जंग, भारत के सकल घरेलू उत्पादन में 4 से 5 प्रतिशत हानि का कारण

अंतर्राष्ट्रीय ज़िंक एसोसिएशन द्वारा हिन्दुस्तान ज़िंक के सहयोग से नई दिल्ली में द्वितीय अन्तर्राष्ट्रीय गेल्वेनाईजिंग सम्मेलन आयोजित करने जा रहा है जिसका उद्घाटन माननीय केन्द्रीय मंत्री खान, बिजली एवं कोयला मंत्री पियूष गोयल द्वारा किया जाएगा। इस दो दिवसीय सम्मेलन में अलग अलग उद्योगो जैसे हिन्दुस्तान ज़िंक , जेएसडब्लयू, टाटा स्टील, पीजीसीआईएल, मारूति, एस्सार, इन्टरनेश्नल नेड ज़िंक डेवलेपमेट एसोसिएषन एवं आईआईटी मुम्बई के 20 से अधिक वक्ताओं का संबोधन होगा।

 | 
जंग, भारत के सकल घरेलू उत्पादन में 4 से 5 प्रतिशत हानि का कारण  

अंतर्राष्ट्रीय ज़िंक एसोसिएशन द्वारा हिन्दुस्तान ज़िंक के सहयोग से नई दिल्ली में द्वितीय अन्तर्राष्ट्रीय गेल्वेनाईजिंग सम्मेलन आयोजित करने जा रहा है जिसका उद्घाटन माननीय केन्द्रीय मंत्री खान, बिजली एवं कोयला मंत्री पियूष गोयल द्वारा किया जाएगा। इस दो दिवसीय सम्मेलन में अलग अलग उद्योगो जैसे हिन्दुस्तान ज़िंक , जेएसडब्लयू, टाटा स्टील, पीजीसीआईएल, मारूति, एस्सार, इन्टरनेश्नल नेड ज़िंक डेवलेपमेट एसोसिएषन एवं आईआईटी मुम्बई के 20 से अधिक वक्ताओं का संबोधन होगा।

दो दिवसीय सम्मेलन में ज़िंक व स्टील मार्केट की संभावनाओं एवं ज़िंक  के रेल पटरियों एवं आधारभूत संरचनाओं के साथ ही भारत में उभरते क्षेत्रों में संभावित जस्ता और इस्पात बाजार, बुनियादी ढांचे में ज़िंक  की भूमिका को मजबूती प्रदान करने पर विचार विमर्श  होगा। सम्मेलन का मुख्य विषय भारतीय अर्थव्यवस्था के सकल घरेलू उत्पादन में जंग से हो रहे नुकसान के बारे में होगा।

हिन्दुस्तान जि़ंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुनील दुग्गल ने कहा कि जंग लगने के कारण भारत प्रतिवर्ष सकल घरेलू उत्पाद की 5 प्रतिशत के लगभग हानि हो रही है जबकि पश्चिमी देशों  में सार्वजनिक निर्माणों यथा पुल, राजमार्गो, ऑवरब्रिज हवाई अड्डो, मेट्रो स्टेशनों, रेल्वे स्टेशनों इत्यादि में अपने निर्माणों तथा आधारभूत ढॉंचे के पूर्ण गेल्वेनीकरण को सांविधिक जरूरत बना चुके हैं। जिसके फलस्वरूप जंग लगने की समस्या से पूरी निजात मिली है। उदाहरण के तौर पर एथेंस ब्रिज पेंसिल्वेनिया और कर्टिस रोड ब्रिज मिशीगन  निर्माण की संरचना में जस्ता स्टील सरिया का उपयोग और काले इस्पात रेबार के साथ बनाये गये पुलो का जीवन पारंपरिक पुलो की तुलना में बहुत लंबे समय तक है। इनका जीवन उन पुलो जो कि सामान्य काले स्टील सरियों से बने है जैसा कि जस्तीकरण किये हुए सरियें क्लोराईड कान्सन्ट्रेशन से लगभग 4 से 5 गुना ज्यादा चलता है और निम्न पीएच स्तर पर भी निष्क्रीय रहता है जो कि जंग लगने की दर को कम करता है। देश शहरीकरण के दौर से गुजर रहा है और आने वाले आर्थिक संरचनाओं की होड में जस्तीकरण वास्तव में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है जिसका कोई विकल्प नही है।

