घूंघट से DSP तक का सफर, पति की मौत के बाद नहीं मानी हार, पहले प्रयास में बनीं अफसर
Udaipur Times, DSP Anju Yadav Success Story : हरियाणा के नारनौल की रहने वाली अंजू यादव की कहानी संघर्ष, साहस और आत्मविश्वास की मिसाल है। एक समय ऐसा था जब उन्हें RAS का फुल फॉर्म तक नहीं पता था, लेकिन हालात से हार मानने के बजाय उन्होंने खुद को संभाला और पहले ही प्रयास में राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) परीक्षा पास कर राजस्थान पुलिस में DSP बनने का सपना पूरा कर लिया।
12वीं के बाद हो गई शादी
अंजू यादव का बचपन आर्थिक तंगी में बीता। उनके पिता ड्राइवर थे और बाद में गांव में छोटी-सी दुकान चलाने लगे। चार बहनों वाले परिवार में अंजू ने 12वीं तक की पढ़ाई गांव में की। कॉलेज दूर होने की वजह से उन्होंने डिस्टेंस एजुकेशन से ग्रेजुएशन किया। बीए फाइनल के दौरान ही वर्ष 2009 में उनकी शादी कर दी गई।

शादी के बाद बदली जिंदगी
शादी के बाद अंजू राजस्थान के बहरोड़ के पास स्थित गंडाला गांव पहुंचीं। शुरुआत में उन्हें बताया गया था कि उनके पति नौकरी करते हैं, लेकिन बाद में पता चला कि उनका संबंध अपराध की दुनिया से है। विरोध करने पर उन्हें घरेलू हिंसा का भी सामना करना पड़ा।
बेटे के जन्म के बाद लिया बड़ा फैसला
2012 में बेटे के जन्म के बाद अंजू ने अपने बच्चे का बेहतर भविष्य बनाने का फैसला किया। ससुराल से अलग होकर वह मायके लौट आईं। पिता ने उनका साथ दिया। बेटे को परिवार के पास छोड़कर वह जयपुर चली गईं और दोबारा पढ़ाई शुरू की।
पहले बनीं टीचर, फिर शुरू की RAS की तैयारी
तैयारी के दौरान उन्होंने शिक्षक भर्ती परीक्षा पास की और पहले मध्य प्रदेश के जवाहर नवोदय विद्यालय में तथा बाद में राजस्थान में शिक्षक के रूप में नौकरी की। इसी दौरान किसी परिचित ने उन्हें RAS परीक्षा की तैयारी करने की सलाह दी। उस समय उन्हें RAS का पूरा नाम भी नहीं पता था। उन्होंने अखबार पढ़ना शुरू किया, यूट्यूब से पढ़ाई की और अपनी तैयारी को नई दिशा दी।

पहले ही प्रयास में मिली सफलता
साल 2021 की RAS भर्ती के लिए अंजू ने आवेदन किया। इसी दौरान उनके पति का निधन भी हो गया, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। 2022 में मुख्य परीक्षा, 2023 में इंटरव्यू और आखिरकार 2024 में उनका चयन राजस्थान पुलिस में DSP के पद पर हो गया।
दुख को बनाया ताकत
अंजू यादव कहती हैं कि एक समय ऐसा था जब लगातार संघर्ष के कारण उनकी आंखों से आंसू निकलना भी बंद हो गए थे। उन्होंने रोने के बजाय अपने लक्ष्य पर ध्यान दिया और साबित कर दिया कि मुश्किल हालात इंसान को रोक नहीं सकते, अगर उसके इरादे मजबूत हों।
