से उज्जैन आने वाले लोगों के लिए वर्तमान सड़क मार्ग में लंबा समय लग सकता है। उज्जैन-गरोठ कॉरिडोर और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जुड़ाव के बाद गुजरात की दिशा से आने वाले यात्रियों के लिए नया और तेज विकल्प उपलब्ध हो सकता है। 

इससे गुजरात और मध्य प्रदेश के बीच धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ सामान्य यातायात भी बढ़ने की संभावना है। सिंहस्थ के दौरान यह कनेक्टिविटी और भी महत्वपूर्ण हो सकती है, क्योंकि उस समय उज्जैन में देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद रहती है।

करीब 90 फीसदी काम पूरा होने का है दावा

उज्जैन-गरोठ सेक्शन का निर्माण अब अंतिम चरण में पहुंचने की जानकारी दी गई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, परियोजना का करीब 90 फीसदी काम पूरा हो चुका है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की निगरानी में निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, निर्माण एजेंसी GHV की कंपनी इस परियोजना पर काम कर रही है।

करीब 2,600 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहा यह कॉरिडोर लगभग 136.1 किलोमीटर लंबा है। निर्माण का बड़ा हिस्सा पूरा होने के बाद अब बाकी बचे कार्यों को पूरा करने पर जोर दिया जा रहा है। परियोजना के पूरी तरह तैयार होने के बाद इसे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जोड़ने की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी।

136.1 KM लंबे कॉरिडोर से बदलेगा सड़क नेटवर्क

करीब 136.1 किलोमीटर लंबा उज्जैन-गरोठ कॉरिडोर मध्य प्रदेश के सड़क नेटवर्क में एक महत्वपूर्ण कड़ी जोड़ सकता है। इसकी वजह से उज्जैन को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से सीधा संपर्क मिलने की उम्मीद है। इससे मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र को गुजरात, राजस्थान और आगे देश के दूसरे हिस्सों से बेहतर सड़क कनेक्टिविटी मिल सकती है। बेहतर हाईवे नेटवर्क से जहां यात्रियों के समय की बचत होने की संभावना है, वहीं माल परिवहन भी अधिक सुविधाजनक हो सकता है। इससे उद्योग, व्यापार, पर्यटन और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

MP-गुजरात के बीच कनेक्टिविटी को मिलेगा नया रूट

उज्जैन-गरोठ हाईवे के पूरा होने और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जुड़ने के बाद मध्य प्रदेश और गुजरात के बीच सड़क कनेक्टिविटी और मजबूत हो सकती है। उज्जैन के साथ इंदौर, देवास, रतलाम और मंदसौर जैसे शहरों को भी इसका अप्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना है। गुजरात के अहमदाबाद और वडोदरा जैसे बड़े शहरों तक पहुंचने के लिए यात्रियों और मालवाहक वाहनों को बेहतर रूट विकल्प मिल सकता है। 

कुल मिलाकर करीब 2,600 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा 136.1 किलोमीटर लंबा उज्जैन-गरोठ कॉरिडोर मालवा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना बन सकता है। इसके पूरा होने के बाद उज्जैन से अहमदाबाद का सफर करीब 5.5 से 6 घंटे में पूरा होने की उम्मीद है, जबकि इंदौर, देवास, रतलाम और मंदसौर जैसे शहरों को भी गुजरात की दिशा में बेहतर कनेक्टिविटी मिल सकती है। 

सिंहस्थ-2028 से पहले अगर यह परियोजना पूरी तरह तैयार होकर एक्सप्रेसवे नेटवर्क से जुड़ती है, तो गुजरात से उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं के साथ-साथ व्यापारिक और सामान्य यातायात को भी बड़ा फायदा मिलने की संभावना है।

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