मुख्य धातुओं में जि़ंक जंग निरोधी तत्वों में वर्ष 2016 में सर्वोत्तम स्थान पर है। औद्योगिक स्त्रोतों के अनुसार ज़िंक  जिसका खनन विश्व भर में किया जा रहा है का लगभग 58 प्रतिशत प्रयोग जस्तीकरण में किया जा रहा है, 14 प्रतिशत मेटल सांचें में ढालने में, 10 प्रतिशत मिश्र धातुं एवं पितल बनाने में, 9 प्रतिशत रसायनों में, 6 प्रतिशत रोल्ड जि़ंक और 3 प्रतिशत अन्य कार्यो में लिया जा रहा है।

औद्योगिक विशेषज्ञ मानते है कि ज़िंक  का इस्तेमाल जस्तीकरण कर निर्माण कार्यो में किया जाता है तो यह स्टील उद्योग के लिये वरदान का कार्य करता है। पानी और नमी के सपंर्क में आने पर जिंक में जंग कम होता है और लोहे को कैथोडिक प्रतिरक्षण प्रदान करता है। भवन एवं निर्माण उद्योग कुल निर्मित परत लगे स्टील पट्टी का लगभग दो तिहाई इस्तेमाल करते है जो कि मुख्यतः वाणिज्यिक एवं औद्योगिक बिल्डिंग के छत एवं आवरण में उपयोग होता है। बिल्डिंग में इस्तेमाल किये जाने वाली ज्यादातर सामग्री में जिंक के ऊपर मील से बने हुए जैविक परत है। तटीय क्षेत्रों जंग से अधिक समस्या प्रभावित है जिन्हें जस्तीकरण के उपयोग से बड़ी राहत मिल सकेगी। होट डीप जस्तीकरण अपने वास्तवीक रूप में अभी विश्व में एक बढ़ता हुआ उद्योग है कॉस्टिंग भी दूसरा महत्वपूर्ण क्षेत्र है जो कि नये मिश्र धातु एवं नयी तकनीक पर आधारित है। प्लास्टीक से प्रतिस्पर्धा वर्ष 1970 में ज़िंक  कॉस्टिंग के लिये भय का कारण था किन्तु नये मिश्र धातु के विकास एवं अप्रत्याषित बढ़ोतरी के करण ज़िंक  कास्टिंग के अस्तीत्व को नियंत्रण में रखने में मदद मिली। विशेषकर जहां मजबूत एवं तैयार वस्तुओं की आवश्यकता थी चूंकि कास्टिंग कम हो सकता था इसलिये कम धातु का उपयोग किया गया था जिससे वजन भी कम हुआ, गुणवत्ता बढ़ी लेकिन साथ ही मूल्य भी कम हुआ।

निष्चित तौर पर ज़िंक  को भी बिना गुणवत्ता घटाएं पुर्नचक्रित किया जा सकता है इसलिये जिंक के स्क्रेप का भी एक विषेष बाजार है जहां इसके अवशेषों  का वर्गीकरण किया जाता है ज़िंक के तत्व के अनुसार इनका मूल्यांकन किया जाता है। जिंक स्क्रेप को महत्वपूर्ण उत्पाद के रूप में बदला जाता है।

हिन्दुस्तान ज़िंक वेदांता समूह की कम्पनी विश्व  की सर्वोपरी एवं भारत की एकमात्र सीसा, जस्ता एवं चांदी उत्पादक कम्पनी है जो कि 8000 करोड़ रुपयें से ज्यादा का विनिवेश अपने खनन और परिष्करण के लिये कर रही है। कम्पनी अपने खनन के द्वारा धातु का उत्पादन 1.2 मिलियन टन प्रतिवर्ष तक बढ़ाने की ओर अग्रसर है।

To join us on Facebook Click Here and Subscribe to UdaipurTimes Broadcast channels on   GoogleNews |  Telegram |  Signal